अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने कपूर खानदान की विरासत, बेहतर ट्रेनिंग और ऐसा चेहरा लेकर बॉलीवुड में प्रवेश किया था जो रोमांटिक हीरो और आर्ट हाउस अभिनेता दोनों के सांचों में फिट था। उनकी पहली फिल्म असफल रही, लेकिन इसके तुरंत बाद आयीं उनकी ‘बचना ए हसीनो’ व ‘वेकअप सिड’ जैसी फिल्मों ने साफ कर दिया कि वह महज स्टार किड नहीं, बेहतर अभिनेता भी हैं।
साल 2007 में फिल्म ‘सावरिया’ के साथ ही अभिनेता रणबीर कपूर का डेब्यू हुआ था। वह कपूर खानदान की चौथी पीढ़ी हैं। उनसे शुरू से ही ‘भविष्य के सुपर स्टार’ की उम्मीदें जोड़ दी गई। वजह, उसने कपूर खानदान की विरासत, बेहतर ट्रेनिंग और एक ऐसा चेहरा लेकर बॉलीवुड में प्रवेश किया था, जो सुपर रोमांटिक हीरो और आर्ट हाउस अभिनेता दोनों के सांचों में फिट बैठता था। ऐसे में भले उनकी पहली फिल्म ‘सावरिया’ असफल रही, लेकिन उनकी अभिनय क्षमता पर किसी को शक नहीं हुआ। पहली फिल्म के असफल हो जाने के तुरंत बाद आयीं उनकी ‘बचना ए हसीनो’, ‘वेकअप सिड’ और ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ जैसी फिल्मों ने साफ कर दिया कि वह महज स्टार किड नहीं, बेहतर अभिनेता भी हैं। साल 2009 की ‘वेकअप सिड’ में शहरी युवा की उलझनों और साल 2011 की ‘रॉक स्टार’ में जुनूनी कलाकार का जो कसा हुआ अभिनय पेश किया, वो उनके कैरियर के शुरुआती मील पत्थर बन गये।
अभिनय क्षमता के साथ स्टारडम भी
रणबीर कपूर का कैरियर एक नहीं, दो धाराओं पर आगे बढ़ता रहा है। एक तरफ जहां उन्होंने ‘रॉक स्टार’, ‘बर्फी’, ‘तमाशा’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय पेश किया है। वहीं ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ और ‘एनिमल’ जैसी ‘मास इंटरटेनर’ फिल्मों में अपना सिक्का जमाया है। जहां उनकी फिल्में 100 करोड़ क्लब का हिस्सा बन जाती हैं, वहीं उनका अभिनय दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है। उनकी फिल्मों में ‘ये जवानी है दीवानी’ ने साल 2013 में करीब 200 करोड़ रुपये, तो फिल्म ‘संजू’ ने साल 2018 में 340 करोड़ रुपये ज्यादा का बिजनेस किया था वहीं फिल्म ‘एनिमल’ ने पूरी दुनिया में 900 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था। कमाई के ये आंकड़े साबित करते हैं कि प्रतिभाशाली अभिनेता के साथ वे पैन इंडिया सुपर स्टार भी हैं।
प्रयोगों के जोखिम
शुरुआत में लोगों ने उनसे अगले शाहरुख या अगले आमिर की उम्मीदें लगायी थीं। लेकिन वह सीधे-सीधे इन उम्मीदों पर तो खरे नहीं उतरे, पर कई मायनों में खुद को आगे ले गये। क्योंकि वे अभिनेता और सुपर स्टार जैसी दो धाराओं पर आगे बढ़ते रहे, वहीं कुछ जोखिमभरे प्रयोगों को भी आजमाया। मसलन ‘बेशर्म’ और ‘बाम्बे वेलवेट’, उनकी नाकामयाब फिल्में रहीं, लेकिन इन फिल्मों में भी उनके अभिनय की लोगों ने तारीफ की। आने वाले दिनों में भी उनके प्रयोगों की नई तासीर दिखेगी। क्योंकि एक तरफ जहां उन्होंने ‘एनिमल’ जैसी जुनूनी फिल्म की है, वहीं आने वाली अपनी एक फिल्म में वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के किरदार को निभा रहे हैं। देखना है कि क्या दर्शक उनके इन दो अलग-अलग छोरों के अभिनय को सहजता से पचा पायेंगे?
मजबूत फैन बेस
बहरहाल इन दो दशकों के अपने अभिनय सफर में उन्होंने एक मजबूत फैन बेस बनाया है और बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं का भरोसा जीता है। उनका कैरियर ग्राफ न तो तीर की भांति ऊपर गया है और न ही दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज की तरह नीचे आया। उन्होंने अभिनय और स्टारडम के बीच स्वाभाविक पुल बनाया है। रणबीर कपूर की खास पहचान यह है कि वह अपने किरदारों की कमजोरियों को छुपाते नहीं बल्कि दर्शकों के समक्ष खुली किताब की तरह रखते हैं। रणबीर कपूर की बोलती आंखें और उनकी सहज बॉडी लैंग्वेज जितना संवादों से दर्शकों को अपने साथ जोड़ती है, उससे कहीं ज्यादा अपनी खामोशी से आश्वस्त करते हैं। वह जहां नये जमाने के निर्देशकों की पहली पसंद हैं, वहीं 90 के दशक के निर्देशक भी उन्हें अपनी योजनाओं का हिस्सा बनाते हैं। -इ.रि.सें.

