एआई आधारित ब्यूटी ऐप्स चेहरे की फोटो देखकर त्वचा की स्थिति की बारीकियों को खोजते हैं। फिर डाटाबेस में मौजूद मैचिंग उपायों के आधार पर स्किन केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के उपयोग की सलाह देते हैं। इससे शॉपिंग और स्किन केयर अधिक सुविधाजनक बन गई है। हालांकि वह त्वचा के विशेषज्ञ के मुकाबले भरोसेमंद नहीं है। एआई किसी त्वचा रोग का विश्वसनीय इलाज नहीं कर सकता। गंभीर समस्याओं में डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
आजकल हर समस्या का समाधान एआई से जानना आम हो गया है। तो त्वचा की उलझनों का जवाब ब्यूटी एक्सपर्ट के पास जाकर पाने से पहले आपका स्मार्ट फोन देने लगा है। चेहरे की एक तस्वीर खींचिए, एआई ऐप को दिखाइये और तुरंत वह आपको बता देगा, त्वचा में कितना रुखापन है, पिगमेंटेशन कहां है, पोर्स कितने हैं और आपके लिए कौन सा सीरम या सनस्क्रीन बेहतर हो सकता है। ब्यूटी की दुनिया में यह पर्सनलाइज्ड स्किन केयर का एआई युग है। लेकिन इस मामले में जरूरी सावधानी भी बरतनी चाहिए। एआई आपकी तस्वीर में लालिमा, दाग या ऐक्ने जैसी दिखायी देने वाली चीजों को तो पहचान सकता है, पर इनके पीछे छिपे मेडिकल कारणों का भरोसेमंद डायग्नोसिस नहीं कर सकता। इसलिए एआई को अपना ब्यूटी असिस्टेंट बनाइये, लेकिन डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा विशेषज्ञ मत मान लीजिए। आखिर त्वचा पर दिखने वाली हर समस्या ब्यूटी प्रॉब्लम नहीं होती। कभी-कभी वह किसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।
चेहरे को पढ़ने की एआई की प्रक्रिया
एआई पॉवर्ड ब्यूटी टूल्स सामान्यतः कंप्यूटर विजन या मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करते हैं। कैमरे से ली गयी तस्वीर के आधार पर ये टूल्स बताते हैं कि चेहरे में रिंकल्स, पिगमेंटेशन, रेडनेस, पोर्स, अन-इवन स्किन टोन या ऐक्ने लाइक स्पॉट्स हैं। इसके बाद एल्गोरिद्म इन संकेतों को किसी ट्रेंड ब्यूटी प्रोडक्ट डेटा बेस से मिलाकर संभावित स्किन केयर रिकमेंडेशन देता है। मसलन अगर तस्वीर में त्वचा ड्राई दिखायी देती है तो एआई टूल मॉश्चराइजिंग इनग्रेडिएंट्स वाले प्रोडक्ट सुझायेगा। यदि चेहरे में पिगमेंटेशन दिखायी देती है तो ब्राइटिंग या सनस्क्रीन फोकस्ड रुटीन की सलाह मिलेगी। यानी एआई का काम है इमेज को डेटा में बदलना और डेटा के आधार पर रिकमेंडेशन देना।
पर्सनलाइजेशन का आकर्षण
ब्यूटी इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव मास प्रोडक्ट से पर्सनाइलाज्ड ब्यूटी की ओर हो रहा है। एक ही मॉयश्चर अब सभी के काम का नहीं रहा। वे अलग-अलग लोगों की त्वचा के प्रकार, उनकी उम्र, मौसम, लाइफस्टाइल और स्किन केयर आदतों के मुताबिक परिणाम बदलते हैं। एआई टूल्स इसी अंतर को पकड़ने की कोशिश करते हैं। मसलन दिल्ली की गर्मी में रहने वाले किसी युवा की स्किन केयर की जरूरतें नैनीताल में या श्रीनगर में रहने वाले युवा की जरूरतों से अलग होंगी। एआई के सवाल-जवाब में यदि स्किन टाइप, कंसर्न, एज और लाइफस्टाइल जैसी जानकारियां शामिल हों, तो वह पर्सनलाइज्ड सुझाव देगा। यही कारण है कि एआई ब्यूटी टूल्स केवल प्रोडक्ट रिकमेंडेशन तक सीमित नहीं रहे। कई प्लेटफॉर्म वर्चुअल मेकअप ट्राइ ऑन, शेड मैचिंग और स्किन केयर ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं भी दे रहे हैं।
एआई ने बदला शॉपिंग एक्सपीरियंस
एआई का एक सबसे ज्यादा दिखायी देने वाला इस्तेमाल मेकअप में है। मान लीजिए किसी युवती को लिपस्टिक का नया सेट खरीदना है, तो वह दुकान पर जाकर कई शेड आजमाने के बजाय स्मार्ट फोन कैमरा के सामने वर्चुअल ट्राइ ऑन के जरिये अलग-अलग कलर्स उसमें कैसे लग रहे हैं, देखेगी और जो उसमें सबसे सुंदर दिखेगा, उसे खरीदेगी। इसी तरह फाउंडेशन या हेयर कलर का भी वर्चुअल प्रिव्यू खरीदने से पहले यह अंदाजा दे सकता है कि वह लुक कैसा दिखायी देगा।
एआई कोई त्वचा विशेषज्ञ नहीं
एआई को अपना ब्यूटी असिस्टेंट मानने वालों को समझना चाहिए कि एआई महज एक तकनीक है और तकनीक कुछ तथ्यों के आधार पर फैसला लेती है। एआई भले आपको यह भ्रम देती हो कि वह आपका पर्सनल केयर कर सकती है। लेकिन एआई त्वचा विशेषज्ञ नहीं है। इसलिए एआई को ब्यूटी असिस्टेंट मानने वालों को सावधान रहना चाहिए। क्योंकि एआई आपके बारे में जो कुछ सुझाव देगी, वह खींचे गये फोटोग्राफ के रंग और उसमें मौजूद लाइट के मुताबिक होगा। वास्तव में एआई कभी यह नहीं बता सकती कि उसके इस रिकमेंडेशन के पीछे मेडिकल रीजन क्या है? ऐक्ने, एग्जिमा, फंगल इंफेक्शन, एलर्जिक रिएक्शन या पिगमेंटेशन जैसी स्थितियां एक-दूसरे जैसी दिख सकती हैं। इसलिए एआई रिकमेंडेशन को डायग्नोसिस समझना, अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य के साथ खिलवाड़ करना है। यदि चेहरे पर अचानक गंभीर ऐक्ने, लगातार खुजली, ब्लीडिंग मोल, तेजी से बदलता पिगमेंटेशन या कोई अन्य असामान्य बदलाव दिखायी दे, तो स्मार्ट फोन की मदद लेने की बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। क्योंकि कैमरे की रोशनी आपके त्वचा को कुछ भी मान सकती है। -इ.रि.सें.

