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देशों के बीच व्यापार वृद्धि में मददगार समझौते

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए

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फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या मुक्त व्यापार समझौता दो या दो से ज्यादा देशों के बीच आपस में किया गया एक ऐसा व्यापार अनुबंध है, जिसमें वे एक-दूसरे की वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले शुल्क यानी टैरिफ और कोटा तथा दूसरी बाधाओं को घटाते हैं या बिल्कुल समाप्त कर देते हैं ताकि उन देशों के बीच आपस में सुगमता से कारोबार हो सके।

यूपीएससी ने जबसे सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में सी-सैट का प्रारूप शामिल किया है, तबसे जनरल स्टडीज का दायरा बहुत विस्तृत हो गया है। साथ ही अब सिर्फ आईएएस के एग्जाम में ही नहीं बल्कि करीब-करीब सभी तरह की परीक्षाओं में जनरल स्टडीज के व्यापक दायरे से सवाल पूछे जाते हैं। इसी के मद्देनजर जानिये इस बार नॉलेज बाइट में ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ के बारे में:

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौता

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हाल ही में (27 जनवरी 2026) भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच सम्पन्न फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि भारत और यूरोपीयन यूनियन के 27 देशों के साझा समूह के बीच हुए इस मुक्त व्यापार समझौते से अमेरिका बौखला गया था। हालांकि अब अमेरिका के साथ भी ट्रेड डील हो गयी है। हाल में जहां हमने यूरोपीयन यूनियन के साथ अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता जिसे ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ कहते हैं, किया है। वहीं आने वाले दिनों में कई और देशों के साथ भी एफटीए करने की योजना पर भारत काम कर रहा है।

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क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या मुक्त व्यापार समझौता दो या दो से ज्यादा देशों के बीच आपस में किया गया एक ऐसा व्यापार अनुबंध है, जिसमें वे एक-दूसरे की वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले शुल्क यानी टैरिफ और कोटा तथा दूसरी बाधाओं को घटाते हैं या बिल्कुल समाप्त कर देते हैं ताकि उन देशों के बीच आपस में सुगमता से कारोबार हो सके। इसे ही मुक्त व्यापार समझौता या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कहते हैं। वास्तव में यह समझौता पारंपरिक संरक्षणवादी नीतियों के विपरीत होता है, जिससे सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा मिलता है और कारोबार के लिए आने वाली बाजार बाधाएं समाप्त होती हैं।

एफटीए का इतिहास

दुनिया में सबसे पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 1860 में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कोबडेन-शेवेलियर ट्रीटी के रूप में हुआ था, जिसमें कई शुल्कों को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व व्यापार के वैश्विक ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) का 1995 में गठन हुआ, जिससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को वैधानिक रूप से अधिक मजबूती मिली। जहां तक भारत के अपने पहले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सवाल है, तो हमने सन 1998 में श्रीलंका के साथ पहला एफटीए किया था। दिसंबर 1998 में इसके लिए हस्ताक्षर हुए और मार्च 2000 में जाकर लागू हुआ। यह भारत का पहला एफटीए था, जो पूर्ण रूप से व्यापार बाधाओं को हटाने या घटाने के उद्देश्य से किया गया था।

विभिन्न देशों के साथ भारत के एफटीए

1998 में श्रीलंका के साथ पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के बाद अब तक यानी 27 जनवरी 2026 तक में 13 से अधिक एफटीए/सीईपीए/ईसीटीए कर चुका है और कई ऐसे समझौते पाइपलाइन में हैं। हमने श्रीलंका के बाद- नेपाल, भूटान, मालदीव (साफ्टा सहित), आसियान, सिंगापुर (सीईसीए), दक्षिण कोरिया (सीईपीए), संयुक्त अरब अमीरात (सीईपीए), जापान (सीईपीए), ऑस्ट्रेलिया (ईसीटीए), मॉरीशस (सीईसीपीए), यूनाइटेड किंगडम (सीईपीए), ओमान, यूरोपीयन संघ (ईएफटीए)। भारत ने अब तक इन देशों या ब्लॉकों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है और अभी कई ऐसे समझौते पाइपलाइन में हैं। दुनिया का 70 से 75 फीसदी वैश्विक व्यापार किसी न किसी एफटीए/आरटीए नेटवर्क के भीतर ही होता है। क्योंकि अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं कम से कम किसी एक मुक्त व्यापार समझौता का हिस्सा हैं। यह व्यापार वैश्विक आपूर्ति शृंखला, निवेश और सेवाओं तक विस्तृत है। भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच हाल में जो मुक्त व्यापार समझौता सम्पन्न हुआ है, वह दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत व्यापार और 25 प्रतिशत जीडीपी को प्रभावित करेगा।

एफटीए में भारत का हिस्सा

भारत का एफटीए नेटवर्क निर्यात व्यापार को व्यापक बनाता है। लेकिन भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का पारंपरिक स्वरूप अभी विश्व व्यापार संगठन के जरिये ही संचालित है। एफटीए के तहत भारत का व्यापार 20 से 30 प्रतिशत है। हालांकि ये लगातार बढ़ रहा है। दुनिया में एफटीए का भविष्य उज्ज्वल है। क्योंकि विभिन्न देशों को वैश्विक व्यापार को स्थिर, लागत योग्य और समान अवसर वाला बनाने की जरूरत है। एफटीए से वैश्विक सप्लाई चेन की वृद्धि होती है। आपूर्ति विविधीकरण, तकनीक संचालित सेवाएं और निवेश प्रवाह को गति मिलती है। राष्ट्रीय हित, रोजगार, श्रम और पर्यावरण के मानक, डिजिटल व्यापार और सेवा व्यापार के क्षेत्र के विस्तार से एफटीए की भूमिका और बढ़ी है।

भारत की अर्थव्यवस्था एफटीए के जरिये तेजी से फल-फूल रही है। भारत भविष्य में जिन और देशों के साथ एफटीए करने की कोशिश कर रहा है, उसमें इस्राइल, कनाडा और आसियान देशों का समूह शामिल हैं। एफटीए वैश्विक आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, जो विभिन्न देशों के बीच व्यापार में सहयोग, शुल्क में कमी और निवेश वृद्धि में मदद करता है। -इ.रि.सें.

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