आमिर खान हैं कि मानते नहीं...
बॉलीवुड में बेहद कम ऐसे फिल्मकार या स्टार होंगे जो फिल्मों की असफलताओं को लेकर सार्वजनिक सफाई देने के बजाय नए काम में जुट जाना पसंद करते हैं। आमिर खान उन्हीं फिल्मी हस्तियों में से एक हैं। कुछ अरसा पहले...
बॉलीवुड में बेहद कम ऐसे फिल्मकार या स्टार होंगे जो फिल्मों की असफलताओं को लेकर सार्वजनिक सफाई देने के बजाय नए काम में जुट जाना पसंद करते हैं। आमिर खान उन्हीं फिल्मी हस्तियों में से एक हैं। कुछ अरसा पहले ‘लाल सिंह चड्ढा’ और हाल ही में ‘बंटवारा’ की विफलता के बावजूद वह फिल्म निर्माण में सक्रिय हैं। इन दिनों फिर से अपने पसंदीदा डायरेक्टरों राजकुमार हिरानी और नितेश तिवारी के साथ कुछ प्रोजेक्ट पर चर्चा जारी है। वे लगातार अच्छे विषयों की तलाश में रहते हैं।
अभिनेता आमिर खान को अपने किसी भी पराजय का ढिंढोरा पीटना बिल्कुल पसंद नहीं है। अपनी पिछली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के फ्लॉप के बावजूद वह नये-नये प्रोजेक्ट को लेकर इस कदर मशगूल हो गए कि उन्होंने किसी को इसका गुमान भी होने नहीं दिया। मगर अब ऐसा कहा जा रहा है कि ‘लाहौर-1947’ यानी ‘बंटवारा’ की विफलता को वह शायद ही भुला पाएंगे। क्योंकि इस फिल्म के पिटने के बाद उनकी क्रिएटिव और परफेक्शनिस्ट इमेज को गहरा आघात लगा।
‘बंटवारा’ के बाद की खामोशी
वे अब एकदम किंकर्तव्यविमूढ़ हो सकते हैं। पर उन्होंने इस पराजय का ठीकरा किसी पर नहीं फोड़ा है। कथित तौर पर उनकी बेवजह की दखलअंदाजी की वजह से उनकी पिछली फिल्म की तरह इस फिल्म का भी बुरा हश्र हुआ। असल में असगर वजाहत के उपन्यास ‘जिन लाहौर नहीं देख्या’ पर ‘बंटवारा’ आधारित थी। उसके मुरीद निर्देशक राजकुमार संतोषी भी थे। पर वह इसे अपने प्रिय हीरो सनी देओल के साथ बनाना चाहते थे। सर्वविदित है कि ‘गदर-2’ की शानदार सफलता के बाद आमिर ने सिर्फ इतना कहा था कि वह अपनी अगली फिल्म सनी देओल के साथ बनाना चाहते हैं। आमिर और सनी अभिन्न मित्र हैं। यह संयोग बहुत अच्छा रहा कि फिल्म के तीनों प्रमुख कर्णधारों के मत एकदम मिल रहे थे। इसके बाद खामोशी धीरे-धीरे टूटने लगी।
सनी की सोच
फिल्म का टाइटल सामने आते ही सब समझ गए कि यह देश विभाजन को केंद्र में रखकर बनाई जाएगी। संतोषी ने इस फिल्म के बारे में एक-दो बार हल्का सा जिक्र किया था। मगर सनी शुरू से इस कहानी के मुख्य किरदार को लेकर ज्यादा संतुष्ट नहीं थे। मूल कहानी में इसका मुख्य किरदार एक हिंदू शरणार्थी परिवार की सुरक्षा के लिए सभी से लड़ता है। जिस तरह की उनकी फिल्मी इमेज है, यह फिल्म का मुख्य किरदार उसके विरुद्ध है। संतोषी ने उनकी इच्छा के मद्देनजर इसमें कुछ परिवर्तन कर दिया।
प्रोड्यूसर आमिर की रफ्तार
जब फिल्म का प्रोड्यूसर आमिर खान हो, तो बात एकदम दूसरी होती है। रफ्तार तेजी से आगे बढ़ने लगी। मगर फिल्म की रश प्रिंट देखकर आमिर को ऐसा लगा कि फिल्म उनके मनमुताबिक नहीं बनी है। और इसके बाद ही परफेक्शनिस्ट आमिर ने अपने स्वभाव के मुताबिक इसमें कई बदलाव करना शुरू कर दिया। लिहाजा री-शूटिंग के एक लंबे दौर के बाद जब रिलीज का सिग्नल मिला, तो ‘बंटवारा’ पूरी तरह से एक एजेंडा फिल्म बनकर रह गई।
आमिर को कोई पछतावा नहीं
लगता है, आमिर इस तरह की पराजय के आदी हो चुके हैं। फिल्म प्रोडक्शन के प्रति उनका समर्पण भाव पहली बार ‘लगान’ में खुलकर सामने आया। इसके बाद वह रुके नहीं। सिर्फ ‘लगान’ ही नहीं, ‘तारे जमीन पर’, ‘दिल्ली बेली’, ‘दंगल’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ आदि फिल्में उनके फिल्म प्रोडक्शन का चरम हैं। पर अब ‘लाल सिंह चड्ढा’ और ‘बंटवारा’ के बाद उनकी सोच को बड़ा झटका लगा है। अच्छी बात यह कि आमिर अपनी पराजय का कोई बचाव नहीं करते हैं। बस, कुछ नया सोचने लगते हैं। अपना अगला काम शुरू कर देते हैं। इन दिनों वह फिर से डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के साथ दो कहानियों की सिटिंग पर बैठ रहे हैं। सुना है कि वह ‘दंगल’ के चर्चित निर्देशक नितेश तिवारी के भी एक सब्जेक्ट को लेकर काफी गंभीर हैं।
अभी कुछ फाइनल नहीं
उधर आमिर के मुताबिक अभी तक उन्होंने कुछ भी फाइनल नहीं किया है। हिरानी के साथ उनकी कई मुलाकातें हो चुकी हैं, पर अभी तक कुछ बातें तय नहीं हुईं। आमिर बताते हैं, ‘मैं तो फिल्म निर्माण में हमेशा सक्रिय रहना चाहता हूं, इसलिए अच्छे सब्जेक्ट सुनता रहता हूं। काफी सोच-विचार कर उन पर फिल्म बनाने का संकल्प लेता हूं।’
होमवर्क के हिमायती
वह चाहे फिल्म का किरदार हो या कोई खास कैरेक्टर, आमिर अपने होमवर्क का खास ध्यान रखते हैं। आमिर कहते हैं, ‘कुछ लोग मेरे बारे में कुछ भी कहते रहें, असल में मैं एक बहुत डाउन टू अर्थ व्यक्ति हूं। ’
आरोपों का कुछ नहीं करना
उनके बारे में आए दिन आने वाले आरोपों के बारे में सिर्फ एक ही जवाब होता है, ‘यदि मैं यह कहूं कि ये आरोप सच्चाई से दूर, महज सिर्फ गॉसिप होते हैं, तो क्या आप यकीन कर लेंगे। दूसरे एक्टरों की तरह मैं भी डायरेक्टर का एक्टर हूं। शायद आपको पता नहीं, मैंने संतोषी की फिल्म भी उनसे हुई कई मुलाकातों के बाद ही बनाने का मन बनाया था।’

