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संगीत शौकीनों के लिए शानदार और सुरीला कैरियर

बैंड एंड म्यूजिक

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बैंड और म्यूजिक का कैरियर अब लगातार आगे बढ़ रहा बहुआयामी पेशा बन गया है। लाइव परफोर्मेंस, स्टूडियो रिकॉर्डिंग, फिल्म/ओटीटी साउंड ट्रैक, म्यूजिक प्रोडक्शन, साउंड इंजीनियरिंग और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक अनेक कमाई के रास्ते खुल गये हैं। स्ट्रीमिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण भारत की संगीत अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ी है, सही प्रशिक्षण और उचित माहौल के जरिये आपमें जरूरी योग्यता है और आपका काम बेहतर है, तो इस क्षेत्र में आपके लिए उज्ज्वल भविष्य है।

बैंड और म्यूजिक का पेशा आज की तारीख में सिर्फ शौक नहीं रहा बल्कि एक व्यवस्थित उद्योग बन चुका है, जिसमें लाइव परफोर्मेंस, स्टूडियो रिकॉर्डिंग, फिल्म/ओटीटी साउंड ट्रैक, म्यूजिक प्रोडक्शन, साउंड इंजीनियरिंग और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक अनेक कमाई के रास्ते खुल गये हैं। स्ट्रीमिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण हाल के दशकों में भारत की संगीत अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ी है, जिसमें नये कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अवसर पहले से कहीं ज्यादा बढ़े हैं।

न्यूनतम शैक्षिक योग्यता

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आधारभूत रूप से बैंड/संगीत में शामिल होने के लिए किसी औपचारिक शैक्षणिक बाध्यता दूसरे क्षेत्रों जैसी नहीं है। पर प्रोफेशनल कैरियर के लिए कम से कम 10+2 पास होना तो जरूरी ही है। क्योंकि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी मांग के कारण कई संस्थान अपने यहां प्रवेश के लिए एक न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की मांग करते हैं। साथ ही प्रैक्टिकल ऑडिशन, थ्योरी टेस्ट या पोर्टफोलियो मांगते हैं। इसलिए औपचारिक 12वीं तक तो पढ़ाई जरूरी ही हो जाती है। क्योंकि कई ऐसे वाद्ययंत्र हैं, जिन पर महारत हासिल करने के लिए काफी थ्योरिटिकल पढ़ाई भी करनी होती है। जैसे- वायलन/गिटार/वोकल/परकशन में प्रदर्शन क्षमता और सैद्धांतिक ज्ञान जरूरी है। वैसे कई संस्थान डिप्लोमा/सर्टिफिकेट 10वीं के बाद भी देते हैं। लेकिन अगर टीचिंग के क्षेत्र में जाना हो, तो वैसी ही पढ़ाई करनी होती है जैसे किसी दूसरे उच्च क्षेत्र में प्रवेश के लिए जरूरी होती है। गौरतलब है कि आजकल देश में टीचिंग के लिए अध्यापकों की भी अच्छी खासी जरूरत है। अगर शैक्षिक संस्थान न होकर सामान्य म्यूजिक स्कूल या म्यूजिक सिखाने का संस्थान हो तो वहां पर भी म्यूजिक टीचर के लिए कम से कम 10+2 की शैक्षिक योग्यता चाहिए। लेकिन जब म्यूजिक प्रोड्यूसर/इंजीनियर आदि क्षेत्र में कैरियर बनाना हो, तब तो पेशेवर इंजीनियरिंग डिग्री या डिप्लोमा जरूरी ही हो जाता है। कहने का मतलब यह कि म्यूजिक क्षेत्र में कैरियर कम पढ़ाई यानी 10+2 के बाद भी संभव है और उच्च स्तर पर कैरियर बनाने के लिए बीए म्यूजिक या एमए म्यूजिक अथवा पीजी डिप्लोमा इन म्यूजिक की भी जरूरत पड़ती है।

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म्यूजिक शिक्षा के संस्थान

यदि आप प्रो-लेवल ट्रेनिंग चाहते हैं तो कुछ प्रतिष्ठित संस्थान इसके लिए विशेष पढ़ाई कराते हैं। साथ ही इन म्यूजिक शिक्षा संस्थानों के संगीत इंडस्ट्री से भी अच्छे कनेक्शन हैं। इसलिए ये प्लेसमेंट में भी मदद करते हैं। ऐसे कुछ संस्थान इस प्रकार से हैं-

केएम म्यूजिक कंजर्वेटरी- चेन्नई स्थित ये संस्थान परफोर्मेंस म्यूजिक, टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन में दक्षता प्रदान करता है। यहां से शिक्षा लेने का मतलब है कि फिल्म संगीत इंडस्ट्री से भी आपके कनेक्शन बन जाते हैं।

फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे- साउंड रिकॉर्डिंग, साउंड डिजाइनर के पीजी/डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए यह संस्थान विशेष रूप से जाना जाता है। यहां से पढ़ाई करना फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में साउंड कैरियर के लिए बहुत उपयोगी है।

विश्वविद्यालयों के संगीत विभाग : विद्यार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय से बी म्यूजिक या बीए म्यूजिक के अकादमिक कोर्स कर सकते हैं। ये संस्थान क्लासिकल और वेस्टर्न दोनों म्यूजिक की ट्रेनिंग देते हैं।

प्रो-ट्रेनिंग संस्थान- साउंड इंजीनियरिंग और म्यूजिक प्रोडक्शन के लिए तमाम निजी स्कूल बड़े शहरों में उपलब्ध हैं जैसे- साउंडलियाज और सीमएडू आदि।

ओपन और डिस्टेंस एजुकेशन – डिस्टेंस मोड के जरिये भी इग्नू आदि से बीए क्लासिकल और बीए हिंदुस्तानी संगीत की डिग्रियां हासिल की जा सकती हैं।

अनुमानित कमाई

म्यूजिक क्षेत्र में कमाई का कोई एक पैमाना नहीं है। आप बहुत अच्छी कमाई भी कर सकते हैं और ऐसा भी हो सकता है कि कुछ न कमा पाएं, यह सब कुछ आपकी मेहनत और संपर्कों आदि पर निर्भर करता है। जहां नये परफॉर्मर और छोटे बैंड स्थानीय कॉफी हाउस, विभिन्न किस्म के समारोह और शादियों आदि में कुछ हजार रुपये लेकर परफॉर्म करते हैं, तो वहीं दिल्ली, मुंबई और बंग्लुरु जैसे शहरों में यही प्रोफेशनल लाखों की कमाई करते हैं। स्थायी नौकरी के रूप में म्यूजिशियन को सरकारी स्कूलों, कॉलेजों या प्राइवेट स्कूलों में भी कैरियर बनाने की भरपूर संभावनाएं होती हैं। निजी क्षेत्र में ऐसे अध्यापकों के लिए कम से कम 20 से 25 हजार रुपये मासिक तो मिलते ही हैं। सरकारी संस्थानों में दूसरे अध्यापकों की सैलरी की तरह इन्हें भी वेतनमान मिलता है। आजकल सोशल मीडिया खासकर यू-ट्यूब से भी बहुत अच्छी कमाई हो जाती है बशर्ते आपका प्रोडक्शन वायरल हो जाए। जब से संगीत क्षेत्र के लिए कमाई के जरिये डिजिटल प्लेटफॉर्म बने हैं, तब से इस क्षेत्र में कैरियर बनाने वालों के लिए आय के बड़े महत्वपूर्ण दरवाजे खुले हैं। देश विभिन्न फिल्म उद्योगों में म्यूजिशियन या संगीतकार फिल्मों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में आपकी रुचि है और आपका काम भी बढ़िया है, तो हमेशा अधिक से अधिक कमाई की संभावनाएं आपके हिस्से होती हैं।

कैरियर में आगे कैसे बढ़ें

बैंड और म्यूजिक का कैरियर अब लगातार आगे बढ़ रहा बहुआयामी पेशा बन गया है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कल्पना और टेक्निकल कौशल दोनों ही चाहिए। सही प्रशिक्षण और उचित माहौल के जरिये आप जरूरी योग्यता और बेहतर काम हेतु विशेषज्ञता के स्वामी हैं, तो समझिये ये क्षेत्र आपको निराश नहीं करेगा। इस क्षेत्र में ऐसे लोगों के लिए लगातार बेहतर से बेहतर संभावनाएं मौजूद होती हैं। -इ.रि.सें.

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