डिजिटल क्रांति के चलते पारंपरिक पेशों के अलावा नये कैरियर विकल्प भी उभर रहे हैं जिनमें यूट्यूब, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन शामिल है। इन्हें पढ़ाई या काम के साथ ही शुरू कर सकते हैं। कम निवेश में शुरुआत संभव है, लेकिन सफलता के लिए विषय का ज्ञान, प्रेजेंटेशन का कौशल, लगातार रिसर्च और दर्शकों का भरोसा जरूरी हैं। एक बार बिजनेस जम जाए तो बाद में अच्छी आय हो सकती है।
आज के युवा से जब उसके कैरियर के बारे में पूछा जाता है तो उसके सामने इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, सरकारी सेवा, बैंकिंग या दूसरे पारंपरिक विकल्पों की लंबी सूची होती है। लेकिन डिजिटल क्रांति ने कैरियर की इस सूची में कुछ ऐसे नाम भी जोड़ दिए हैं। इनमें यूट्यूब, पॉडकास्ट और व्यापक अर्थों में कंटेंट क्रिएशन प्रमुख हैं। यूट्यूब पर कोई व्यक्ति शिक्षा देता है, कोई समाचार और विश्लेषण करता है, कोई यात्रा दिखाता है, कोई खाना बनाना सिखाता है तो कोई किताब, सिनेमा, खेल या कैरियर पर अपनी समझ साझा करता है। दूसरी ओर पॉडकास्ट ने उन लोगों को भी मंच दिया है जिनकी ताकत कैमरे के सामने आने के बजाय उनकी आवाज, विचार और बातचीत में है। कुछ शर्तों के साथ इसे स्थायी और कमाऊ कैरियर बनाया जा सकता है।
आसान है शुरुआत
इस कैरियर का सबसे आकर्षक पक्ष यह है कि इसमें प्रवेश के लिए किसी बड़े कार्यालय या भारी निवेश की अनिवार्यता नहीं है। एक अच्छा स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन और किसी विषय पर अपनी पकड़ से शुरुआत की जा सकती है। लेकिन आज हजारों लोग वीडियो और पॉडकास्ट बना रहे हैं। ऐसे में केवल कैमरे के सामने आ जाना पर्याप्त नहीं। दर्शक को कुछ ऐसा देना होगा जिसके लिए वह अगली बार भी उसी व्यक्ति के पास लौटे। इसलिए कंटेंट क्रिएटर के लिए विषय का ज्ञान, भाषा पर पकड़, शोध क्षमता, कहानी कहने की कला, प्रस्तुति, वीडियो और ऑडियो संपादन तथा सोशल मीडिया की समझ महत्वपूर्ण हो जाती है। इस क्षेत्र को केवल ‘मोबाइल से कमाई’ का माध्यम समझने के बजाय एक व्यवसाय और पेशेवर कौशल के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
कमाई के कई रास्ते
यूट्यूब का पार्टनर प्रोग्राम क्रिएटर को विज्ञापन से राजस्व के अलावा कुछ अन्य आर्थिक सुविधाओं तक भी पहुंच देता है। भारत भी इसके विस्तारित कार्यक्रम में शामिल देशों में है। इसके अलावा ब्रांड के साथ सहयोग, प्रायोजित सामग्री, एफिलिएट मार्केटिंग , मेंबरशिप और अपने उत्पाद या सेवाएं बेचने जैसे रास्ते भी हो सकते हैं। भारत में पात्र क्रिएटर के लिए यूट्यूब शापिंग एफिलिएट प्रोग्राम भी उपलब्ध है। इसका अर्थ यह है कि सफल क्रिएटर की कमाई केवल वीडियो पर दिखने वाले विज्ञापन तक सीमित नहीं रहती। उसकी दर्शक संख्या और विश्वसनीयता स्वयं एक आर्थिक संपत्ति बन जाती है। लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है। हर चैनल लाखों रुपये नहीं कमाता। बहुत से चैनल लंबे समय तक बहुत कम आय देते हैं और कुछ कभी पर्याप्त आय तक पहुंच ही नहीं पाते। इसलिए अपनी पढ़ाई या नौकरी छोड़कर इसी पर निर्भर हो जाना प्रेक्टिकल नहीं।
पॉडकास्ट की अपनी अलग दुनिया
वीडियो के मुकाबले पॉडकास्ट को श्रोता काम करते, यात्रा करते या आराम करते हुए भी सुन सकता है। इंटरव्यू, कहानी, शिक्षा, साहित्य, समाचार-विश्लेषण, कैरियर सलाह, व्यवसाय और विशेषज्ञ चर्चा जैसे विषयों के लिए यह माध्यम विशेष रूप से उपयोगी है। स्पोटिफाई जैसे प्लेटफॉर्म ने भी पॉडकास्ट रचनाकारों के लिए कमाई के रास्ते विकसित किए हैं। पार्टनर प्रोग्राम के लिए विज्ञापन और अन्य राजस्व विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
ये पढ़ाई करना है उपयोगी
यदि किसी विद्यार्थी में कैमरे के सामने बोलने की क्षमता है तो वह बिना औपचारिक डिग्री के भी अपना चैनल शुरू कर सकता है। लेकिन यदि वह इस क्षेत्र को गंभीर कैरियर बनाना चाहता है तो पत्रकारिता, मास कम्युनिकेशन, डिजिटल मीडिया, विज्ञापन, जनसंचार या संबंधित विषयों की पढ़ाई उसे कई बुनियादी कौशल दे सकती है। देश के कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में मीडिया और पत्रकारिता से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध हैं। मसलन, भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), जेवियर इंस्टिट्यूट आफ कम्युनिकेशनंस , मुंबई और एशियन कालेज आफ जर्नलिज्म चेन्नई। हालांकि विद्यार्थी को केवल संस्थान के नाम पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। पाठ्यक्रम में डिजिटल मीडिया, वीडियो प्रोडक्शन, ऑडियो, मल्टीमीडिया पत्रकारिता, सोशल मीडिया, स्टोरीटेलिंग और व्यावहारिक प्रशिक्षण कितना है, यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है।
डिग्री से ज्यादा जरूरी पोर्टफोलियो
कंटेंट की दुनिया में विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रमाण डिग्री मिलने से पहले ही दे सकता है। यदि कोई विद्यार्थी पत्रकारिता पढ़ रहा है। वह साथ-साथ अपना छोटा-सा यूट्यूब चैनल शुरू कर सकता है। कोई दूसरा विद्यार्थी साहित्य पर पॉडकास्ट बना सकता है। तीसरा स्थानीय समस्याओं पर वीडियो तैयार कर सकता है। कुछ महीनों या वर्षों में उसके पास केवल डिग्री नहीं, बल्कि काम का पोर्टफोलियो भी होगा। नौकरी देने वाली मीडिया संस्था के सामने यह प्रभावी प्रमाण हो सकता है।
छोटे शहर बड़े अवसर
इस क्षेत्र में काम करने के लिए दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में रहना अनिवार्य नहीं है। छोटे शहर का युवा अपने शहर, क्षेत्र, बोली, खान-पान, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार या स्थानीय समस्याओं पर कंटेंट बना सकता है। हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री की संभावनाएं इसी कारण महत्वपूर्ण हैं। अपने शहर से ही डिजिटल मंच खड़ा किया जा सकता है।
विश्वसनीयता भी जरूरी
इस कैरियर में सबसे बड़ी पूंजी कैमरा नहीं, विश्वसनीयता है। आज किसी वीडियो को वायरल करना संभव है, लेकिन लंबे समय तक दर्शक बनाए रखना कठिन है। सनसनीखेज शीर्षक से एक वीडियो देखा जा सकता है, पर यदि सामग्री कमजोर निकली तो दर्शक अगली बार लौटेगा नहीं। इसलिए सफल क्रिएटर को यह समझना होगा कि दर्शक केवल मनोरंजन नहीं चाहता; वह उपयोगी, विश्वसनीय और मौलिक सामग्री भी चाहता है। एआई ने स्क्रिप्ट लिखने, अनुवाद करने, संपादन, थम्बनैल तैयार करने और कई तकनीकी कामों को आसान बना दिया है। कंटेंट क्रिएटर की भूमिका बदल रही है। जब मशीन सामान्य सामग्री आसानी से बना सकेगी, तब मौलिक विचार, व्यक्तिगत अनुभव, मानवीय आवाज और विश्वसनीय प्रस्तुति का महत्व और बढ़ेगा। इसलिए आने वाले समय का सफल क्रिएटर केवल तकनीक जानने वाला व्यक्ति नहीं होगा। वह ऐसा व्यक्ति होगा जिसके पास कहने के लिए अपनी बात और उसे प्रभावी ढंग से कहने की क्षमता होगी।
शौक को बनाएं कैरियर
यूट्यूब और पॉडकास्ट की दुनिया में शुरुआत एक शौक से हो सकती है, लेकिन मंजिल एक व्यवसाय तक पहुंच सकती है। कोई व्यक्ति अकेले शुरुआत कर सकता है, फिर वीडियो एडिटर, डिजाइनर, लेखक, शोधकर्ता और सोशल मीडिया प्रबंधक की छोटी टीम बना सकता है। आगे चलकर विज्ञापन, ब्रांड सहयोग, प्रशिक्षण, किताब, कोर्स या अपने उत्पाद तक पहुंच सकता है। इसलिए इसे केवल ‘यूट्यूबर बनना’ कहना शायद इसके पूरे विस्तार को समझना नहीं है। यह वास्तव में डिजिटल मीडिया उद्यमिता की दिशा में बढ़ने का रास्ता भी हो सकता है। विद्यार्थी पहले इसे साइड कैरियर के रूप में शुरू करे। पढ़ाई जारी रखते हुए सप्ताह में एक या दो वीडियो या पॉडकास्ट तैयार किए जाएं। किसी एक विषय को चुना जाए। दर्शकों की प्रतिक्रिया देखी जाए। प्रस्तुति में सुधार किया जाए और धीरे-धीरे तकनीकी तथा व्यावसायिक समझ विकसित की जाए। जब पर्याप्त दर्शक, नियमित आय और कई आय-स्रोत विकसित हो जाएं, तभी इसे पूर्णकालिक कैरियर बनाने पर विचार करना अधिक समझदारी होगी।
बढ़ रहा है दायरा
यूट्यूब, पॉडकास्ट और कंटेंट क्रिएशन से हर व्यक्ति के लिए स्थायी आय संभव होगी, यह कहना सही नहीं होगा। सफलता के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य, अनुशासन, लगातार सीखने की आदत और दर्शकों का विश्वास चाहिए। इसलिए विद्यार्थियों के लिए संदेश है- कंटेंट क्रिएशन को कौशल, मेहनत और व्यवसाय की तरह लें।

