बच्चों के स्वस्थ विकास में मददगार संतुलित खानपान
बढ़ती उम्र में बच्चे को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक पोषक व संतुलित खान-पान जरूरी है। उम्र के इस दौर में वे सक्रिय भी ज्यादा रहते हैं इसलिए डाइट बेहतर चाहिए। भोजन में आवश्यकता के अनुसार कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,...
बढ़ती उम्र में बच्चे को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अधिक पोषक व संतुलित खान-पान जरूरी है। उम्र के इस दौर में वे सक्रिय भी ज्यादा रहते हैं इसलिए डाइट बेहतर चाहिए। भोजन में आवश्यकता के अनुसार कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल्स, आयरन व फैट शामिल करें। पैरेंट्स को उन्हें दिन में 5 मील यानी ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अलावा मिड मॉर्निंग और ईवनिंग टी पर ब्रंच या अच्छे स्नैक्स देने चाहिए। इसी संबंध में दिल्ली स्थित आहार विशेषज्ञ डॉ. रचना कटारिया से रजनी अरोड़ा की बातचीत।
माना जाता है कि व्यक्ति का बचपन उसके स्वस्थ जीवन का आधार होता है। बचपन में पड़ी आदतें अमूमन ताउम्र बनी रहती हैं, वो चाहे स्वभावगत आदतें हों या खानपान संबंधी। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चे जहां विकास के दौर से गुजर रहे होते हैं, वहीं बाहर या स्कूल जाते हैं। जहां इंफेक्शन की चपेट में आने से जल्द बीमार भी हो सकते हैं।
जरूरी है उनकी इम्यूनिटी मजबूत हो जिसके लिए उन्हें पोषक और संतुलित आहार खिलाने की आदत डालना जरूरी है। खासकर 10-12 साल के प्यूबर्टी स्टेज में पहुंचे बच्चे के लिए हैल्दी डाइट लेना अत्यावश्यक होता है। बच्चे की ग्रोथ में यह पीरियड बहुत अहम है क्योंकि इसके बाद वह किशोरावस्था (13-18 साल) में प्रवेश करता है जो वैज्ञानिकों के हिसाब से व्यस्क होने का ब्रिज पीरियड माना जाता है। यह पुल जितना मजबूत होगा, बच्चे का विकास उतना अच्छा होगा। प्यूबर्टी स्टेज में किशोरावस्था के इस ब्रिज को मजबूत बनाने का काम शुरू हो जाता है। हालांकि इस पीरियड में बच्चे का शारीरिक विकास धीमा होता है, लेकिन आगे के लिए मजबूत नींव बननी शुरू होती है। इसलिए नींव मजबूत बनाने के लिए इस स्टेज में बच्चे के लिए पोषक और संतुलित आहार की जरूरत बढ़ जाती है।
जरूरी है कि बढ़ते बच्चों को दिन में 5-मील पैटर्न पर नियत समय पर आहार देना चाहिए जिसमें ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अलावा मिड मॉर्निंग और ईवनिंग टी पर ब्रंच या अच्छे स्नैक्स देने चाहिए। बच्चों को आकर्षित करने के लिए उन्हें पोषक और संतुलित रेनबो डाइट देनी चाहिए। विभिन्न फूड-कॉम्बीनेशन की मदद से नई-नई चीजें बनाते रहना चाहिए। मौसमी फल-सब्जियां जरूर शामिल करनी चाहिए।
कैलोरी के लिए अनाज
इस उम्र के बच्चों को एनर्जी और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जरूर देने चाहिए क्योंकि बच्चे बहुत एक्टिव होते हैं। बच्चों को रोजाना तकरीबन 1300-1800 कैलोरी की जरूरत होती है। इनमें तकरीबन 60-70 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से और बाकी फैट से मिलनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट के लिए आहार में मल्टीग्रेन साबुत अनाज, मल्टीग्रेन आटा, ब्राउन चावल का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए। मैदा, चावल जैसे रिफाइंड अनाज को यथासंभव अवॉयड करना चाहिए। उन्हें हर मील में अलग-अलग अनाज से बनी चीजें देना बेहतर है। इससे एक तो पोषक तत्व अधिक मिलेंगे, दूसरा बच्चे को बचपन से ही हर तरह का अनाज खाने की आदत हो जाएगी।
प्रोटीन का खास ध्यान
डब्ल्यूएचओ के हिसाब से हर रोज बच्चे के प्रति किलो वजन के हिसाब से 1 ग्राम प्रोटीन देना जरूरी है। दस साल तक की लड़कियों में अपेक्षाकृत प्रोटीन की जरूरत बढ़ जाती है क्योंकि इस स्टेज में कुछ लड़कियों में माहवारी चक्र शुरू हो जाता है। जिसकी वजह से उनके शरीर में ब्लड लॉस और हीमोग्लोबिन कम होने लगता है। जिसकी आपूर्ति के लिए आहार में आयरन और प्रोटीन ज्यादा होना चाहिए।
शाकाहारी भोजन में राजमाह, चना, सोयाबीन, दालें, स्प्राउट्स, दूध और दुग्ध उत्पाद, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स जैसे खाद्य पदार्थों की अधिकता होनी चाहिए। इसके अलावा मांसाहारी खाद्य पदार्थ ले सकते हैं। शाकाहारी बच्चे को दिन में कम से कम 2 कटोरी दाल, करीब 500 मिली दूध और दुग्ध उत्पाद देने चाहिए।
कैल्शियम और आयरन
इस स्टेज में बच्चे की लंबाई या शारीरिक-संरचना का विकास धीरे-धीरे हो रहा होता है। कैल्शियम से भरपूर आहार उनकी हड्डियों को मजबूत करने और स्वस्थ विकास में मदद करता है। जैसे-दिन में कम से कम 2 गिलास दूध और दुग्ध पदार्थ, बीन्स, पालक, बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल, किशमिश, खुबानी, सीड्स, केला, समुद्री खाद्य पदार्थ। बच्चे को आयरन बहुल चीजें खाने की आदत डालनी चाहिए जैसे- गुड़, काले चने, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियां, पुदीना, चुकंदर, सेब। मांसाहारी खाद्य पदार्थों में लिवर, प्रॉन्स, अंडा व सी फूड दे सकते हैं। शरीर में आयरन के अवशोषण के लिए बच्चे को रोजाना विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ दे सकते हैं जैसे- नींबू, संतरा, मौसमी व कीवी आदि। वहीं विटामिन ए रिच खाद्य पदार्थ उनकी आंखों, बालों, स्किन के स्वास्थ्य को बनाए रखने और इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए जरूरी हैं जैसे- गाजर, सीताफल, पालक, मेथी आदि हरी पत्तेदार सब्जियां।
ताजी फल-सब्जियां
आहार में बच्चे को मौसम के अनुसार ताजी फल-सब्जियां भरपूर मात्रा में देनी चाहिए ताकि उनके शरीर में विटामिन-मिनरल्स की कमी न हो और बच्चे का स्वस्थ विकास हो। रोजाना बच्चे को 2-3 फल खाने के लिए देने चाहिए जिसे ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर से पहले या ब्रंच टाइम में दे सकते हैं। इसी तरह बच्चे के आहार में दिन में 2-3 सर्विंग सब्जियां शामिल हों। लंच और डिनर में एक सब्जी जरूर होनी चाहिए। ब्रेकफास्ट या स्कूल टिफिन में भी सब्जियों से बनी चीजें देनी चाहिए।
ड्राई फ्रूट्स करेंगे मिनरल्स की आपूर्ति
मिनरल्स की आपूर्ति के लिए बच्चे को बचपन से ही मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स खाने के लिए देने चाहिए। यानी मिले-जुले ड्राई फ्रूट्स के 10-15 दाने रोजाना देने चाहिए। बादाम, किशमिश, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स रात को भिगोकर और छिलका उतारकर ब्रेकफास्ट में देना बेस्ट है। सर्दियों में रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ दे सकते हैं ताकि एनर्जी के साथ शरीर को गर्म भी रख सकें।
फैट : ओमेगा-3 से भरपूर चीजें
वैज्ञानिक तौर पर देखें तो हमारा ब्रेन फैट से बनता है। इसलिए बढ़ते बच्चों के मानसिक विकास के लिए आहार में गुड फैट यानी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें देनी चाहिए। इसके लिए बच्चों को नियमित रूप से दुध और दुग्ध उत्पाद, 1-2 चम्मच देसी घी या फिर ऑयली मछली जैसी चीजें दी जा सकती हैं। मक्खन, चीज, मयोनीज़ जैसी चीजें सीमित मात्रा में देना बेहतर है। खाना बनाने के लिए ऑलिव ऑयल, सरसों का तेल इस्तेमाल करना बेहतर है। लेकिन बच्चों को फ्राइड फूड ज्यादा नहीं देना चाहिए ताकि उनमें मोटापा और उससे होने वाली बीमारियों का रिस्क न हो।
पर्याप्त मात्रा में पानी
40 किलो वजन तक के बच्चे को रोजाना 1.5 लीटर तक पानी या अन्य लिक्विड डाइट जरूर लेनी चाहिए। पानी न केवल शरीर में रक्त और ऑक्सीजन संचार में सहायक है, बल्कि बच्चों के पाचन में भी मदद करता है।

