दिल्ली में जर्जर इमारतों की सुरक्षा जांच पर सवाल, 30.7 लाख इमारतों का सर्वे, सिर्फ 62 ‘खतरनाक’ घोषित
Delhi Building Safety Audit : राजधानी में इमारत गिरने की घटनाओं के बीच MCD की सालाना कवायद पर उठे सवाल, पहले से असुरक्षित भवनों पर कार्रवाई भी अधूरी
Delhi Building Safety Audit : दिल्ली नगर निगम (MCD) की मानसून पूर्व इमारतों की सुरक्षा जांच के आंकड़ों ने उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम ने इस साल करीब 30.7 लाख इमारतों का सर्वे किया, लेकिन इनमें से केवल 62 को खतरनाक घोषित किया गया। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब राजधानी में इमारत गिरने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
सवाल केवल यह नहीं है कि कितनी इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया, बल्कि यह भी है कि निगम की जांच में असुरक्षित पाई गई इमारतों पर समय रहते कार्रवाई होती है या नहीं।
चार साल बाद भी स्थायी समाधान का इंतजार
गफ्फार मार्केट की एक इमारत को 2021 में IIT रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर MCD ने जर्जर घोषित किया था। इसके बावजूद अब तक उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मार्केट में हजारों दुकानें अब भी संचालित हो रही हैं। इससे सवाल उठता है कि असुरक्षित घोषित इमारत लंबे समय तक इस्तेमाल में कैसे बनी रह सकती है।
इसी तरह रोहिणी सेक्टर-15 स्थित कृष्णा कुंज की बी-ब्लॉक, पॉकेट बी-6 की इमारत नंबर 18 को करीब चार साल पहले जर्जर घोषित किया गया था। यहां अब भी स्थायी समाधान का इंतजार है। इमारत के आसपास बांस के सहारे लगाए गए हैं और ‘डेंजर जोन’ की चेतावनी भी लगाई गई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल है कि पहले से असुरक्षित घोषित किसी इमारत के गिरने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
MCD का अपना कार्यालय भी जर्जर
मामला केवल निजी इमारतों तक सीमित नहीं है। पुरानी दिल्ली स्थित MCD का जोनल कार्यालय भी खराब हालत में है। कई जगहों पर दीवारों से मसाला झड़ रहा है और भवन का रखरखाव भी खराब है। यह कार्यालय भूमिगत मेट्रो लाइन के पास स्थित है। मेट्रो ट्रेनों के गुजरने के दौरान यहां कंपन महसूस होने की बात भी सामने आई है।
इसके बावजूद भवन की मरम्मत लंबित है। AAP पार्षद अरीबा खान ने हाल में स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। इस भवन में MCD के जोनल संपत्ति कर और शिक्षा विभाग के कार्यालय चलते हैं। ऐसे में कर्मचारी और यहां आने वाले लोग लगातार इस भवन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जोनवार आंकड़ों में भी अंतर
MCD के वार्षिक मानसून पूर्व सर्वे के अनुसार, करोल बाग जोन में सबसे ज्यादा 19 खतरनाक इमारतें चिन्हित की गईं। इसके बाद पश्चिम जोन में नौ, मध्य जोन में आठ, दक्षिण जोन में चार और सिटी-सदर पहाड़गंज जोन में पांच इमारतें खतरनाक घोषित की गईं। वहीं, शाहदरा उत्तर, शाहदरा दक्षिण और सिविल लाइंस जोन में एक भी इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया।
30.7 लाख इमारतों के सर्वे में केवल 62 को खतरनाक घोषित किए जाने से सालाना निरीक्षण की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में इमारत ढहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब मुद्दा केवल असुरक्षित इमारतों की पहचान करने तक सीमित नहीं है। अहम सवाल यह है कि MCD अपनी जांच में सामने आई कमियों पर समय रहते कार्रवाई करता है या नहीं, ताकि चेतावनी किसी हादसे में न बदले।

