CEC पर अकेले आयोग की शक्तियां इस्तेमाल करने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह करेगा सुनवाई
याचिका में 14 कथित आपत्तियों का हवाला; चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लेने और मतदाता सूची से जुड़ी प्रणालियों में बदलाव का आरोप
Supreme Court ECI Plea : सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर मंगलवार को सहमति जताई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में गठित निर्वाचन आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि कानून के तहत आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या सदस्यों के बीच मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।
बिहार निवासी याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग को मिली शक्तियों का इस्तेमाल CEC अकेले नहीं कर सकते।
चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का हवाला
याचिका में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज की गई कम से कम 14 कथित आपत्तियों का हवाला दिया गया है। इनमें आरोप लगाया गया है कि आयोग की मंजूरी के बिना ECI के नाम से पत्र जारी किए गए, एक साल से अधिक समय तक बैठकों के एजेंडे और कार्यवृत्त साझा नहीं किए गए तथा दोनों चुनाव आयुक्तों की भागीदारी या मंजूरी के बिना मतदाता सूची से जुड़ी प्रणालियों में बदलाव किए गए।
याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 में किए गए बदलाव को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया है। इसके अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी कि SIR से जुड़े अतिरिक्त विवरण मांगने के लिए फॉर्म में बदलाव करने से पहले निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी था। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया। इसके बावजूद जुलाई 2026 में संबंधित बदलाव किया गया। संधू ने बाद में इसे कथित तौर पर ‘‘अनधिकृत और अवैध’’ बताया।
चुनावी डेटाबेस की पहुंच पर भी सवाल
याचिका में चुनावी डेटाबेस के कथित केंद्रीकरण और ERONet तथा ECINet तक वैधानिक स्तर के अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, विवेक जोशी ने डेटाबेस की पहुंच से जुड़े क्रेडेंशियल का स्वतंत्र ऑडिट कराने का प्रस्ताव दिया था। वहीं, संधू ने ECI के महानिदेशक आईटी द्वारा वैधानिक चुनाव अधिकारियों की पहुंच सीमित करने के अधिकार पर सवाल उठाया था।
पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों द्वारा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के निर्देश के खिलाफ ECI के नाम से दायर अपीलों का मामला भी याचिका में उठाया गया है। याचिका के अनुसार, संधू ने सवाल किया था कि इन अपीलों को दाखिल करने की अनुमति किसने दी और इसके लिए कानूनी अधिकार क्या था।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 1995 के संविधान पीठ के टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ फैसले का भी हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि इस फैसले में बहुसदस्यीय निर्वाचन आयोग में चुनाव आयुक्तों की निर्णय लेने की भूमिका को मान्यता दी गई थी।
याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। सदस्यों के बीच मतभेद होने पर फैसला बहुमत के आधार पर किया जाना है।
मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिकाकर्ता ने आयोग के मूल रिकॉर्ड, बैठकों के एजेंडे, कार्यवृत्त, मंजूरी संबंधी दस्तावेज, फाइल नोटिंग, काम के बंटवारे के आदेश और आईटी एक्सेस रिकॉर्ड मंगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आरोपों को अवैधता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित रिकॉर्ड की जांच से यह तय किया जा सकता है कि विवादित कदम अनुच्छेद 324 और धारा 18 के अनुरूप अधिकृत थे या नहीं।
अंतरिम राहत के तौर पर मतदाता सूची के डेटा और ऑडिट ट्रेल को सुरक्षित रखने, फॉर्म 6 में आगे किसी महत्वपूर्ण बदलाव पर रोक लगाने और मामले की सुनवाई लंबित रहने तक मतदाता सूची के डेटा में अपरिवर्तनीय बदलाव रोकने की मांग की गई है।
याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC के कार्यों का इस्तेमाल करने से रोकने तथा आयोग का कामकाज अन्य दो चुनाव आयुक्तों के माध्यम से कराने की अंतरिम मांग भी की गई है।
याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल बहुसदस्यीय निकाय के रूप में और अधिनियम की धारा 18 के अनुरूप किया जाए। साथ ही, आयोग के नाम से जारी होने वाले पत्र, आदेश, निर्देश या अपील सर्वसम्मति से या आवश्यक होने पर बहुमत से लिए गए निर्णय के आधार पर ही जारी किए जाएं।

