तिरछी नज़र

जीत ने बदले विजेता के मायने

जीत ने बदले विजेता के मायने

सहीराम

लो जी, डीजल पेट्रोल से महंगा हो गया। इसे दुनिया का आठवां आश्चर्य मत समझिए। यह आश्चर्य तो है बेशक, पर वैसा आश्चर्य नहीं है। यह तो उस तरह का आश्चर्य है जिस तरह से खरगोश और कछुए की दौड़ में कछुए ने रेस जीतकर सबको आश्चर्य में डाल दिया था। अगर यह कहानी नहीं होती तो कौन विश्वास करता कि कछुआ रेस जीत सकता है। लेकिन डीजल की जीत कहानी नहीं है। उसने सचमुच पेट्रोल को पछाड़ दिया है।

रेस कई दिन से चल रही थी। लोगों की स्कोरबोर्ड पर नजर थी। डीजल धीरे-धीरे ही सही पर पेट्रोल से अपना फासला घटाता जा रहा था। पेट्रोल भी खरगोश की तरह से यह मान कर छांव में एक झपकी लेने के लिए नहीं बैठ गया था कि डीजल तो अभी बहुत पीछे है, वह मुझे कहां पकड़ पाएगा। वह बिल्कुल भी आराम करने नहीं बैठा था। वह भी निरंतर दौड़े जा रहा था। और हांफ तो बिल्कुल नहीं रहा था। उसकी दौड़ देखकर किसी को यह नहीं लग रहा था कि वह डीजल से पिछड़ जाएगा। बल्कि लोग तो उसकी दौड़ पर कुर्बान हुए जा रहे थे कि भैया जिस हवा की गति से यह दौड़ रहा है, उससे तो लगता है, यह सातवें आसमान पर ही पहुंच कर दम लेगा। वे डीजल की दौड़ की भी तारीफ कर रहे थे कि बूते अनुसार अच्छा कर रहा है, जैसे कुश्ती देखते हुए किसी पहलवान से भिड़ गए सींकिया पहलवान की तारीफ की जाती है कि यार बंदे ने हिम्मत तो दिखाई।

लेकिन यह तो किसी ने ख्वाबों-ख्यालों में नहीं सोचा होगा, किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह सींकिया पहलवान, इस दाना पहलवान को पछाड़ देगा कि दौड़ में यह पिद्दी डीजल, पेट्रोल को पछाड़ देगा। वैसे भी पेट्रोल वह तेल है जो तेज रफ्तार वाहनों में डलता है। अर्थात पेट्रोल है तो रफ्तार है। डीजल क्या है? लद्दड़ है। खरामा-खरामा चलने वाला। वह तो तेज चाल भी नहीं चल सकता। वह तो ट्रैक्टर चलाता है, वह तो ट्रक चलाता है, वह तो रेलगाड़ियां चलाता है, वह तो सिंचाई का इंजन चलाता है, वह तो जनरेटर चलाता है। खूब सारा धुआं देता है, खूब सारी आवाज करता है।

पर पेट्रोल वह है जो रेसिंग कार चलाता है, हाईस्पीड कारें चलाता है। पेट्रोल का डीजल क्या मुकाबला करेगा। कहां राजा भोज और कहां गंगुआ तेली। कहां यह शहरी तेज तर्रार और कहां यह देहाती। पेट्रोल की आखिर एक क्लास है। वह कुलीन है, वह अभिजात्य है, वह उच्चवर्गीय है। डीजल क्या है, एकदम देहाती किसान के काम आता है, ट्रकों से माल ढोने के काम आता है, रेलों की भीड़ ढोने के काम आता है, बसों की सवारियां ढोने के काम आता है। लेकिन देखो आज उसी डीजल ने पेट्रोल काे पछाड़ दिया। सींकिया पहलवान ने दाना को हरा दिया। कछुए ने खरगोश को हरा दिया।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

शहर

View All