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वैदिक घड़ी और कालगणना

ब्लॉग चर्चा

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के बाहर लगी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ सांस्कृतिक पुनरुत्थान का केंद्र बन गई है। ‘वैदिक घड़ी’ का अनावरण करके कालगणना की परंपरा को फिर से लोक प्रचलन में लाने के प्रयासों का केंद्र बिन्दु भी मध्यप्रदेश को बना दिया है। उम्मीद है कि भविष्य में पंचांग पर आधारित यह ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ लोक प्रचलन में आ जाएगी और तिथि, मुहूर्त, माह, व्रत, त्योहार की सटीक जानकारी प्राप्त करने की हमारी कठिनाई को दूर कर देगी। इसके साथ ही, डिजिटल घड़ियों में भी जल्द ही यह सुविधा आ जाएगी कि हम उनमें ‘भारत का समय’ देख सकें।

भारतीय कालगणना पर आधारित आधुनिक घड़ी की आवश्यकता हमारे नित्य जीवन में इसलिए भी है क्योंकि वर्षों से बाहरी आक्रमणों के साथ संघर्ष में बहुत कुछ भूलने के बाद भी हम अपने शुभ कार्यों को अपनी कालगणना के आधार पर ही सम्पन्न करते हैं। बच्चे के नामकरण, विवाह, त्योहार, नये कार्य का शुभारंभ, संपत्ति क्रय-विक्रय इत्यादि में हम अपने पंचांग का ही सहारा लेते हैं। लेकिन सामान्य नागरिकों को कालगणना की समझ नहीं होने के कारण अक्सर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषकर, तिथियों की गणना में आम नागरिक भ्रमित होता है। जब उसके सामने यह वैदिक घड़ी होगी तो वह स्वयं ही आसानी से ज्ञात कर लेगा कि इस समय कौन-सी तिथि और मुहूर्त है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी में एक दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक) में 30 मुहूर्त होते हैं। प्रत्येक मुहूर्त में 30 कला और प्रत्येक कला में 30 काष्ठा होती हैं। यह घड़ी किसी भी स्थान के अक्षांश, देशांतर और स्थानीय सूर्योदय के आधार पर वैदिक समय की सटीक गणना करती है। वैदिक घड़ी में विक्रम सम्वत‍् पंचांग, तिथि, पक्ष, मास और संवत‍् वर्ष का प्रदर्शन प्रमुखता से होता है। घड़ी में चंद्र चरण प्रदर्शित होता है, जिससे हमें जानकारी मिलती है कि अभी शुक्ल पक्ष चल रहे हैं या कृष्ण पक्ष, अमावस्या है या पूर्णिमा। घड़ी देखकर हम यह भी जान सकते हैं कि इस समय कौन-सा नक्षत्र है। मुहूर्त और उसके नाम का प्रदर्शन भी वैदिक घड़ी में होता है। घड़ी के शीर्ष पर मध्य भाग में सूर्य राशि प्रदर्शित होती है, जो दर्शाती है कि सूर्य वर्तमान में किस राशि में स्थित है। यह घड़ी में प्रचलित भारतीय मानक समय, दिन, दिनांक भी दिखाती है। इसके साथ ही शहर का नाम भी प्रदर्शित होता है।

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साभार : अपना पंचू डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम

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