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संस्कृति का मर्म समझें

ब्लॉग चर्चा

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‘संस्कृति, जो सुसंस्कृत करती है हमें। धरोहर हमारे देश की, जिसके सम्मुख नतमस्तक विश्व। ज्ञानोदय रूपी सूर्योदय हुआ, सबसे पहले यहां। ज्ञान रूपी रश्मियां फैली इसके प्रांगण में। अपनाया दूसरे देशों ने। संस्कृति सुसंस्कारों से सिंचित करती है और ज्ञान रूपी सूर्योदय भी सबसे पहले भारत में होता है। ऋतु-परिवर्तन, तीज-त्योहार, अतिथि-सत्कार आदि हमारी संस्कृति की विशेषताएं हैं।’ ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा, जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।’ हमारा देश महान है। यहां का आतिथ्य, परस्पर स्नेह, सौहार्द व त्याग क़ाबिले-तारीफ़ हैं। हम अजनबी लोगों को अपना बनाने में पारंगत हैं। अहिंसा परमोधर्म, जीवों के प्रति करुणा, हमारी संस्कृति के मुख्य आकर्षण हैं।

हम सभी धर्मों में आस्था रखते हैं। जाति-पाति भेदभाव से बहुत ऊपर हैं। हम में प्रेम व समर्पण की भावना कूट-कूट कर भरी है। रामचरितमानस में राम, लक्ष्मण, सीता, उर्मिला, भरत, शत्रुघ्न आदि सभी पात्रों का त्याग स्तुत्य है। दधीचि का अपनी हड्डियां दान देना श्लाघनीय है। भगवत‍‍् गीता को मैनेजमेंट गुरु के रूप में विभिन्न देशों में पढ़ाया जाना उसकी उपयोगिता सिद्ध करता है। इसलिए भारत विश्व गुरु कहलाता था।

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धीरे-धीरे हम अपनी संस्कृति से दूर होते चले गए, जिसके परिणाम-स्वरूप जीवन-मूल्यों का निरंतर पतन होता गया। रिश्तों में सेंध लग गई तथा अविश्वास के कारण रिश्तों में खटास उत्पन्न हो गई। चारवाक दर्शन के ‘खाओ-पीओ और मौज उड़ाओ’ का प्रभाव हम पर हावी हो गया। मर्यादा न जाने कहांं मुंह छुपाकर बैठ गई। बुज़ुर्ग, माता-पिता व गुरुजन हाशिये पर चले गए। शराब, सिगरेट व रेव पार्टियों का प्रचलन बढ़ गया। संबंध हैलो-हाय तक सिमट गए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिव-इन को मान्यता देना विचलित करता है। परंतु अब लिव-इन के लिए माता-पिता की अनुमति को आवश्यक स्वीकारा गया है। दूसरी ओर विदेशों में लोग हमारी संस्कृति अपना रहे हैं। वे योग, ध्यान की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वेदों का महत्व वे स्वीकारने लगे हैं। दया, करुणा, ममता व संबंधों की स्वीकार्यता का भाव पनप रहा है तथा हिन्दू धर्म में उनकी श्रद्धा-आस्था बढ़ रही है। काश! हम अपनी संस्कृति के उदार दृष्टिकोण को स्वीकार पाते। आइए! हम सत्यम‍्, शिवम‍्, सुंदरम‍् की राह पर चलते हुए शिव की भांति परहित में हलाहल का आचमन करने को सदैव तत्पर रहें। यही जीवन की सार्थकता है, जो हमें विभिन्न देशों की संस्कृति से उत्तम सिद्ध करती है।

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