अगर किसी विश्वविद्यालय ने यू-टर्न पर बाकायदा कोर्स शुरू कर दिया, तो यह निश्चित रूप से सबसे लोकप्रिय कोर्स होगा। प्रवेश परीक्षा में पहला सवाल ही होगा– ‘आपने कितनी बार अपनी बात बदली है?’
पाकिस्तान ने बार-बार कहा कि उसे भारत के साथ मैच नहीं खेलना टी20 विश्व कप में। फिर पाकिस्तान को समझ में आया कि इतना जुर्माना लगेगा कि पाकिस्तान की जीडीपी की रकम से ज्यादा बैठ सकता है। डॉलर की भीख मांगने जाते हैं पाक के हुक्मरान। पाकिस्तान दुनिया का वह भिखारी है, जो जिंदा रहने के लिए नहीं, एय्याशी के लिए भीख मांगता है। जुर्माने के लिए भी भीख मांगनी पड़ जाती। अगर यूटर्न का कोई कोर्स होता है, तो पाकिस्तान के नेता उसके टाप क्लास प्रोफेसर होतेे।
वैसे राजनीति और समाज में यू-टर्न लेना अब कोई शर्म की बात नहीं रही, बल्कि यह तो एक राष्ट्रीय खेल बन चुका है।
राजनीति में यू-टर्न लेना उतना ही आम है जितना चुनावी रैली में मुफ्त का खाना।
चुनाव से पहले नेता कहते हैं—‘हम बिजली मुफ्त देंगे।’
चुनाव जीतने के बाद कहते हैं— ‘बिजली मुफ्त नहीं, बिल मुफ्त में बढ़ेगा।’
यह वही है जैसे कोई दुकानदार कहे– ‘सामान मुफ्त है’– और फिर पैकिंग चार्ज में पूरी कीमत वसूल ले।
यू-टर्न लेने वाले नेता ऐसे हैं जैसे शादी में दूल्हा पहले कहे– ‘मैं दहेज नहीं लूंगा’– और फिर बारात के बीच में बोले– ‘बस एक कार ही सही।’ यू-टर्न लेने वाले क्रिकेट बोर्ड ऐसे हैं जैसे गली क्रिकेट का कप्तान पहले कहे– ‘मैं बैटिंग नहीं करूंगा– और फिर टॉस जीतते ही बोले–‘पहली बॉल मैं खेलूंगा।’
यू-टर्न अब कोई गलती नहीं, बल्कि एक रणनीति है। समाज में यह लाइक्स और फॉलोअर्स बढ़ाने का साधन है। पाकिस्तान की टीम का आत्मविश्वास ऐसा है जैसे कोई छात्र परीक्षा से पहले कहे–‘मैं टॉपर बनूंगा’–और रिजल्ट आने पर बोले–‘पेपर ही कठिन था।’
अगर किसी विश्वविद्यालय ने यू-टर्न पर बाकायदा कोर्स शुरू कर दिया, तो यह निश्चित रूप से सबसे लोकप्रिय कोर्स होगा। प्रवेश परीक्षा में पहला सवाल ही होगा– ‘आपने कितनी बार अपनी बात बदली है?’ और मेरिट लिस्ट उन्हीं की बनेगी जिन्होंने सबसे ज़्यादा बार पलटी मारी हो। इस विषय में छात्रों को सिखाया जाएगा कि यू-टर्न लेना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि की रणनीति है।
यहां नेताओं और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के उदाहरण दिए जाएंगे। व्यावहारिक यू-टर्न प्रयोगशाला बनायी जायेगी। इस लैब में छात्रों को रोज़ाना अभ्यास कराया जाएगा।
सुबह कहना : ‘मैं डाइट पर हूं।’
दोपहर में समोसा खाना।
शाम को कहना : ‘मैंने तो रिसर्च के लिए खाया था।’
प्रोफेसर हर छात्र को अंक देंगे कि उसने कितनी सफाई से अपनी बात पलटी। छात्रों को सिखाया जाएगा कि जनता को कैसे समझाना है कि यह यू-टर्न नहीं, बल्कि ‘जनहित’ है।

