तिरछी नज़र

दो डोज़ और सर्टिफिकेट का बोझ

दो डोज़ और सर्टिफिकेट का बोझ

राकेश सोहम‍्

राकेश सोहम‍्

आम आदमी के जीवन में सर्टिफिकेट्स की अहम भूमिका होती है। वह उम्रभर सर्टिफिकेट्स के लिए जूझता रहता है। गोया कि उसके जीवन की फ़ाइल बर्थ-सर्टिफिकेट से लेकर शिक्षा-दीक्षा, नौकरी-पेशा और डेथ-सर्टिफिकेट के बिना अधूरी रहती है। व्यक्ति के चरित्र को सर्वोपरि माना गया है। चरित्र गया, सो सब गया। चरित्रवान, सदैव बलवान। भई, चरित्र कोई दिखाई देने वाली चीज तो है नहीं कि ऊपर से दिखाई दे जाए। इसलिए इसका लिखित प्रमाण पत्र चलन में है। हाथ और मुख में कोरोना के विषाणु चिपकाए व्यक्ति भी कहां पहचाना जाता है! मास्क और सुरक्षित दूरी ही बचने का एकमात्र उपाय है। लंबे केश, बढ़ी हुई दाढ़ी और माधुरी वाणी साधु की पहचान निर्धारित करती है। लेकिन सावधान! कितने ही ऐसे लोग जेल की हवा खा रहे हैं?

बहरहाल, नौकरी पाने के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट अति आवश्यक होता है। विडंबना यह है कि कोई बिगड़ैल जाली कैरेक्टर-सर्टिफिकेट की बदौलत नौकरी पा जाता है और बेचारा सच्चरित्र, कैरेक्टर सर्टिफिकेट नहीं जुगाड़ पाने के चक्कर में भटकता रहता है! नेता का पद कैरेक्टर मुक्त माना गया है! उसे किसी कैरेक्टर-सर्टिफिकेट की दरकार नहीं होती। वह मातहतों का चरित्र भी निर्धारित करवा सकता है! जनता पर अधिकार के लिए नेता का चरित्रवान होना जरूरी नहीं है! 

इन दिनों कोरोना वैक्सीन की दोनों ख़ुराक का सर्टिफिकेट अति आवश्यक माना जा रहा है। बिना सर्टिफिकेट के नौकरी पर उपस्थिति अमान्य है। बस, रेल या हवाई यात्राओं के लिए कोरोना वैक्सीन का सर्टिफिकेट जरूरी है। गैस और राशन भी बिना इसके नहीं मिल रहा। खाद और बीज की ख़रीदी के लिए यह जरूरी है। लोग मास्क में मुंह छुपाए, मोबाइल पर सर्टिफिकेट लिए घूम रहे हैं।

भले ही सर्टिफिकेट की बाध्यता के पीछे कोरोना की खुराक को बढ़ावा देने की मंशा है। लेकिन एक चौंका देने वाले समाचार को पढ़कर पियक्कड़ झूम उठे– वैक्सीन की दोनों ख़ुराक का सर्टिफिकेट दिखाने वाले पियक्कड़ को दस परसेंट तक की छूट होगी। जब ज़िम्मेदारों के कान तक यह बात पहुंची तो एेलानकर्ता ने पियक्कड़ों पर भरोसा जताया कि पीने वाला कभी झूठ नहीं बोलेगा। इसलिए जो ग्राहक सही बोलेगा उसे शराब दी जाएगी। मेरे मोहल्ले की नुक्कड़ पर झूमता हुआ पियक्कड़ पत्नी से झगड़ते हुए बड़बड़ा रहा था, ‘तू ब्लैक फ्राइडे में न जाने क्या-क्या खरीदने को बोलती है? इधर कोरोना की दो डोज़ पर दस परसेंट डोज़ फ्री मिल रहा है, अब बोलो?’

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