टैरिफ ट्रंप की व्यापार नीति और विश्व कूटनीति का अहम हिस्सा है। अब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ की जंग तेज होती जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडाई ऑटोमोबाइल, स्टील आदि सामानों पर भारी शुल्क की धमकी के जवाब में कनाडा ने भी टैरिफ लगाने की तैयारी की है। दोनों देशों की व्यापार वार्ता विफल हो चुकी हैै।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रिय शगल है टैरिफ-टैरिफ खेलना, दुनिया के तमाम देशों को नियंत्रित करने के लिए टैरिफ को अंतर्राष्ट्रीय हथकंडे के तौर पर, एक अस्त्र के तौर पर इस्तेमाल करना उनका शौक रहा। इसी क्रम में अब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ युद्ध का नया सीजन शुरू हो गया। दोनों देशों के बीच इसे लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने अब नई धमकी दी है कि कनाडा की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और स्टील पर टैरिफ को वह 1 जनवरी से 50 फीसदी तक बढ़ा देंगे, इससे कनाडा में खलबली मची है। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता टूटने पर दोनों देशों में ठन-सी गई है। जवाब में कनाडा ने घोषणा की थी कि वह भी अमेरिकी उत्पादों पर रेसिप्रोकल 50 फीसदी टैरिफ लगाएगा।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप की नई धमकी पर कहा है कि इससे उन्हें कोई हैरत नहीं, क्योंकि ट्रंप का चरित्र इसी तरह का है और वे कनाडा की ऑटो इंडस्ट्री तबाह करना चाहते हैं। लेकिन दोहराया कि अगर अमेरिका ‘सही रवैये’ के साथ आता है तो ट्रेड वार्ता फिर से शुरू हो सकती है। अमेरिका व कनाडा में ये टकराव नया नहीं। ट्रंप ने सत्ता दोबारा संभालते ही कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की मंशा जाहिर की थी, जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गये थे। कनाडा ने इस इरादे का कड़ा विरोध भी किया था। उसके बाद ट्रंप ने कनाडा के उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया।
दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का ताजा दौर 21 अगस्त को विफल हो गया और अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। ट्रंप ने कह दिया कि कनाडा, अमेरिका का राज्य बने बिना ही राज्य होने के सारे फायदे चाहता है। यह कनाडा के जले पर नमक छिड़कने जैसा बयान था। इसका कड़ा जवाब दिया कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी ने, कि वे ट्रंप के टैरिफ का जवाब ‘डॉलर के बदले डॉलर’ के अंदाज में देंगे और 8 सितंबर से अमेरिकी उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाएंगे। कार्नी ने कहा कि अब अमेरिका और कनाडा टैरिफ वाॅर में हैं। अमेरिका के स्टील, डेरी, घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी शुल्क लगेगा। अभी कनाडा के वाहनों पर अमेरिकी टैरिफ गैर-अमेरिकी हिस्से (कंपोनेंट्स) के लिए 25 फीसदी है, जबकि स्टील पर 50 प्रतिशत शुल्क लागू है।
कार्नी ने ट्रंप टैरिफ को युद्ध की संज्ञा देते हुए कहा कि अमेरिका व्यापार समझौते में हमसे बहुत ज्यादा मांग रहा है और हमें बहुत कम दे रहा है। कनाडा ने जो जवाबी टैरिफ अमेरिका पर लगाने की धमकी दी, उसमें अमेरिकी स्टील व डेरी उत्पादों के साथ कृषि उपकरण व इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को भी रखा गया है।
कनाडा की मुख्य विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी सहित सभी दलों ने अमेरिका से टैरिफ वॉर में प्रधानमंत्री कार्नी का समर्थन किया। उधर अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ वॉर के खिलाफ आवाजें मुखर हैं। इस साल के शुरू में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस तरह से ट्रंप टैरिफ का डंडा चला रहे हैं, वह गैरकानूनी है। तब से ट्रंप चोर रास्तों से टैरिफ नीति को लागू किये हैं। अमेरिकी जनता के बड़े हिस्से को लगता है कि ट्रंप के इन फैसलों की वजह से उन्हें उत्पादों की भारी कीमत देनी पड़ती है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि इससे अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के मौके पैदा होंगे। पिछले साल अमेरिका व कनाडा दोनों देशों ने एक-दूसरे को 880 अरब डॉलर का सामान व सर्विसेज बेची थी। यानी व्यापार में दोनों ही देशों की अच्छी कमाई होती है और एक-दूसरे पर काफी निर्भर हैं। अमेरिका ने कनाडा और मैक्सिको के साथ साझा व्यापार सुगम बनाने को समझौता भी किया हुआ है। तो टैरिफ वाॅर की आंच क्या उक्त नार्थ अमेरिकन ट्रेड पैक्ट पर आएगी? दरअसल दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप टैरिफ को बतौर कूटनीतिक हथियार प्रयोग कर रहे हैं।
टैरिफ ट्रंप की व्यापार नीति और विश्व कूटनीति का अहम हिस्सा रहा है। दुनिया भर के देशों को दबाने, मनमाने व्यापार समझौते करवाने, समझौते के लिए दबाव बनाने के हथकंडे के तौर पर टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे पहले ट्रंप ने इसका इस्तेमाल चीन को झुकाने के लिए किया, लेकिन विफल रहे। चीन ने भी अपनी रेयर अर्थ की ताकत को इस्तेमाल किया और जवाबी टैरिफ की घोषणा कर दी। ट्रंप को पैर पीछे खींचने पड़े। ट्रंप ने निशाने पर भारत को भी लिया, टैरिफ का डंडा चलाया। वहीं अपने पड़ोसी देशों पर इसका इस्तेमाल किया। कनाडा पर टैरिफ वॉर शुरू की। अमेरिका चाहता था कि कनाडा के महत्वपूर्ण खनिजों पर उसका विशेषाधिकार रहे और वह किसी अन्य देश से स्वतंत्र समझौता न करे, जिसे कनाडा ने अस्वीकार किया। प्रधानमंत्री कार्नी ने ऐसी शर्त गलत बताई और जवाबी टैरिफ की घोषणा कर दी, जिससे बौखलाकर ट्रंप ने 1 जन. 2027 से कनाडाई ऑटो इंडस्ट्री पर 50 फीसदी टैरिफ की घोषणा कर दी।
अगर ऐसा होता है तो कनाडा के लिए बहुत मुश्किल होगी। व्यापार वार्ता टूटने से फिलहाल दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ गये अरबों डॉलर के व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव आया है और अभी समाधान का कोई रास्ता भी नहीं दिख रहा। हालांकि वार्ता के दरवाजे बंद नहीं। अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ कनाडा का बुलंद स्वर ट्रंप के लिए परेशानी बन सकता है।
लेखिका अंतर्राष्ट्रीय मामलों की जानकार हैं।

