अगर अंपायर ने नो-बॉल दी तो ट्रंप कहते हैं—‘अंपायर विपक्षी पार्टी का एजेंट है।’ ट्रंप की राजनीति क्रिकेट के मैच जैसी है, जिसमें हर ओवर के बाद वे कहते हैं—‘मैच मैंने ही जीता।’
ट्रंप ने पूछा अपनी फोर्स से—कितने आदमी थे।
उन्हें बताया गया कि सिर्फ आदमी नहीं, इस बार तो वेनेजुएला से औरत भी पकड़ लाये हैं। ट्रंप ग्लोबल गब्बर सिंह हो गये हैं, जिसे चाहे उठवा सकते हैं।
राजनीति का मैदान भी क्रिकेट जैसा है—यहां भी बल्लेबाज़ आते हैं, बाउंसर झेलते हैं और कभी-कभी अंपायर को ही आउट करार दे देते हैं। ट्रंप साहब इस मैदान के ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जो हर गेंद को छक्का मानकर बल्ला घुमा देते हैं।
गब्बर सिंह की तरह उनका स्टाइल है—‘अरे ओ ट्रंप के वोटरों... कितने ट्वीट किए?’
‘सरदार, पूरे सौ किए।’
‘पर लाइक कितने आए?’
‘सरदार, बस दो।’
‘तो ये दो ही काफी हैं, बाकी सब डर के मारे चुप हैं।’
ट्रंप की राजनीति का यही गब्बरीयापन है—लाइक कम हों, पर शोर ज्यादा हो।
गब्बर सिंह जब कहता है—‘जो डर गया, समझो मर गया।’
ट्रंप कहते हैं—‘जो ट्वीट नहीं किया, समझो अस्तित्व ही नहीं।’
गब्बर सिंह रात को डाकुओं की गिनती करता था।
ट्रंप सुबह उठकर फॉलोअर्स की गिनती करते हैं।
गब्बर सिंह के पास बंदूक थी।
ट्रंप के पास ट्विटर अकाउंट है।
क्रिकेट में बल्लेबाज़ पिच देखकर खेलता है।
ट्रंप पिच देखकर नहीं, पिच बदलकर खेलते हैं।
अगर पिच स्लो है, तो वे कहते हैं— ‘पिच ही नकली है।’
अगर अंपायर ने नो-बॉल दी तो
ट्रंप कहते हैं—‘अंपायर विपक्षी पार्टी का एजेंट है।’
ट्रंप की राजनीति क्रिकेट के मैच जैसी है, जिसमें हर ओवर के बाद वे कहते हैं—‘मैच मैंने ही जीता।’
भले ही स्कोरबोर्ड पर विपक्षी टीम 300 रन बना चुकी हो और उनकी टीम 30 पर ऑल आउट हो चुकी हो। ट्रंप का हर भाषण ऐसा है, जैसे टेस्ट मैच में बल्लेबाज़ हर गेंद पर चौका मारने का दावा करे, पर रन बने सिर्फ बाई से। गब्बर सिंह कहता था—‘अरे ओ सांभा, कितने आदमी थे?’
ट्रंप कहते हैं—‘अरे ओ सांभा, नोबल कमेटी में अपने कितने वोट थे?’
सांभा जवाब देता है—‘सरदार, अपने वोट कम थे।’
ट्रंप कहते हैं—‘कम थे तो क्या हुआ, नोबल तो मैंने जीत ही लिया। यह माना जाये।’
क्रिकेट में ‘डिसीजन रिव्यू सिस्टम’ होता है। ट्रंप के पास ‘डिसीजन रिव्यू ट्वीट सिस्टम’ है—जहां हर हार को जीत घोषित कर दिया जाता है।
गब्बर सिंह की तरह ट्रंप कहते हैं—‘जो मेरे साथ नहीं, वो आउट है।’

