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ट्रंप की चीन यात्रा व ईरान संकट का प्रश्न

ट्रंप की चीन यात्रा के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अब चीनी हस्तक्षेप से ईरान युद्ध समाप्त होगा? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाक़ात से ठीक पहले चीन का दौरा इसीलिए तो नहीं...

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ट्रंप की चीन यात्रा के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अब चीनी हस्तक्षेप से ईरान युद्ध समाप्त होगा? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाक़ात से ठीक पहले चीन का दौरा इसीलिए तो नहीं किया है!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल, 2026 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर एक रूढ़िवादी रेडियो होस्ट, माइकल सैवेज की पोस्ट को ‘रीशेयर’ करते हुए भारत और चीन को ‘हेलहोल्स’, यानी ‘नरक जैसी जगह’ बताया था। ट्रंप पहले वाले ‘नरक’ में पधार चुके हैं। शुक्रवार तक वे ‘नरकवासी’ रहेंगे। दोनों शासन प्रमुखों की मुलाक़ात की पहली जगह है, ‘टेम्पल ऑफ़ हैवन’। लगता है, शी ने जानबूझ कर यह वेन्यू चुना है, ताकि वो अमेरिकी राष्ट्रपति को यह महसूस करा सकें, कि आप जिसे ‘नरक’ बोल रहे थे, वहां स्वर्ग के वास्ते मंदिर भी है। इस बार ‘फ़र्स्ट लेडी’ ट्रंप के साथ चीन नहीं जा रही हैं।

सबका ध्यान यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व विरासत स्थल, ‘टेंपल ऑफ़ हेवन’ (स्वर्ग का मंदिर) पर केंद्रित होगा; यह सदियों पुराना एक शाही परिसर है, जो अनुष्ठानों, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और राजनीतिक सत्ता से जुड़ा हुआ है। रविवार को अमेरिका की मुख्य उप प्रेस सचिव अन्ना केली के अनुसार, ट्रंप के बुधवार शाम को पेइचिंग पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद अगली सुबह वे एक स्वागत समारोह और शी के साथ द्विपक्षीय बैठक में हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि इसके बाद दोनों नेता ‘टेंपल ऑफ़ हेवन’ का दौरा करेंगे, और एक राजकीय भोज में शामिल होंगे।

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केली ने कहा कि शी और ट्रंप शुक्रवार को चाय और वर्किंग लंच के लिए फिर से मिलेंगे। संभवतः उसी दिन, उभयपक्षीय समझौतों की घोषणा होगी। ट्रम्प और शी को दो दिनों की मुलाकातों में टेक्नोलॉजी, टैरिफ, व्यापार, ज़रूरी खनिजों और ताइवान जैसे मुश्किल मुद्दों से निपटना होगा; ये मुलाक़ातें अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भी गहरे साये में हैं।

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‘टेंपल ऑफ़ हेवन’ (थिएनथान पार्क) 15वीं सदी का एक धार्मिक परिसर है। यह धरती और स्वर्ग के बीच के रिश्ते का प्रतीक है—एक ऐसा विचार जो पारंपरिक चीनी ब्रह्मांड विज्ञान के केंद्र में है। वर्ष 2017 में इस जगह को देखते हुए जानकारी मिली थी, कि मिंग और किंग राजवंशों के सम्राट इसका इस्तेमाल एक पवित्र स्थल के तौर पर करते थे। यहां वे स्वर्ग के लिए बलि चढ़ाते थे, और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते थे। साथ ही, यह सम्राट की उस भूमिका को भी मज़बूत करता था, जिसमें उन्हें स्वर्गीय व्यवस्था और धरती के शासन के बीच एक मध्यस्थ माना जाता था।

मध्य पेइचिंग के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित यह परिसर 273 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह ‘फ़ॉरबिडन सिटी’ से लगभग चार गुना बड़ा इलाका है। लेकिन, थ्येनआनमन चौक स्थित ‘फ़ॉरबिडन सिटी’ (निषिद्ध नगर) का कैनवास ज़्यादा बड़ा है। यह मिंग और किंग राजवंश के 24 सम्राटों का निवास स्थान था, और 1420 से 1924 तक 500 वर्षों से अधिक समय तक चीन की राजनीतिक सत्ता का केंद्र रहा है।

वर्ष 2017 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान पेइचिंग यात्रा में ट्रंप का पहला पड़ाव ‘फ़ॉरबिडन सिटी’ ही था। इस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति का हमेशा से कहीं ज़्यादा भव्य स्वागत किया गया, जिसे पेइचिंग ने ‘स्टेट विज़िट-प्लस’ (राजकीय यात्रा से भी बढ़कर) का नाम दिया था। उस समय, शी और प्रथम महिला पेंग लियुआन ने पूर्व शाही महल में स्थित ‘बाओ युन लोऊ’ ( खज़ानों का हॉल) में ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया से चाय पर मुलाक़ात की थी। यह पहला अवसर था, जब 1949 में ‘पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना’ की स्थापना के बाद, चीन ने किसी राष्ट्राध्यक्ष की मेज़बानी ‘फॉरबिडन सिटी’ (निषिद्ध नगर) के भीतर की थी।

‘बाओ युन लोऊ’ को 1915 में पेइचिंग के बाहर शाही आवासों से लाए गए खज़ानों को रखने के लिए बनाया गया था। इसके निर्माण के लिए धन अमेरिकी सरकार द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट के कार्यकाल में भेजा गया था। 2017 वाली यात्रा में शी से चाय पर बातचीत के दौरान, ट्रंप ने अपनी पोती अरेबेला का एक वीडियो दिखाया। इस वीडियो में अरेबेला ने ‘चीपाओ’ (पारंपरिक चीनी पोशाक) पहनी हुई थी, और वह चीनी गीत गा रही थी, साथ ही मैंडरिन भाषा में प्राचीन चीनी कविताएं सुना रही थी।

पेइचिंग आने वाले विदेशी नेताओं के यात्रा कार्यक्रमों में ‘फॉरबिडन सिटी’ को अक्सर शामिल किया जाता रहा है, लेकिन ऐसी यात्राओं का आयोजन आमतौर पर संग्रहालय के सामान्य कामकाज के दौरान ही किया जाता है। इस स्थल को पूरी तरह से बंद नहीं किया जाता था। लेकिन, इस बार उल्टा हुआ है। मंगलवार को, टेंपल ऑफ़ हेवन पार्क प्रशासन ने घोषणा की, कि 13 और 14 मई को यह जगह आम लोगों के लिए बंद रहेगी, और जिन लोगों ने पहले ही टिकट खरीद लिए हैं, वे रिफ़ंड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

टेंपल ऑफ़ हेवन, भले ही फ़ॉरबिडन सिटी जितना खास न हो, लेकिन कहा जाता है कि यह हेनरी किसिंजर का पसंदीदा ठिकाना था। हेनरी किसिंजर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री थे, जिन्होंने वॉशिंगटन और पेइचिंग के बीच सुलह कराने में अहम भूमिका निभाई थी, और इस जगह पर एक दर्जन से ज़्यादा बार आए थे। 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का रास्ता साफ़ हुआ था। इस बार, शी और ट्रंप के बीच खाई पाटने में बैक चैनल ही काम कर रहा था, जिसमें ट्रम्प के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर, और अमेरिका में चीन के राजदूत शी फेंग की अहम भूमिका बताई जा रही है। ईरान यदि लड़ाई इतनी लम्बी खींच ले गया, तो उसके पीछे शी और पुतिन ही रहे हैं। चीन का करीबी सहयोगी ईरान, युद्ध खत्म करने की वॉशिंगटन की मांगों के बावजूद अड़ा हुआ है।

ट्रम्प ने एक तथाकथित नरक की यात्रा कर ली। अब दूसरे की बारी है। उन्होंने 2026 में भारत आने पर अपनी रज़ामंदी दे रखी है, उसकी तारीख़ की घोषणा बाक़ी है। अमेरिका-चीन कूटनीति में भारत एक अहम और रणनीतिक स्थिति रखता है; यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संतुलनकारी शक्ति की भूमिका निभाता है, और साथ ही पेइचिंग के साथ अपनी जटिल सुरक्षा, आर्थिक और सीमा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए ‘बहु-संरेखण’ (मल्टी एलाइनमेंट) की नीति अपनाता है।

ट्रंप एक ऐसे समकक्ष के साथ बैठक करेंगे, जिसने चीनी सत्ता पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली है, उसके बरअक्स ट्रम्प, अपने आखिरी कार्यकाल में हैं। वहां मिड टर्म एलेक्शन में छह माह से भी कम समय रह गया है। लेकिन? क्या अब चीनी हस्तक्षेप से ईरान युद्ध समाप्त होगा? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाक़ात से ठीक पहले चीन का दौरा इसीलिए तो नही किया है!

लेखक जियो-पॉलिटिकल मामलों के पत्रकार हैं।

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