पास रहे तो चिपकू, दूर रहे तो लापरवाह, चुप रहे तो घमंडी, बोले तो ओवरएक्टिंग। पुरुष से अपेक्षा यह है कि वह एटीएम भी हो, बॉडीगार्ड भी, बेस्ट फ्रैंड भी, सायकोलोजिस्ट भी।
हर औरत यह चाहती है कि उसका आदमी उसी पर मरे। मतलब आंखों में वही हो, कानों में वही और हर फैसले में वही। फोन, वक्त, शौक, दोस्त, रविवार आदि सब कुर्बान कर जब सचमुच आदमी उस पर मरने लगता है तो औरत कहेगी- हट, परे नै जा कै मर। जब वो परे जाकर मरने लगता है, काम में लग जाता है, थोड़ा खुद बन जाता है, जरा सांस ले लेता है, तभी दूसरा बम गिरता है और उसकी औरत कहती है- बता मैं के मरगी थी? बेचारा आदमी करे तो क्या करे और कैसे मरे अर कैसे जीये? शायद इसी चक्कर से बचने के लिये आजकल वाले तो ब्याह के नाम से तौबा करने लगे हैं।
सारी उम्र आदमी यह समझ नहीं पाता कि पास रहे तो चिपकू, दूर रहे तो लापरवाह, चुप रहे तो घमंडी, बोले तो ओवरएक्टिंग। पुरुष से अपेक्षा यह है कि वह एटीएम भी हो, बॉडीगार्ड भी, बेस्ट फ्रैंड भी, सायकोलोजिस्ट भी। और जरूरत पड़े तो बिना बताए अचानक रोमांटिक कवि भी बन जाए। उसे आजाद भी रहना है, मगर रिमोट कंट्रोल पर। उसे मजबूत भी दिखना है, मगर हर बात पर पिघलना भी है।
जो रिश्ता रोज इम्तिहान बन जाए, उसमें पास होकर भी दूरी बनी रहती है। और फिर दोनों एक-दूसरे से कहते हैं- तुम पहले जैसे नहीं रहे। असल में, औरत और आदमी दोनों ही एक दूसरे को कंट्रोल्ड वर्जन में जिंदा चाहते हैं। ऐसा रूप कि वे एक दूसरे के बिना जी न सकें, लेकिन हर वक्त सिर पर भी न बैठें। एक मनचले का कहना है कि एक औरत की इतनी सी ख्वाहिश होती है कि वह पतली भी रहे और पति पर भारी भी रहे।
दरअसल गृहस्थी का रास्ता सबसे ज्यादा जोखिम भरा है और सही रास्ते का पता कोई जीपीएस भी नहीं दे सकता। औरत चाहती है आदमी उसकी दुनिया का सूरज बने लेकिन जरा धूप ज्यादा हो जाये तो शिकायत और कम हो जाये तो सवाल पर सवाल और फिर बवाल। और तंग आकर आदमी रोना चाहे तो रो भी नहीं सकता। उनके लिये हरियाणवी ताऊ की नसीहत है अक रो लिया करो। थारा कुण सा काज्जल खराब हो रह्या है।
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एक बर की बात है, नत्थू नैं देख्या अक आंधी-तूफान आ ज्यै पर सोमवार कै दिन रामप्यारी मंदर जाण तै नीं टलै। एक दिन वो बोल्या- हां ए! सोमवार के व्रत क्यां खात्तर राख्या करै? रामप्यारी बोल्ली- कदे तेरा जिसा लफंडर ना मिल ज्यै। नत्थू बोल्या- तन्नैं छोडूं मैं भी कोणीं, मन्नैं भी भोले की चार कांवड़ बोल राखी हैं।

