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घर में नहीं हैं दाने, चले चौधराहट दिखाने

उलटबांसी

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हालांकि, पाकिस्तान कहीं से कोई सबक नहीं लेता। पाकिस्तान का हाल कुछ यूं है कि अपने घर में छत टपक रही है, लेकिन हम पड़ोसी के दरवाजे का रंग देखकर परेशान हैं।

पाक सेना अपने देश में शांति कायम नहीं कर पा रही है, पर चौधरी बनना है पाकिस्तान को।

कहीं सऊदी अरब पर हूती हमले कर रहे हैं, कहीं एशियन गेम्स में क्रिकेट चल रहा है और कहीं पाकिस्तान के सामने अपनी घरेलू परेशानियों की लंबी सूची पड़ी है। मगर नजर दुनिया की चौधराहट पर है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयान देना सबसे आसान काम है। मिसाइल रोकने के लिए रडार चाहिए। युद्ध रोकने के लिए कूटनीति चाहिए। अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए नीति चाहिए। बयान के लिए केवल माइक चाहिए।

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पाकिस्तान की अपनी घरेलू स्थिति देखिए।

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राजनीतिक तनाव, आर्थिक दबाव, अलग-अलग इलाकों में हिंसा और इंटरनेट बंद होने जैसी समस्याएं अपने-अपने सवाल लेकर खड़ी हैं। कहीं लोग पूछ रहे हैं कि इंटरनेट कब आएगा, कहीं पूछ रहे हैं कि सुरक्षा कब मिलेगी और कहीं सवाल है कि राजनीति कब स्थिर होगी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चौधरी बनने के लिए ये प्रश्न शायद प्रवेश-परीक्षा में नहीं आते। वहां अलग परीक्षा है।

प्रश्न एक : पड़ोसी देश पर टिप्पणी कीजिए।

प्रश्न दो : मध्य-पूर्व की स्थिति पर चिंता व्यक्त कीजिए।

प्रश्न तीन : विश्व शांति के लिए सुझाव दीजिए।

असल नीति—अपने घर की स्थिति पर चर्चा मत कीजिए। यह नीति सबसे महत्वपूर्ण है।

इधर एशियन गेम्स में क्रिकेट ने भी प्रवेश कर लिया है। क्रिकेट को देखते ही एशिया का भूगोल बदल जाता है। जो देश सीमा पर एक-दूसरे से आंख मिलाने में सावधानी बरतते हैं, वे क्रिकेट मैदान पर आंख से आंख मिला सकते हैं। भारत और पाकिस्तान क्रिकेट में आमने-सामने हों तो मैच केवल मैच नहीं रहता। वह ऐसा आयोजन बन जाता है, जिसमें एक छक्का विदेश नीति का विषय हो सकता है। एशियन गेम्स में क्रिकेट का एक फायदा यह है कि कम-से-कम कुछ देर के लिए लड़ाई गेंद से होती है। यह अच्छी बात है।

हालांकि, पाकिस्तान कहीं से कोई सबक नहीं लेता। पाकिस्तान का हाल कुछ यूं है कि अपने घर में छत टपक रही है, लेकिन हम पड़ोसी के दरवाजे का रंग देखकर परेशान हैं। घर में पानी नहीं आ रहा, लेकिन विश्व जल नीति पर हमारा भाषण तैयार है।

बेरोजगारी पर सवाल हो तो हम वैश्विक अर्थव्यवस्था समझाने लगते हैं। और जब कोई पूछे कि भाई, अपने घर का क्या हाल है?

तो उत्तर आता है, ‘हम इस पर बाद में बात करेंगे।’

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