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समुद्र में गब्बरगीरी से खुली ढोल की पोल

उलटबांसी

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जब ईरान गब्बर की तरह टोल वसूलता है, तो अमेरिका का वही हाल है जो ठाकुर का था–हाथ तो हैं, पर काम के नहीं।

गब्बर सिंह सिर्फ रामगढ़ में नहीं था, अब खबरें हैं कि ईरान से होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों से रकम वसूलना शुरू कर दिया है। अमेरिका होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है। दुनिया एकाएक रामगढ़ गांव जैसी हो गयी है। गब्बरबाजी चल रही है, कई तरफ। वेनेजुएला में अमेरिका की गब्बरबाजी चल गयी है, अमेरिका के सैनिक गये और वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ लाये और अपने मन की सरकार वेनेजुएला में बना दी। ईरान में यह सब नहीं हो पा रहा है। ट्रंप पहले बताया करते थे कि भारत-पाक युद्ध में इतने जेट गिर गये थे, उतने गिर गये थे। अब ट्रंप यह बताने में शरमा रहे हैं कि आखिर कितने अमेरिकी जेट ईरान युद्ध में गिर गये हैं। इधर पश्चिम एशिया में अमेरिका वैसी गब्बरगीरी नहीं दिखा पा रहा है, जैसी गब्बरगीरी उसने वेनेजुएला में दिखाई थी।

पश्चिम एशिया में ईरान गब्बर की तरह खड़ा होकर चिल्लाता है –‘कितने जहाज थे?!’

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तेल से लदे टैंकर, मालवाहक जहाज, सब लाइन में खड़े हैं। ईरान कहता है–‘अब से हर जहाज को टोल देना पड़ेगा।’

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यानी समुद्र में बाकायदा ‘गब्बरगीरी’। फर्क बस इतना है कि यहां घोड़े नहीं, जहाज हैं और टोल टैक्स की रसीदें हैं। अमेरिका ठाकुर की तरह बैठा है। बातें बहुत करता है–‘हम लोकतंत्र के रक्षक हैं, हम आज़ादी के पहरेदार हैं।’

लेकिन जब ईरान गब्बर की तरह टोल वसूलता है, तो अमेरिका का वही हाल है जो ठाकुर का था–हाथ तो हैं, पर काम के नहीं। कभी लगता है सऊदी अरब वीरू है–जो बस बोतल लेकर चढ़ जाता है और कहता है ‘बस हो गया, अब ईरान को सबक सिखाएंगे।’

सबक कोई नहीं सीख रहा है, सब सिखाने में लगे हुए हैं। दुबई का शानदार एयरपोर्ट अब मिसाइलों का नृत्यस्थल बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब बहुत अमीर किस्म के ऐसे सेठ हैं, जिनके पास दौलत तो है पर लड़ने का तजुर्बा नहीं है, इच्छा शक्ति नहीं है, सो पिट रहे हैं। उधर ईरान के पास दौलत न भी हो पर लड़ाई में उसके कई दशक बीते हैं।

जय शायद यूरोप है – जो शांत रहता है, सिगरेट सुलगाता है और कहता है–‘देखते हैं, वक्त आने पर गोली चलाएंगे।’

लेकिन असलियत में दोनों ही बस गब्बर को देखते रहते हैं और सोचते हैं–‘कहीं टोल बढ़ न जाए।’

होर्मुज की खाड़ी में जहाज ऐसे नाच रहे हैं जैसे बसंती गब्बर के सामने।

बसंती (यानी शिपिंग कंपनियां) कहती हैं–‘हमें तो बचना है, हम नाचेंगे ही।’

गब्बर का डायलॉग–‘जो डर गया समझो मर गया।’

ईरान का नया डायलॉग है– ‘जो टोल नहीं देगा, समझो डूब गया।’

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