रचनात्मकता में एआई के उपयोग की सीमा का प्रश्न
जब हर क्षेत्र में एआई का उपयोग बढ़ रहा है तो सवाल है कि रचनात्मकता यानी साहित्य व कला के संदर्भ में एआई का कितना उपयोग स्वीकार्य है। दरअसल, मानव सृजनात्मकता पर एआई के आक्रमण के प्रतिरोध और स्वीकृति...
जब हर क्षेत्र में एआई का उपयोग बढ़ रहा है तो सवाल है कि रचनात्मकता यानी साहित्य व कला के संदर्भ में एआई का कितना उपयोग स्वीकार्य है। दरअसल, मानव सृजनात्मकता पर एआई के आक्रमण के प्रतिरोध और स्वीकृति का स्तर, समय व भूगोल के साथ बदलता रहता है। हालांकि कला क्षेत्र में रचनात्मकता को गंभीर मिलावट से तब तक बचाना चाहिये जब तक यह एक नई तरह की कला के लिए राह न खोल दे।
एक दिलचस्प समाचार के रूप में, न्यूजीलैंड के दो पुरस्कार विजेता लेखकों की किताबों, स्टेफनी जॉनसन के लघु कहानी संग्रह ‘ओब्लिगेट कार्निवोर’ और एलिजाबेथ स्मिथर के उपन्यास संग्रह ‘एंजेल ट्रेन’, को कृत्रिम बुद्धि (एआई) के उपयोग के कारण 65 हज़ार न्यूज़ीलैंड डॉलर पुरस्कार राशि वाले 2026 ओखम बुक अवॉर्ड्स (फिक्शन), जो देश का शीर्ष साहित्यिक पुरस्कार है, के लिए विचार करने के अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह अस्वीकृति लेखन में एआई के उपयोग को लेकर नहीं बल्कि पुस्तकों के कवर डिज़ाइन के कारण हुई, जो एआई उपयोग संबंधी नए दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते पाए गए। स्वाभाविक ही इस एआई युग में यह सवाल उठता है कि रचनात्मकता के संदर्भ में एआई का कितना उपयोग स्वीकार्य है। लक्ष्मण रेखा कहां होनी चाहिए?
मानव रचनात्मकता पर एआई के आक्रमण के प्रतिरोध और स्वीकृति का स्तर, समय और भूगोल के साथ बदलता रहता है। जर्मन फ़ोटोग्राफ़र बोरिस एल्डैग्सन 2023 में तब एक व्हिसलब्लोअर बन गए, जब उन्होंने सोनी वर्ल्ड फ़ोटोग्राफ़ी अवार्ड्स में क्रिएटिव ओपन श्रेणी का पुरस्कार यह कहकर स्वीकार नहीं किया कि विजेता छवि बनाने के लिए उन्होंने एआई का उपयोग किया था। लेकिन बीजिंग के सिंघुआ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेन यांग ने एआई का उपयोग करके केवल तीन घंटों में ‘लैंड्स ऑफ मेमोरी’ नामक पुस्तक बना दी और इसने अक्तूबर 2023 में, जियांग्सू यूथ पॉपुलर साइंस फिक्शन प्रतियोगिता में दूसरा पुरस्कार जीता। इसके अलावा, यह स्वीकार करने के बाद भी कि उनके उपन्यास ‘टोक्यो-टू डोजो-टू’ का 5 फीसदी शब्दशः चैटजीपीटी द्वारा बनाया गया था, जापानी लेखिका री कुडन ने 2024 में अकुतागावा पुरस्कार जीता, जो जापान के प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक है! कुडन के अनुसार, उन्होंने ‘नरम और अस्पष्ट’ शब्द खोजने को एआई की मदद ली थी, वे जो उनके उपन्यास में व्याप्त न्याय की जटिल अवधारणाओं को समाहित करते हों, इसे चयन समिति ने ‘कोई गलत नहीं’ माना।
खैर, एड्रियन ब्रॉडी ने ‘द ब्रुटलिस्ट’ फिल्म में अपने द्वारा अभिनीत भूमिका में हंगेरियन भाषा बोलते समय, उच्चारण बेहतर बनाने के लिए, एआई के उपयोग के बावजूद इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अकादमी पुरस्कार जीता। इस वर्ष की अन्य ऑस्कर-नामांकित फिल्मों में, एआई क्लोनिंग का उपयोग जैक्स ऑडियार्ड के ट्रांसजेंडर गैंगस्टर म्युज़िकल एमिलिया पेरेज़ में कार्ला सोफिया गैसकॉन की गायन आवाज़ को बेहतर बनाने के लिए भी किया गया था। क्या यह स्पष्ट संकेत है कि हॉलीवुड भी मात्र दो सालों में एआई को स्वीकार कर अपने अभिनेताओं और पटकथा लेखकों के दोहरे हमले को मान्यता दे रहा है, यह सुनिश्चित करने को कि चलो श्रमिकों ने अपना काम नई तकनीक से बदलने की बजाय उस पर नियंत्रण तो बनाए रखा?
इसके उल्ट, अकादमिक पत्रिकाएं इन दिनों शोध पत्रों में एआई के उपयोग के विरुद्ध सख्त रुख रखे हैं, हालांकि चैटजीपीटी को 2022 के अंत व 2023 के शुरू में प्रकाशित कई शोधपत्रों में सह-लेखक सूचीबद्ध किया गया। सामान्यत: मानव रचनात्मकता के क्षेत्र में एआई की स्वीकृति या अस्वीकृति पर इंसान का दृष्टिकोण दुनियाभर में समान नहीं। क्या एक समान दृष्टिकोण असल में जरूरी है? एआई विकसित होने पर ट्रस्ट को मानदंडों की समीक्षा और सुधार करने की जरूरत पड़ सकती है।
लगभग दो साल पूर्व, एआई टेक्स्ट-टू-इमेज जनरेटर ‘स्टेबल डिफ्यूजन’ द्वारा बनाई एक छवि को बीजिंग अदालत द्वारा कॉपीराइट संरक्षण प्रदान किया गया, जिसका मत था कि कलाकृति ‘वादी की बौद्धिक कल्पना से बनाई गई थी’ और ‘व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मूर्त रूप है’। क्या यह बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त करने को ‘आधे-मानव, आधे-एआई कार्य’ को मान्यता देने की दिशा में एक कदम है?
आइए साहित्य क्षेत्र की स्थिति और उसमें एआई के कारण आए भूचाल पर नजर डालें। सलमान रुशदी ने कुछ माह पहले कहा था कि लेखकों को एआई से तब तक खतरा नहीं जब तक यह लोगों को हंसाने लायक न बन जाए। रुशदी के अनुसार, उन्हें यह दिखावा करना पसंद है, मानो एआई का कोई वजूद ही न हो। प्रसिद्ध कनाडाई लेखिका मार्गरेट एटवुड ने भी बीते साल साक्षात्कार में कहा कि वह अभी लेखन में ‘अच्छा समय’ बिता रही हैं और एआई के विकास बारे चिंतित होने के लिहाज से वे बहुत बूढ़ी हैं।
हालांकि, हर लेखक रुश्ादी या एटवुड की तरह अच्छी स्थिति में नहीं। और विचार भी भिन्न-भिन्न हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के पुस्तक समीक्षक एओ स्कॉट का मानना है कि लेखन में एआई का उपयोग एक नौटंकी और साहित्य के लिए घातक खतरा, दोनों है। जेनरेटिव एआई टूल्स और लार्ज लैंग्वेज मॉडल -लिखित उपन्यासों की बाढ़ बाजार में आने के साथ, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का एक नया अध्ययन, जिसमें यूके फिक्शन प्रकाशन क्षेत्र के सैकड़ों रचनाकारों को शामिल किया गया, कॉपीराइट उल्लंघन, राजस्व हानि और कला स्वरूप के भविष्य के बारे में व्यापक चिंताओं का खुलासा करता है।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के मिंडेरू सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एंड डेमोक्रेसी (एमसीटीडी) की डॉ. क्लेमेंटाइन कोलेट ने एक हालिया अध्ययन किया है, जिसमें उन्होंने रिपोर्ट के लिए 332 लेखकों को शामिल कर सर्वेक्षण किया। इसके अनुसार, इन यूके के लेखकों में से आधे से अधिक (51 प्रतिशत) का मानना है कि एआई अंततः कथा लेखकों के रूप में उनके पेशे को बदल देगा। लगभग दो-तिहाई (59 प्रतिशत) लेखकों ने यह अहसास होने का दावा किया कि एआई एलएलएम मॉडल को उनकी सहमति या बिना पारिश्रमिक उनके काम का उपयोग करक प्रशिक्षित किया गया। एक-तिहाई से अधिक लेखकों का दावा है कि जेनरेटिव एआई उनकी आय पर नकारात्मक प्रभाव डाल चुका है, शायद अन्य नौकरियां छूटने के चलते वे उपन्यास लेखन में आए होंगे। अधिकांश उपन्यासकारों का अनुमान है कि भविष्य में एआई उनकी आय कम कर देगा। मनुष्यों पर एआई के प्रभुत्व की शुरुआत - मानव सभ्यता में एक परिवर्तन बिंदु - 1997 में चिन्हित हुई जब आईबीएम के सुपर कम्प्यूटर डीप ब्लू ने विश्व शतरंज चैंपियन गैरी कास्परोव को हराया था। दो दशक बाद, एआई को खतरा मानने वाले कई आलोचकों के उलट, कास्परोव ने अपनी 2017 की पुस्तक ‘डीप थिंकिंग’ में तर्क दिया कि नई ऊंचाइयों तक पहुंचने को मानवता इसके सबसे उल्लेखनीय आविष्कारों से डरने के बजाय स्वागत करे। हालांकि, किस स्तर तक? मानव रचनात्मकता किस हद तक एआई तूफान के बावजूद बच सकती है?
आज, एआई का उपयोग मूर्तियां, पेंटिंग और तस्वीरें बनाने के लिए किया जा रहा है, जिनमें से कुछ हजारों डॉलर में बिक रही हैं। क्या हमें इस पर पुनर्विचार की ज़रूरत है कि कला क्या है? निश्चित रूप से, नई तकनीक को लेकर विगत की मिसालें हैं, जो हमें रचनात्मकता के बंधनों से मुक्त कराती हैं। जब 19वीं शताब्दी में पहली बार फोटोग्राफी विकसित हुई तो कई कलाकारों का मानना था कि कैमरा कलाकार का दुश्मन है और इससे बनी छवियां कला प्रतिष्ठान की दुश्मन हैं। हालांकि, फोटोग्राफी ने पेंटिंग की जगह नहीं ली; बल्कि 20वीं सदी के प्रायोगिक आधुनिक कला आंदोलन के विकास में उत्प्रेरक का काम किया, क्योंकि कलाकार यथार्थवाद से अमूर्तता की ओर स्थानांतरित हो गए और आज की समकालीन कला का आधार तैयार किया। फोटोग्राफी भी कला का दूसरा रूप बन गई।
बहरहाल, हमारा दायित्व है कि हम मानव रचनात्मकता को गंभीर मिलावट से तब तक बचाएं जब तक यह एक नई तरह की कला के लिए रास्ता न खोल दे, जो चले आ रहे रिवायती मानव कला रूपों से अलग हो। इसके अतिरिक्त, वैश्वीकरण के इस युग में, एक समान मानदंड बनाने के लिए दुनिया भर के विधायकों और अदालतों को नीति निर्माताओं के रूप में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।
लेखक भारतीय सांख्यिकी संस्थान में प्रोफेसर हैं।

