चर्चित चेहरा

जीवन में अच्छाई की तलाश का नजरिया

जीवन में अच्छाई की तलाश का नजरिया

अरुण नैथानी

अरुण नैथानी

चीनी मूल की चर्चित निर्देशक क्लाई झाओ के लिये इस बार का 93वां ऑस्कर पुरस्कार समारोह कुल मिलाकर झोली भरने वाला ही साबित हुआ। उनकी चर्चित फिल्म नोमैडलैंड के हिस्से तीन बड़े विश्व प्रतिष्ठित पुरस्कार आये हैं। जिसमें बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार भी शामिल है। सही मायनो में यह सम्मान पाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार किसी एशियाई मूल की अश्वेत फिल्म निर्देशक को यह बेस्ट डायरेक्टर का सम्मान मिला है। ऑस्कर फिल्म पुरस्कारों के अब तक के 93 साल के इतिहास में यह सम्मान हासिल करने वाली वह दूसरी महिला हैं। इससे पहले कैथरीन बिगेलो पहली महिला निर्देशक थी, जिन्हें वर्ष 2009 में अपनी फिल्म ‘द हर्ट लॉकर’ के लिये ऑस्कर पुरस्कार मिला था। इसी फिल्म नोमैडलैंड के लिये अभिनेत्री फ्रांसिस मैक्डॉरमैंड को बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार प्रदान किया गया। वह फिल्म निर्माण में साझीदार भी थीं। दरअसल, विश्वव्यापी कोरोना महामारी के बीच आयोजित यह पुरस्कार समारोह सुरक्षा की दृष्टि से लॉस एंजेलिस में दो जगह आयोजित किया गया। आयोजकों ने फैसला किया था कि यह कार्यक्रम वर्चुअल तरीके से नहीं कराया जायेगा। उनका सोचना था कि कोरोना संकट की जकड़ से धीरे-धीरे मुक्त हो रहे जनमानस के जीवन में कुछ रंग भरे जायें। यह आयोजन लॉस एंजेलिस में एक तो डॉल्बी थियेटर में और दूसरा यूनियन स्टेशन में आयोजित किया गया। जबकि दो दशक से यह आयोजन सिर्फ डॉल्बी थियेटर में ही आयोजित किया जाता रहा है। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से ब्रिटेन के कलाकारों के लिये लंदन में एक स्थान तथा पेरिस में एक हब बनाया गया था।

दरअसल, चीनी मूल की क्लाई झाओ किशोरावस्था में अमेरिका आ गई थी। उन्होंने नई परिस्थितियों में खुद को ढाला और सोचना शुरू किया कि कैसे नये परिवेश की मुश्किलों का सामना किया जाये। एक संवदेनशील व्यक्तित्व के तौर पर वह सृजन के सरोकारों से जुड़ी। उन्होंने फिल्म बनाने की राह चुनी। दरअसल, नोमैडलैंड क्लाई झाओ की तीसरी फिल्म है जो जेसिका बर्डर की इसी नाम की रची गई साहित्यिक रचना पर आधारित है। इस फिल्म की नायिका फ्रांसिस मैकडॉरमैंड ने रचना के पात्र फर्न का किरदार निभाया है। फिल्म अमेरिका में स्थित नेवादा के ग्रामीण इलाके में रहने वाली एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसकी कंपनी संकटों में फंस जाती है। कालांतर इससे उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है। इस संकट की घड़ी में वह ऐसा जीवन जीती है जो आधुनिक खानाबदोश जैसा है। वह अपनी कार उठाकर समाज से बाहर नये सिरे से यायावरी जीवन जीना आरंभ करती है। लेकिन इन तमाम संघर्षों के बीच वह सकारात्मक नजरिया नहीं छोड़ती। तमाम संकटों के बावजूद वह जीवन के उज्ज्वल पक्ष की पक्षधर रही है।

क्लाई झाओ ने वर्ष 2015 में फिल्म- ‘सॉन्गस माई ब्रदर्स टॉट मी’ के निर्देशन से अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की। इसके बाद आई उनकी दूसरी फिल्म ‘राइडर’ ने फिल्म जगत में उन्हें वैश्विक पहचान दिलायी। अब उनकी तीसरी फिल्म नोमैडलैंड ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिये। कई बड़े निर्देशकों की फिल्में प्रतियोगिता में शामिल थीं लेकिन झाओ के हिस्से कामयाबी आई। इस फिल्म के अन्य चर्चित कलाकारों में डेविड स्ट्रैथेर्न और लिंडा भी शामिल रहे। नोमैडलैंड ऑस्कर पुरस्कारों में कामयाबी की नई इबारत लिखेगी, ऐसे कयास पहले से ही लगाये जा रहे थे। इसकी वजह यह थी कि क्लाई झाओ की यह फिल्म गोल्डन ग्लोब्स, क्रिटिक्स च्वाइस अवार्ड्स, बाफ्टा अवार्ड्स, इंडीपेंडेंट स्प्रिट अवार्ड्स जैसे पुरस्कार पहले ही जीत चुकी थी। वैसे इस साल बेस्ट फिल्मों की दौड़ में कई चर्चित फिल्में भी शामिल थीं, जिनमें द फादर, जुडाज एंड ब्लैक मेसीहा, मैंक, मिनारी, नोमैडलैंड, प्रॉमिसिंग यंग वुमन, साउंड ऑफ मेटल और द ट्रायल ऑफ शिकागो को नामांकन मिला था।

क्लाई झाओ को चीनी साम्यवादी व्यवस्था में हमेशा से ही घुटन महसूस होती रही है। शायद वह इसीलिये चीन छोड़कर अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई। वर्ष 2013 में क्लाई झाओ ने एक साक्षात्कार में चीन की राजनीतिक व्यवस्था की तीखी आलोचना की थी। जिसमें उसने चीनी व्यवस्था में झूठ के वर्चस्व की बात कही थी। जिस पर चीनी राष्ट्रवादी संस्थाओं ने उनका बहिष्कार आरंभ कर दिया था। यही वजह है कि अब उनकी फिल्म नोमैडलैंड को चीन में रिलीज नहीं किया गया।

93वें ऑस्कर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीतने वाली क्लाई झाओ ने सम्मान स्वीकार करते हुए कहा कि मैं जीवन में सदैव अच्छाइयों को देखती हूं। इस दुनिया में मैं जिससे भी मिली हूं, उनमें मैंने अच्छाइयां ही पायी हैं। यह पुरस्कार उन्हीं लोगों को समर्पित है जो जीवन की अच्छाई में विश्वास करते हैं। साथ ही जिनमें अच्छे बने रहने का साहस है, भले ही जीवन कितने ही संकटों से गुजर रहा हो। ऐसे लोग मुझे प्रेरणा देते हैं।

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