अमेरिका तो बेबात भी युद्ध कर सकता है। वैसे ही जैसे थानेदार बेबात भी दो डंडे मार सकता है। इसीलिए तो अमेरिका को दुनिया का थानेदार कहा जाता है।
यह युद्ध तो होना ही था जी। अमेरिका युद्ध न करे तो बताइए क्या करे? अमेरिका तो बना ही युद्ध करने के लिए है न। जब कोलंबस ने उसकी खोज की थी, तभी उसने उसकी किस्मत में लिख दिया था-युद्ध करते रहना बेटा। वैसे ही जैसे घर के बड़े-बुजुर्ग जाते हुए यह सीख देकर जाते हैं कि घर की सुख-समृद्धि का ख्याल रखना। हालांकि, बताते हैं कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी युद्ध करने की बात कही है, लेकिन बेबात नहीं। युद्ध से पहले के उनके शांति प्रयास भी कम नहीं रहे और चर्चित भी बहुत रहे।
अमेरिका तो बेबात भी युद्ध कर सकता है। वैसे ही जैसे थानेदार बेबात भी दो डंडे मार सकता है। इसीलिए तो अमेरिका को दुनिया का थानेदार कहा जाता है। तो अमेरिका तो बना ही युद्ध करने के लिए है। वैसे ही जैसे हम शांति के लिए बने हैं। हालांकि, अब नए भारत में यह कोई गर्व करने की बात नहीं रह गयी है। अब हम नेहरू स्टाइल में शांति के कपोत नहीं उड़ाते, मोदी स्टाइल में घर में घुस कर मारने लगे हैं। फिर भी हम बुद्धवाले हैं और अमेरिका युद्धवाला है।
दोष बेचारे ट्रंप ताऊ का भी नहीं है। उन्होंने तो दुनिया में इतनी शांति मचाने की कोशिश की कि इधर जेलेंस्की को व्हाइट हाउस बुलाकर धमकाया तो उधर अस्सी या सौ बार यह दावा कर डाला कि उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान के बीच का युद्ध रुकवाया। उन्होंने इतनी शांति मचायी कि अपने को पीस प्रेजिडेंट तक कह डाला। ऐसे में अगर किसी का दोष माना जाएगा तो नोबल वालों का माना जाएगा। अगर उन्होंने ट्रंप ताऊ को नोबल दे दिया होता तो आज दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर न खड़ी होती। बल्कि ट्रंप ताऊ तो इतने शांतिप्रिय हैं कि युद्ध का गम भुलाने के लिए उन्होंने वैसे ही हर रोज टैरिफ का जाप करना शुरू कर दिया जैसे इश्क का गम भुलाने के लिए आशिक हर शाम जाम छलकाने लगते हैं। लेकिन दुनिया वालों ने उनकी टैरिफ भक्ति का भी सम्मान नहीं किया। खुद उनके अपने सुप्रीम कोर्ट ने उसे बकवास करार दे दिया। ऐसे में अगर अमेरिका युद्ध नहीं करता तो बताओ क्या करता।
यह तो कुछ-कुछ वैसा ही हुआ न जनाब कि गुंडा अपनी गुंडई छोड़ने लगे पर, जमाना उसे छोड़ने ही न दे और उसे फिर से गुंडई की ओर धकेल दे। खैर, ऐसे में भाजपा वाले यह दावा जरूर कर सकते हैं कि यह तो मोदी जी इस्राइल के दौरे पर चले गए, जिससे युद्ध दो दिन टल गया, वरना पहले ही हो जाता। अब वह जमाना तो रहा नहीं जनाब जब खलील खां फाख्ते उड़ाया करते थे, माने मोदी जी रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाया करते थे, लेकिन उन्होंने दो दिन तक ईरान-अमेरिकी-इस्राइल युद्ध तो अवश्य ही टाल दिया। नहीं?

