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भारत में रहमान डकैत एवं पाक में बिहारी सीएम का क्रेज

तिरछी नज़र

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सोशल मीडिया पर लोग ऐसे भावुक हो रहे हैं मानो डकैत नहीं, कोई मिसिंग रोमांटिक हीरो मिल गया हो। अभिनेता द्वारा किए गए रहमानी डांस का ग्लैमर इतना बढ़ गया है कि दर्शक तय नहीं कर पा रहे, डकैती से नफरत करें या डकैत की अदाओं पर फिदा हो जाएं।

दिसंबर की सर्दी में आमतौर पर लोग रज़ाई, कंबल और चाय में सुकून तलाशते हैं, लेकिन इस बार भारत और पड़ोस के माहौल ने अलाव को भी शर्मिंदा कर दिया। तापमान भले गिरा हो, पर चर्चाओं का पारा आसमान छू रहा है। हालात ऐसे हैं कि ठंड से ज़्यादा गर्मागर्म बहसों में लोग पसीना-पसीना हैं।

भारत में इन दिनों पाकिस्तानी डकैत रहमान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ‘धुरंधर’ के प्रदर्शन के साथ ही जैसे रहमान डकैत ने हिंदुस्तानियों के दिलों पर कब्ज़ा जमा लिया हो। सोशल मीडिया पर लोग ऐसे भावुक हो रहे हैं मानो डकैत नहीं, कोई मिसिंग रोमांटिक हीरो मिल गया हो। अभिनेता द्वारा किए गए रहमानी डांस का ग्लैमर इतना बढ़ गया है कि दर्शक तय नहीं कर पा रहे, डकैती से नफरत करें या डकैत की अदाओं पर फिदा हो जाएं। समझ से परे वायरल गीत और बाइक घुमाने वाले स्टेप पर रील्स बनाकर ब्लूच बनने की तमन्ना लिए इंफ्लुएंसर सोशल मीडिया पर प्रतिभा प्रदर्शन में लगे हुए हैं।

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उधर पाकिस्तान में बिहार के मुख्यमंत्री चर्चा में हैं। नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान हिजाब हटाने की घटना ने उन्हें अचानक सीमा पार का ‘नेशनल इश्यू’ बना दिया। जो बात भारत में कुछ घंटों की बहस थी, वह पाकिस्तान में आतंकियों की आंख की किरकिरी बन गई। हिजाब का हिसाब लेने की धमकियां बिना टैरिफ और बिना डिमांड के भारतीय सीमा में आयात होने होने लगी हैं। हालत यह है कि जिन्हें सुशासन की राजनीति से कोई मतलब नहीं था, वे भी अब बिहार की कैबिनेट और सरकारी समारोहों में दिलचस्पी लेने लगे हैं।

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दृश्य बड़ा दिलचस्प है—भारत में पाकिस्तानी डकैत पर तालियां और पाकिस्तान में भारतीय मुख्यमंत्री पर गुस्सा। लगता है सरहदों ने अब विषयों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया है। पहले फिल्में और खिलाड़ी आते-जाते थे, अब डकैत और मुख्यमंत्री भी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट होने लगे हैं। दोनों देशों की जनता और सियासत अपने-अपने बौद्धिक स्तर पर ‘धुरंधर और ब्लांडर’ का आकलन करने में लगे हुए हैं।

कुल मिलाकर दिसंबर की यह सर्दी बता रही है कि असली ठंड मौसम में नहीं, सोच में है। वरना कौन समझाए कि डकैत डकैत होता है और मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री—चाहे वह दिलों पर राज करे या किसी की आंखों में चुभे।

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