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स्पांसर के साथ चलता युद्ध का कारोबार

उलटबांसी

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युद्ध चाहे किसी भी नाम से बेचा जाए– एपिक फ्यूरी, कूल पीस या गोल्डन ग्लो– असलियत में यह विनाश का कारोबार है। लेकिन जब इसमें स्पॉन्सर जुड़ जाते हैं तो यह एक कॉर्पोरेट इवेंट बन जाता है, जहां मौत भी विज्ञापन के साथ आती है।

युद्ध अपने आप में बड़ा कारोबार है। युद्ध चलता है तो हथियार चलते हैं। हथियार चलते हैं तो हथियार बनते और बिकते हैं। ईरान पर अमेरिका ने जो हमला किया है, उस ऑपरेशन का नाम है—आपरेशन एपिक फ्यूरी, मतलब यह कोई नया वीडियो गेम लगता है। बच्चे इस तरह के वीडियो गेम के लिए पागल रहते हैं, वैसे बड़े भी युद्ध के गेम के लिए पागल रहते हैं। युद्ध धंधा है और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को धंधा और डील बहुत पसंद है। बहुत संभव है कि टीवी न्यूज में युद्ध के तमाम हिस्सों के स्पांसर भी आने लगें।

कल्पना कीजिए, टीवी पर न्यूज़ एंकर कह रहा है—‘आज की बमबारी प्रस्तुत कर रहा है– गोल्डन ग्लो साबुन, जो दुश्मन की गंदगी को तुरंत साफ कर दे। और कल सुबह की एयर स्ट्राइक का स्पॉन्सर है– फ्लाई हाई एयरलाइंस, जो आपको आसमान में ले जाए और दुश्मन को नीचे गिरा दे।’

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अब युद्ध की हर गतिविधि का अपना कॉर्पोरेट पार्टनर होगा।

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मिसाइल लॉन्च– सुपरफास्ट इंटरनेट द्वारा प्रस्तुत।

टैंक मूवमेंट– ऑल-टेरेन टायर्स की सौगात।

सैनिकों की मार्च पास्ट– एनर्जी ड्रिंक की ताकत से।

जैसे क्रिकेट मैच के बीच में विज्ञापन आता है, वैसे ही युद्ध के बीच में भी ब्रेक होगा।

‘आप देख रहे हैं ऑपरेशन कूल पीस– स्पांसर कूल कूल टुथपेस्ट। अभी थोड़ी देर में दुश्मन पर अगली बमबारी होगी, लेकिन उससे पहले लीजिए यह खास संदेश।’

और फिर स्क्रीन पर आएगा—सुपर फ्रेश सोप– क्योंकि युद्ध के बाद भी चाहिए ताज़गी।

जनता को लगेगा कि युद्ध कोई रियलिटी शो है। हर बमबारी, हर गोली, हर हमला–सबका अपना ब्रांड वैल्यू है।

युद्ध अब केवल सैनिकों और हथियारों का खेल नहीं, यह मार्केटिंग और स्पॉन्सरशिप का महोत्सव है।

बम गिराने वाला पायलट हेलमेट पर ब्रांड लोगो लगाएगा।

टैंक पर लिखा होगा– पावर्ड बाय सुपर नेचुरल आयल और सैनिकों की वर्दी पर चमकेंगे– आफिशियल पार्टनर एक्स वाई जेड शूज।

अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में हम सुनेंगे—‘आज की मिसाइल अटैक –डायमंड हाऊसिंग द्वारा प्रस्तुत।’

‘कल का नाइट ऑपरेशन– स्वीट ड्रीम्स गद्दों की सौगात।’

‘दुश्मन की हार– सुपर स्माइल डेंटल क्रीम के साथ।’

युद्ध चाहे किसी भी नाम से बेचा जाए– एपिक फ्यूरी, कूल पीस या गोल्डन ग्लो– असलियत में यह विनाश का कारोबार है। लेकिन जब इसमें स्पॉन्सर जुड़ जाते हैं तो यह एक कॉर्पोरेट इवेंट बन जाता है, जहां मौत भी विज्ञापन के साथ आती है।

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