शुक्र मनाओ जी कि यहां तेल के भंडार नहीं हैं। वरना अमेरिका हम पर भी ईरान और वेनेजुएला जैसी नजर रखता।
वैसे शिकायत तो जी यही रहती है जी कि यह चीज हमारे पास क्यों नहीं है, जो उसके पास है। यह शिकायत भाइयों से लेकर आस-पड़ोस तक होते हुए देश-विदेश तक सब जगह रहती है। मसलन, तेल खाड़ी देशों में क्यों है, हमारे यहां क्यों नहीं है। ऊपर वाले ने बड़ी नाइंसाफी कर रखी है, देखो हमें इतना महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है। पर शुक्र मनाओ जी कि हमारे यहां तेल के भंडार नहीं हैं। वरना तो अमेरिका हम पर भी ऐसे ही नजर रखता, जैसे वह आजकल ईरान और वेनेजुएला पर रखे हुए है। ट्रंप साहब रोज धमकियां देते कि तुम्हारे यहां यह गड़बड़ है, तुम्हारे यहां वह गड़बड़ है। देखो सुधर जाओ, वरना हम हमला कर देंगे।
वैसे धमकियां तो वे आज भी देते हैं, पर ट्रेड और टैरिफ की ही देते हैं। प्रतिबंध लगाने या हमला करने की नहीं देते। सीआईए हमारे यहां हर क्षेत्र में घुसा रहता। वैसे अब भी घुसा हुआ हो, क्या पता। सीआईए के घुसने के लिए तेल के भंडार होना जरूरी नहीं हैं, सिर्फ इस दुनिया में एक देश के रूप में आपका होना ही जरूरी है। पर तेल होता तो हमारे यहां भी रोज तख्तापलट होता रहता, वैसे ही जैसे इराक में हुआ,लीबिया में हुआ और अब वेनेजुएला में कराने की कोशिश हो रही है। भले ही अभी तक हुआ नहीं है, लेकिन कोशिश जारी है।
शुक्र मनाओ कि हमारे यहां तेल के भंडार नहीं हैं, वरना तो क्या पता अमेरिका हमारे शासकों पर भी कभी जनसंहार के हथियार रखने के इल्जाम लगाता जैसे उसने सद्दाम हुसैन पर लगाए, कभी तानाशाही के इल्जाम लगाता जैसे उसने गद्दाफी पर लगाए, कभी अवैध रूप से नाभिकीय शक्ति हासिल करने के इल्जाम लगाता जैसे वह ईरान पर लगाता है, कभी ड्रग तस्करी के इल्जाम लगाता जैसे, उसने मादुरो पर लगाए। जरूरी नहीं कि ऐसे इल्जाम सच ही हों। सद्दाम पर जनसंहार के हथियार रखने का इल्जाम कहां सच निकला। नहीं निकला। उसी तरह मादुरो पर लगाए ड्रग तस्करी के इल्जाम भी जरूरी नहीं कि सच ही निकले।
शुक्र मनाओ कि हमारे यहां इराक, ईरान, लीबिया या वेनेजुएला की तरह तेल के भंडार नहीं हैं। वरना बंगलादेश युद्ध के वक्त तो अमेरिका ने अपना सातवां बेड़ा ही भेजा था, तेल होने पर पता नहीं कितने बेड़े भेजता। तो जी, शुक्र मनाओ कि हमारे यहां तेल के भंडार नहीं हैं, वरना हमारे ऊपर भी अमेरिका किसी न किसी बहाने से चढ़ाई कर ही देता । शुक्र मनाओ कि हमारे यहां तेल के भंडार नहीं हैं वरना इराक और लीबिया की तरह हमारे यहां भी अराजकता ही होती। हमारे शासक अगर सद्दाम हुसैन या मादुरो की नियति को नहीं प्राप्त हो रहे तो इसके लिए शुक्र मनाओ कि हमारे यहां तेल के भंडार नहीं हैं। नहीं?

