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सौ झूठ बोलिए, कौआ नहीं काटेगा!

तिरछी नज़र

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झूठ तो चीख-चीख कर कह रहा है, ‘इस जमीं से आसमां तक मैं ही मैं हूं...!’ हां! झूठ बोलने के सबके अपने-अपने तरीके हो सकते हैं!

एक गीत है, ‘झूठ बोले कौआ काटे...!’ काटता होगा, यह गीत लिखने वाले गीतकार वल्लभ भाई पटेल के जमाने में! आजकल तो नहीं काटता। यदि काटता होता तो ‘वे महाशय’ 993 दिन में 13435 बार झूठ नहीं बोल पाते। उन्हें कौआ तो क्या कुत्ता तक नहीं काटा। यह आंकड़ा तो करीब 6 माह पुराना है।

अभी भी रुके नहीं हैं जनाब। झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं, ‘मैंने फलां-फलां युद्ध रुकवा दिया। एक युद्ध को लेकर तो वे अब तक 70 से अधिक बार झूठ बोल चुके हैं, जबकि यह युद्ध था ही नहीं। यह तो पड़ोसी देश के आतंक के विरुद्ध एक देश का ‘ऑपरेशन’ मात्र था। उन महाशय के झूठ को सिरे से नकार चुका है, लेकिन वे हैं कि मानते नहीं। सदी का सबसे बड़ा मजाक यह कि इन्हीं ‘झूठ’ के सहारे इन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार चाहिए था। खैर...!

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वैसे अन्य नेताओं को भी किसी कौए ने काटा क्या? नेताओं की झूठी बयानबाजी अब कोई छुपी हुई बात तो रह नहीं गई है। झूठ बोले बगैर कोई पक्का नेता बन जाए, संभव ही नहीं है। झूठे आंसू बहाने की उनकी प्रकृति तो ‘घड़ियाल’ से मिलती-जुलती है।

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उनकी तो अब सोच बन गई है कि झूठ बोलने में डरिए मत। कोई कौआ नहीं काटने वाला। दिन-रात झूठ बोलकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की होड़ में लगे झूठों को कौआ नहीं काट रहा है तो हमारे जैसे एकाध बार झूठ बोलने वालों को कौए से क्या डरना?

वैसे भी झूठ बोले बगैर आजकल किसी का गुजारा कहां होता है? अब कानून के रखवाले को ही ले लीजिए। उन्हें तो अपने पक्षकार को जिताना ही होता है तो सच के साथ झूठ बोलना ही पड़ता है। हालांकि, उनकी ‘पेशेगत मजबूरी’ होती है, यह हम जानते हैं लेकिन कौआ भी जानता है क्या?

यह मत कहिएगा कि काला कौआ वकीलों का काला कोट देखकर डरता होगा। अगर ऐसा होता तो फिर चिकित्सक महोदय तो सफेद कोट पहने होते हैं न। वे कहां राजा हरिश्चंद्र की परम्परा से आते हैं। अधिकांश चिकित्सकों को यह मालूम होते हुए भी उनके ‘मरीज’ का भगवान के यहां का टिकट ‘कन्फर्म’ हो गया है, लेकिन फिर भी उनके परिजनों को झूठा आश्वासन देते रहते हैं कि धैर्य रखिए, कोशिश कर रहे हैं, भगवान ने चाहा तो सब ठीक होगा।’

वैसे तो झूठ कौन नहीं बोलता? किस-किस की बात करूं और किस-किस की शान में कसीदे पढ़ूं? झूठ तो चीख-चीख कर कह रहा है, ‘इस जमीं से आसमां तक मैं ही मैं हूं...!’ हां! झूठ बोलने के सबके अपने-अपने तरीके हो सकते हैं! लेकिन कौआ तो किसी को काटते दिखता। जो सच है आपको बता दिया क्योंकि ‘मैं झूठ नहीं बोलता!’

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