उपभोग मिथ्या है, त्याग सत्य। रोग सत्य है, डॉक्टर मिथ्या। बिन चीनी की चाय सत्य है, चीनी मिथ्या है। हर पैथी में लिखा है कि जो जीव बिन चीनी की चाय पीता है, वह निरोग जीता है, निरोग मरता है।
आज का इंसान सब कुछ खाना, कहना छोड़ सकता है, पर झूठ कहना और मीठा खाना बिल्कुल नहीं छोड़ सकता। चाहे रस्म-अदायगी के लिए दो दाने चीनी के चाय में क्यों न डालने पड़ें। चाहे कहने भर को ही झूठ क्यों न कहना पड़े। मीठे और झूठ में, प्राण निवास करते हैं। वैसे जानता हूं कि नुकसानदेह शौकों को छोड़ने में कई फायदे होते हैं। चाहे वह रिश्वत हो, चाहे चीनी। पर क्या किया जाए, शौकों के आगे इंसान विवश है, लाचार है। बाहर से स्वस्थ है, भीतर से बहुत बीमार है।
कोई चीज़ घर में खत्म हो जाए तो उसको खाने को उतना ही मन होता है। अचानक चाय की ललक उठी। डिब्बा उठाया तो चीनी खत्म। उसे दाएं-बाएं बहुत बजाया, पर दो दाने चीनी न निकली। शर्म से मुस्कुराते, चीनी के बढ़े दामों का ख्याल करते पड़ोसी से चीनी मांगने से पहले उसे चेक करने को फोन लगाया कि क्या उसके पास चीनी है कि नहीं, तो वह शर्मिंदा होने से पहले तुरंत संभल गया कि महीने के आखिरी सप्ताह में उसे फोन क्यों किया है?
आखिर पड़ोसी शातिर किसका है? इससे पहले कि कुछ कहता पूछता, उसने एक कटोरीभर चीनी उधार देने के बदले कटोरा भर-भर उपदेश देते यों कहा ज्यों वह पड़ोसी न होकर सरकार का पड़ोसी हो, ‘बंधु! उपभोग मिथ्या है, त्याग सत्य। रोग सत्य है, डॉक्टर मिथ्या। बिन चीनी की चाय सत्य है, चीनी मिथ्या है। हर पैथी में लिखा है कि जो जीव बिन चीनी की चाय पीता है, वह निरोग जीता है, निरोग मरता है।’
‘मतलब?’
‘मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने पर हर महीने के आखिरी हफ्ते पड़ोसी से चीनी मांगते हुए शर्मिंदा नहीं होना पड़ता। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से शरीर से लेकर दिमाग तक का मोटापा नहीं बढ़ता। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से दिमाग स्थिर रहे या न! असली तो असली, नकली दांतों तक में कैविटी और सड़न नहीं होती। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से चीनी के बढ़ते मूल्यों को देख बीपी हाई नहीं होता। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से ब्लड शूगर बढ़ने का खतरा नहीं रहता है। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से हार्ट सेफ रहता है। मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से फैटी लिवर का खतरा जीरो हो जाता है।
और अब आखिरी मतलब ये कि बिन चीनी की चाय पीने से बॉडी का मेटाबॉलिक सिस्टम एकदम मस्त रहता है। मतलब ये कि हुई महंगी बहुत मिठास कि लाइफ फीकी जिया करो।’ फोन पर साफ-साफ महसूस किया कि उन्होंने चीनी पड़ी चाय की घूंट ली और बड़ी बेदर्दी से फोन काटने के बदले मेरी चाय फीकी कर दी।

