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नहीं भूलतीं सुमन कल्याणपुर

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सुमन कल्याणपुर का 31 मई, 2026 को मुम्बई में देहान्त हो गया। वर्ष 1954 में सर्वप्रथम उन्होंने हिन्दी सिनेमा के लिए गाने गाए। उन्होंने 857 हिन्दी गाने गाये हैं। समकालीन सभी गायकों के साथ उन्होंने युगल गीत गाए हैं। मोहम्मद रफ़ी के साथ लगभग 140 युगल गीत गाए हैं। इनकी आवाज़ लता मंगेशकर से काफ़ी मिलती है, जिससे कई गानों में लोगों को भ्रम होता है कि लता ने गाया या सुमन ने।

इन्होंने हिन्दी के अलावा मराठी, भोजपुरी, मैथिली, बंगाली, पंजाबी, राजस्थानी, ओड़िया, गुजराती, असमिया, कन्नड़ इत्यादि कई भाषाओं में गाने गाए हैं। ‘शराबी-शराबी ये सावन का मौसम, ख़ुदा की कसम ख़ूबसूरत ना होता, अगर इसमें रंग-ए-मुहब्बत न होता’, ‘न तुम हमें जानो न हम तुम्हें जानें, मगर लगता है कुछ ऐसा मेरा हमदम मिल गया’, ‘बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दीये जलाके’, ‘यूं ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना, तेरी याद तो बन गई एक बहाना’, ‘दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआं न हो, मुमकिन है इसके बाद कोई इम्तेहां न हो’, ‘मेरे महबूब न जा, आज की रात न जा’, ‘जो हम पे गुज़रती है, तनहा किसे समझाएं’’ इत्यादि गाना उस ज़माने से मुझे पसन्द है जब न गीत के बोल जानती-समझती थी न उसके माने न मायने। जब तक मेरे पापा जीवित रहे तब तक हर दिन रेकॉर्ड प्लेयर पर सभी गायकों के गाने बजते रहते थे।

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मुझे सबसे ज्यादा मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर को सुनना अच्छा लगता था। मैं 12 वर्ष की थी जब पापा का देहान्त हो गया। घर में चुप्पी छा गई। भाई जब गांव से आता तब घर गुलज़ार होता और रेडियो या रिकॉर्ड प्लेयर बजता था। एक साल बाद जब मैं थोड़ा सामान्य हुई तब मैं फिर से गाना सुनने लगी। गाना सुनना मेरे परिवार के जींस में है शायद। वैसे तो सभी रेकॉर्ड मैं बजाती थी; लेकिन सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफ़ी के गाने रिपीट कर-करके सुनती थी।

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गाना सुनना मेरा बचपन से शौक़ है। जैसे-जैसे बड़ी होती गई, सभी गायक-गायिकाओं को सुनने लगी। लेकिन सुमन कल्याणपुर के गाए कुछ गाने मुझमें इस तरह समाहित हैं, जिसे अपने मन की किसी भी अवस्था में सुनकर सुखद महसूस करती हूं। सुमन कल्याणपुर का जाना संगीत जगत की ही नहीं; बल्कि श्रोताओं की भी क्षति है। फ़िल्म ‘नसीब’ (1981) का गाना ‘ज़िन्दगी इम्तिहान लेती है, लोगों की जान लेती है’ उनका अन्तिम हिन्दी गाना है। फिर भी उनके गाए सभी गीत उनके चाहने वालों के दिलों में सदा के लिए जीवित रहेंगे।

साभार : साझा-संसार डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम

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