बजट 2026–27 आने वाले भारत की युवा-आधारित आर्थिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इसमें नयी पीढ़ी की शिक्षा, रोजगार, तकनीकी कौशल और रचनात्मक आकांक्षाओं को केंद्र में रखा गया है। एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट पर ज़ोर है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 को सरकार ‘नेक्स्ट जेनरेशन बजट’ कह रही है। यह दावा केवल एक राजनीतिक नारा नहीं लगता, बल्कि बजट के प्रावधानों पर नज़र डालने से स्पष्ट होता है कि इसमें जेनरेशन जेड- यानी आज के युवा वर्ग- की शिक्षा, रोजगार, तकनीकी कौशल और रचनात्मक आकांक्षाओं को केंद्र में रखा गया है। आज का युवा सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं है; वह स्किल-ड्रिवन, डिजिटल-नेटिव और क्रिएटिव माइंडसेट के साथ आगे बढ़ना चाहता है। बजट 2026-27 इसी बदले हुए युवा चरित्र को पहचानता है।
इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट पर ज़ोर। सरकार ने शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने के लिए एक समग्र रणनीति अपनाई है। कौशल-आधारित शिक्षा, एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों को बढ़ावा और यूनिवर्सिटी टाउनशिप की अवधारणा इस दिशा में अहम कदम हैं।
महत्वपूर्ण है कि केवल डिग्रियां युवाओं को रोजगार नहीं दिला सकतीं; उन्हें व्यावहारिक कौशल और उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण की आवश्यकता है। यदि यह योजना ज़मीनी स्तर पर सही ढंग से लागू होती है तो यह भारत की युवा बेरोज़गारी की समस्या को कम करने में निर्णायक साबित हो सकती है। विदेश में पढ़ाई-लिखाई करने वाले छात्रों तथा अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का अनुभव चाहने वालों को राहत देने के लिए, सरकार ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत टीसीएस दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इससे विद्यार्थी विदेश शिक्षा-अनुभव को अधिक किफ़ायती रूप से चुन सकेंगे, जिससे तकनीकी तथा ग्लोबल मौके और एक्सपोज़र मिलेंगे।
बजट में ऑरेंज इकोनॉमी यानी एनिमेशन, गेमिंग, डिज़ाइन, विज़ुअल इफेक्ट्स और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देना जेन जेड के लिए एक बड़ा संदेश है। 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि सरकार अब यूट्यूब, गेमिंग, एनीमेशन और डिजिटल स्टोरीटेलिंग को शौक नहीं, बल्कि कैरियर के रूप में देख रही है। इस कदम का व्यापक लक्ष्य यह है कि भारत 2030 तक लगभग 20 लाख एवीजीसी सेक्टर-विशेषज्ञों की आवश्यकता को पूरा करे, और उसे विश्व-स्तर के डिजिटल क्रिएटिव हब में बदल दे। यह कदम भारत के लाखों क्रिएटिव युवाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लर्निंग पर दिया गया ज़ोर इस बजट को भविष्य-उन्मुख बनाता है। आज की नौकरियां डेटा, एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल सिस्टम्स से जुड़ी हैं। बजट यह मानता है कि अगर भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहना है, तो युवाओं को इन्हीं क्षेत्रों में दक्ष बनाना होगा।
जेन जेड केवल नौकरी चाहने वाली पीढ़ी नहीं है, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने की आकांक्षा भी रखती है। एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग, पूंजीगत व्यय में वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से नए अवसर पैदा होंगे। इससे युवा उद्यमियों को जोखिम लेने और नवाचार करने का भरोसा मिलेगा। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस)में कमी यह दर्शाती है कि सरकार वैश्विक शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोज़र को भी महत्व दे रही है। यह फैसला मध्यम वर्गीय युवाओं के लिए विशेष रूप से राहतकारी है। भारत का युवा वर्ग पहले से ही स्टार्टअप और नवोन्मेष (इनोवेशन) की ओर अग्रसर है —यह बजट इन्हें संसाधन-समर्थक वातावरण देने की दिशा में उल्लेखनीय कदम है। बजट ने खेलो इंडिया मिशन तथा खेल-इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार से युवाओं के खेल-प्रतिभा विकास को बढ़ावा दिया है। साथ ही पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र की डिजिटलाइजेशन तथा पर्यटन-संबंधित कौशल विकास योजनाएं भी युवा रोजगार सृजन को आगे बढ़ाती हैं।
कुल मिलाकर, बजट 2026–27 केवल आज की जरूरतों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले भारत की युवा-आधारित आर्थिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह बजट जेन जेड को बोझ नहीं, बल्कि भागीदार मानता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं काग़ज़ से निकलकर ज़मीन तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं। यदि क्रियान्वयन मजबूत रहा तो यह बजट सचमुच भारत की अगली पीढ़ी को आत्मनिर्भर, कुशल और ग्लोबल नागरिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
यह बजट शिक्षा से रोजगार तक का एकीकृत मार्ग प्रदान करता है। डिजिटल और तकनीकी कौशल को मुख्यधारा में लाता है। रचनात्मक अर्थव्यवस्था और ऑरेंज इकोनॉमी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाता है। वैश्विक शिक्षा-अनुभव और रोजगार-सृजन के अवसरों को बढ़ाता है।
यह बजट केवल आज के युवाओं के लिए नहीं बल्कि अगले पांच दशक के युवाओं के लिए एक मजबूत आर्थिक ढांचा तैयार कर सकता है। साथ ही भारत को एक ग्लोबल तकनीकी-रचनात्मक शक्ति बनाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम प्रतीत होता है।
-लेखक विज्ञान विषयों के जानकार हैं।

