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संस्कार एक्सपायर, बदतमीजी का नया सिलेबस

तिरछी नज़र

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हमने बच्चों को उड़ान देना सिखाया, पर उड़ने की दिशा बताना भूल गए। हमने दोस्ती सिखाई पर मर्यादा का अध्याय फाड़ दिया।

हमारे जमाने में पिता सिर्फ आदमी नहीं हुआ करता, पूरा कानून हुआ करता। घर में उनकी खांसी भी संविधान मानी जाती थी। पिता कड़क थे, इसलिए सिस्टम सही चलता था। पहले के पिता घर आकर चुपचाप खाट पर बैठते तो उसी चुप में डर भी होता था और इज़्जत भी।

आज के रिश्तों की हालत वैसी है जैसे घर में सब लोग हों, पर कोई घर पर न हो। बाप कुछ कहना चाहता है तो पहले गला साफ करता है, डरता है कि कहीं बच्चा गलत कदम न उठा ले। मां प्यार से समझाए तो जवाब मिलता है कि मम्मी यार, माइंड योर ओन बिजनेस।

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पहले बच्चे ‘पापा’ कहते थे तो आवाज में झुकाव होता था, आज ‘पापा यार’ कहते हैं तो ऐसा लगता है जैसे ओला ड्राइवर से बहस चल रही हो। कभी बाप की डांट से भविष्य बनता था, आज बच्चे की अकड़ से रील बनती है। अगर बाप डांट दे तो बच्चा आत्मसम्मान खो देता है। पर अगर बच्चा बदतमीजी करे, तो कहा जाता है-अरे छोड़ो, जनरेशन गैप है। यानी कि संस्कार एक्सपायर हो गए और बदतमीजी को नया सिलेबस बना दिया गया।

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हमने बच्चों को उड़ान देना सिखाया, पर उड़ने की दिशा बताना भूल गए। हमने दोस्ती सिखाई पर मर्यादा का अध्याय फाड़ दिया। स्कूल से मास्टर की शिकायत आती तो पहले बाप कहता था-तू ही लफड़ा कर आया होगा। आज का पापा यार कहता है कि मास्टर का बिहेवियर ठीक नहीं है। अब हालत ये है कि बाप बच्चे से डरता है, मां बच्चे को मनाती है और बच्चा किसी को भाव नहीं देता।

पहले बाप की आंख उठ जाया करती तो बालक सीधा हो जाया करता। और अगर बीच में बच्चा जरा भी चूं-चपर करने लगता तो पिता का सवाल होता -अच्छा तो अब तू मुझे समझायेगा? आज बाप की आंख उठती है तो बालक की भौंहें चढ़ने लगती हैं और बाप बीपी की गोली ढूंढ़ता है।

जिस घर में बाप पूछ-पूछ कर चले और छोरा मूंछ पे ताव दे तो समझ लो चूल्हा तो जल रहा है पर रोटी कच्ची है। हमने बच्चों को राजा बना दिया है और फिर पूछते हैं कि ये हुक्म क्यों चलाने लग गया। एक मनचले ने अपना अनुभव बताते हुए कहा है कि पहले के पिता फादर्स डे के मोहताज नहीं थे। जब दिल करता था जूता उठाकर याद दिला दिया करते कि बाप कौन है।

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एक बर की बात है अक नत्थू का बाब्बू उस ताहिं धमकाते होये बोल्या- तू ओड़ बड्डा हो लिया अर खाल्ली हांडता फिरै, अमरीकी छोरे 15 साल की उमर म्हं अपणे पैरां पै खड़े हो ज्यैं। नत्थू बोल्या- अर अपणे भारत म्हं तो एक साल का छोरा भाजता हांडै है।

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