Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

मौज-मस्ती के संग बापू का पुण्य स्मरण

तिरछी नज़र

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

वे यह समझ नहीं पाए कि आखिर यह छुट्टी बापू के नाम कैसे समर्पित हो। फिर उन्होंने हिसाब लगाया कि इस बार शुक्रवार को गांधी जयंती आई है, यानी शनि-रवि मिलाकर तीन दिन की छुट्टी हो जानी है। क्यों न तीन दिन सपरिवार पर्यटन किया जाए।

आज छुट्टी थी। सरकार ने गांधी जयंती का राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर रखा था। सुबह सोकर उठे तो वे पशोपेश में थे—छुट्टी किस तरह मनाएं। एक सरकारी कर्मचारी गांधी जयंती पर ऐसा क्या करे कि सरकार के दिए इस अवकाश का सदुपयोग हो। होना तो यह चाहिए था कि जब गांधी जी के जन्मदिन पर छुट्टी मिली तो गांधी जी को तो याद करना बनता ही था। पर गांधी को वे कैसे और किस तरह याद करते कि सरकार के घोषित इस अवकाश की सार्थकता सिद्ध होती।

सबसे पहले उन्होंने गांधी जी के दर्शन करना उचित समझा। घर में बापू की तस्वीर की खोजबीन शुरू की तो नहीं मिली। मिलती कैसे, कभी गांधी को याद किया होता तो मिलती। हां, छुट्टी न होती तो सरकारी कार्यालय में तो गांधी जी की तस्वीर दिख ही जाती। पर सरकार ने तो गांधी को याद करने के लिए आज घर पर बैठा दिया है।

Advertisement

पत्नी से बापू की तस्वीर के लिए पूछा तो उसने पांच सौ रुपये का नोट दिखाने को कहा। उन्होंने पत्नी को पांच सौ का नोट दिया तो पत्नी ने नोट दिखाते हुए कहा—‘लो, कर लो बापू के दर्शन।’ पत्नी की बुद्धिमत्ता के वे कायल हो गए। हालांकि यह पत्नी का नोट झटकने का पैंतरा भर था।

Advertisement

चलिए, नोट पर बापू के दर्शन हो गए। अब देश के लिए राष्ट्रपिता के योगदान के प्रति कृतज्ञता जताने का और तरीका क्या हो! बापू ने तो अपना पूरा जीवन देश को आजादी दिलाने में झोंक दिया, पर अब देश आजाद था तो वे अपना जीवन कहां झोंकते। फिर भी उनका दायित्व तो बनता था कि गांधी जयंती की सरकारी छुट्टी के औचित्य को वे सिद्ध करते। सरकार ने इस दिन पूरे देश के कर्मचारियों को दफ्तरों से आजादी दिलाकर अपना योगदान प्रदर्शित कर दिया था, उन्हें भी तो कुछ ऐसा करना था कि बापू के जन्मदिन पर मिले इस अवकाश पर कुछ ऐसा करते कि सरकार के इस महान योगदान पर मुहर लगती।

काफी सोच-विचार के बाद भी वे यह समझ नहीं पाए कि आखिर यह छुट्टी बापू के नाम कैसे समर्पित हो। फिर उन्होंने हिसाब लगाया कि इस बार शुक्रवार को गांधी जयंती आई है, यानी शनि-रवि मिलाकर तीन दिन की छुट्टी हो जानी है। क्यों न तीन दिन सपरिवार पर्यटन किया जाए। परिवार से पूछा तो पत्नी-बच्चे पहले ही छुट्टियों का हिसाब लगाए बैठे थे। उन्होंने तुरंत हामी भर दी। पूरा परिवार बापू के देश के लिए दिए योगदान को भुलाकर तीन दिनों की छुट्टी मनाने घर से निकल पड़ा। वे और उनका परिवार हर वर्ष गांधी जयंती इसी तरह मनाते थे।

Advertisement
×