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हसीना के तेवरों के बाद बांग्लादेश से रिश्तों में तल्खी

शेख हसीना

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बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ढाका ने भारत सरकार को पहले ही अपनी चिंताएं बता दी थीं। इस तरह का कार्यक्रम दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सुधारने की कोशिशों को कमज़ोर कर सकता है। मंत्रालय ने खेद जताया कि जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी पर शेख हसीना का मीडिया संवाद बांग्लादेश की संप्रभुता की अवमानना है।

कुछ दिन पहले तक भारत से रिश्ते नॉर्मल करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास हो रहे थे, लेकिन एक बार फिर उस पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। बांग्लादेश ने बुधवार को भारत द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नई दिल्ली में मीडिया के साथ लाइव बातचीत करने की अनुमति देने पर नाराज़गी जताई है। बांग्लादेश का कहना है कि इस कदम से हमारे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और यह दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाने की कोशिशों के लिए नुकसानदेह है।

बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ढाका ने भारत सरकार को पहले ही अपनी चिंताएं बता दी थीं। इस तरह का कार्यक्रम दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को सुधारने की कोशिशों को कमज़ोर कर सकता है। मंत्रालय ने खेद जताया कि जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी पर शेख हसीना का मीडिया संवाद बांग्लादेश की संप्रभुता की अवमानना है और जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों का अपमान भी है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि 2013 में हुई बांग्लादेश-भारत प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना की वापसी के लिए बांग्लादेश के बार-बार किए गए अनुरोधों का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

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भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के उस वर्चुअल भाषण के आयोजन में किसी भी भूमिका से इनकार किया है, जो उन्हें सत्ता से हटाने वाले विद्रोह की दूसरी बरसी के मौके पर हुआ था। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है और वह इस मंच पर व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती है।’

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78 वर्षीय हसीना बुधवार को नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपने बेटे साजीब वाज़ेद जॉय और अन्य वक्ताओं के साथ पहली बार सार्वजनिक रूप से (वीडियो लिंक के ज़रिए) दिखाई दी थीं। ढाका से भागने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। लेकिन उस वीडियो को बांग्लादेश में कोई न देखे, इसकी तैयारी ढाका ने पहले से कर रखी थी।

दोनों देशों के बीच नए सिरे से जो तल्खी हुई है, उसमें शक है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नई दिल्ली आएंगे। भारत ने 12 और 13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित किया है। शेख हसीना के बयान के बाद ढाका इस पर पुनर्विचार करने लगा है। यों, भारत ने यह आमंत्रण बांग्लादेश को ब्रिक्स सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संगठन बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में दिया है।

शेख हसीना ने यह बयान इस वक्त क्यों दिया है? उसकी टाइमिंग पर ध्यान दिया जाना चाहिए। क्या वो नहीं चाहतीं कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और पीएम मोदी के रिश्ते बेहतर हों? दिनेश त्रिवेदी को ढाका में उच्चायुक्त बनाकर भेजने का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक नौकरशाही से हटकर एक कद्दावर राजनेता के ज़रिए रणनीतिक संवाद स्थापित करना था। 18 महीने के अंतराल के बाद कोलकाता-ढाका के बीच और ढाका-अगरतला के बीच बस सेवाएं चल रही हैं। जब मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ा और वैश्विक ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई, तो दिल्ली ने सीमा-पार फ्रेंडशिप पाइपलाइन के ज़रिए बांग्लादेश को हज़ारों टन आपातकालीन ईंधन भेजा। लेकिन, दिनेश त्रिवेदी सांप-सीढ़ी वाले खेल में फंस गए लगते हैं।

फरवरी, 2026 के आम चुनाव के बाद जिस तरह बीएनपी सत्ता में आई, लोग व्यापक बदलाव की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन, अब वो निराशा में बदलने लगी है। नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा, ‘आम लोगों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कोई राहत नहीं मिली है।’ गुरुवार को 11 पार्टियों के गठबंधन ने ढाका में धरना दिया, जिसमें गैस, बिजली और आवश्यक वस्तुओं के मौजूदा संकट का विरोध किया गया और 10 सूत्रीय मांगों का चार्टर पेश किया गया।

गठबंधन ने सितंबर से नवंबर तक विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। मुक्तांगन में रैली के बाद जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान, नेशनल सिटिज़न पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद और गठबंधन के अन्य नेताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया। उन्होंने घरेलू गैस की कीमतें कम करने, बिना रुकावट पाइपलाइन गैस आपूर्ति और हर घर तक बिजली पहुंचाने की मांग की। संभवतः शेख हसीना इसी का इंतज़ार कर रही थीं, जब देश में क्रांति करने वाले चेहरे अपने किए पर अफ़सोस प्रकट करें। अब जब शेख हसीना ख़ुद बांग्लादेश जाना चाहती हैं, क्या नया निज़ाम उन्हें आने से रोकेगा?

मगर, ढाका-दिल्ली के बीच बनते-बिगड़ते संबंधों की एकमात्र वजह शेख हसीना नहीं हैं। चीन ने भी अपना खेल जारी रखा है। याद कीजिए, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस 26 से 29 मार्च, 2025 तक चीन के दौरे पर थे, तब आठ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। चीन लगातार 15 सालों से बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। बांग्लादेश में लगभग 1,000 चीनी कंपनियां काम कर रही हैं, जिन्होंने देश में 5,50,000 से ज़्यादा नौकरियां पैदा की हैं। फरवरी 2025 में, बांग्लादेश की आठ राजनीतिक पार्टियों के 22 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल 13 दिन की चीन यात्रा पर गया था। प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने 24 से 26 जून, 2026 के बीच चीन की आधिकारिक यात्रा की। चीन ने तब 30 अरब डॉलर के अनुदान का अहद किया। पद संभालने के बाद यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा था। चीन ने 1975 से अब तक बांग्लादेश को कुल 7.5 अरब डॉलर का लोन दिया है।

क़रीबी रिश्तों के बावजूद, व्यापार असंतुलन और लोन पर ब्याज का भुगतान बांग्लादेश के लिए बड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। लेकिन, चीन का असल खेल तीस्ता में हुई इंट्री है। 9 जनवरी, 2025 को बांग्लादेश जल विकास बोर्ड (बीडब्ल्यूडीबी) और चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना ने 98 करोड़ डॉलर की तीस्ता व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना पर हस्ताक्षर किए। पर्यावरण सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन के अनुसार, ‘समझौते के तहत, पावर चाइना एक व्यवहार्यता अध्ययन करेगी। इसके बाद, तीस्ता परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।’ मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान तीस्ता जल बंटवारे समझौते पर 2011 में हस्ताक्षर होने थे। लेकिन, पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण, तीस्ता समझौता विफल हो गया। तीस्ता जल प्रबंधन की ज़िम्मेदारी जिस तरह चीन ने ली है, उसके रणनीतिक परिणामों के प्रति नई दिल्ली को गंभीर हो जाना चाहिए।

लेखक जियो-पॉलिटिकल मामलों के पत्रकार हैं।

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