हंसते-हंसाते अलविदा कह गये राजू : The Dainik Tribune

हंसते-हंसाते अलविदा कह गये राजू

हंसी की दुनिया उदास

हंसते-हंसाते अलविदा कह गये राजू

प्रभुनाथ शुक्ल

प्रभुनाथ शुक्ल

राजू श्रीवास्तव लोगों को हंसाते-हंसाते रुला कर चले गए। अस्पताल में 42 दिन के लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने जिंदगी को अलविदा कह दिया। राजू का जाना पूरी हंसी की दुनिया का खामोश होना है। एक ऐसे दौर में राजू श्रीवास्तव का चले जाना बेहद पीड़ादायक है, जब लोग डिप्रेशन जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं। दौड़ती-भागती जिंदगी में जीवन में जब हंसी का कोई ठिकाना ही नहीं है। लोगों के चेहरे पर थकान है, मुस्कान दिखती ही नहीं। जिंदगी इतनी तेज भाग रही है कि लोगों की हंसती-खेलती दुनिया ही गायब है। ऐसे दौर में राजू एक कॉमेडियन होते हुए भी अवसाद के मरीजों के लिए दवा थे।

राजू श्रीवास्तव एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां साहित्य और कला को खुली सांस मिली। उनके पिता रमेश श्रीवास्तव एक कवि थे। उन्हें लोग बलई काका के नाम से भी पुकारते थे। उनका जन्म कानपुर में 1963 में हुआ। 58 साल की उम्र में दुनिया को हंसाने वाला शख्स रुलाता चला गया। कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को 10 अगस्त को दिल का दौरा पड़ा था। उन्हें इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। सोशल मीडिया पर बीच में ही राजू श्रीवास्तव के निधन की खबरें वायरल हुई थीं। लेकिन परिवार के लोगों ने इसका खंडन किया थ। आज वह मनहूस खबरें सच साबित हुईं। राजू श्रीवास्तव ने कॉमेडियनों की दुनिया में अपनी अच्छी-खासी जगह बना ली थी। उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। वे अमिताभ बच्चन के बहुत तगड़े फैन थे।

कॉमेडी की दुनिया में उन्हें अमिताभ बच्चन की मिमिक्री से शोहरत मिली। राजू श्रीवास्तव उस दौर में लोगों के दिलों पर राज करते थे जब संचार के इतने तगड़े माध्यम नहीं हुआ करते थे। लोगों के बीच पहुंचने का रेडियो और दूरदर्शन एकमात्र सहारा था। उस दौर में टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने राजू श्रीवास्तव का ऑडियो कैसेट जारी किया था। राजू की कॉमेडी में गजोधर और मनोहर भैया कालजयी पात्र होते थे। राजू की कॉमेडी में एक अजीब तरह का खिंचाव और लगाव था। उनकी कॉमेडी लोगों को बेहद पसंद आती थी। राजू श्रीवास्तव हमारे बीच भले नहीं रहे, लेकिन हंसी की दुनिया के कालजयी पात्र गजोधर और मनोहर भईया हमें याद आएंगे।

सत्य प्रकाश श्रीवास्तव यानी राजू ने द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज से काफी सुर्खियां बटोरी। लॉफ्टर चैलेंज के जरिए उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया। शुरुआती दौर में उन्होंने आर्केस्ट्रा में काम किया। एक कार्यक्रम में उन्हें पारिश्रमिक के रूप में 100 रुपये पहली बार मिले तो वे बेहद खुश हुए। साल 1982 में राजू श्रीवास्तव ने मुंबई की तरफ रुख किया। उन्होंने सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया, बाजीगर, मुंबई टू गोवा, आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया जैसी फिल्मों में भी काम किया। राजू श्रीवास्तव की प्रसिद्धि जब अपने चरम पर थी तो उस दौरान कॉमेडियन कपिल शर्मा का शो भी लोगों के दिलों पर राज कर रहा था। कपिल शर्मा ने भी राजू श्रीवास्तव को कई बार बुला कर शो किया। राजू देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भी मिमिक्री करते थे। राजू श्रीवास्तव ने बीबीसी के अपने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि पढ़ाई के दौरान जब वे लोगों की कॉपी करते थे तो शिक्षक उन्हें खूब डांटते थे। राजू सामान्य परिवार से होते हुए भी हंसी की दुनिया में अपना स्थान बनाने में कामयाब हुए।

राजू श्रीवास्तव कॉमेडी की दुनिया में आने से पहले फ़िल्में खूब देखते थे और फिल्म दिखने के बाद नायकों की आवाज निकालते थे। उसी तरह बोलने का प्रयास करते थे। फिल्मों के बेताज बादशाह अमिताभ बच्चन उनके पसंदीदा हीरो थे। दीवार और शोले पिक्चर देखकर ही वह अमिताभ बच्चन की मिमिक्री करने लगे थे। धीरे-धीरे उनकी मिमिक्री को जब लोग पसंद करने लगे तो त्योहारों पर होने वाले आयोजनों पर राजू श्रीवास्तव को बुलाया जाता था और वे फिल्म अभिनेताओं की मिमिक्री करते थे।

राजू श्रीवास्तव कॉमेडियन से इतर राजनीति की दुनिया में भी खुद को आजमाना चाहते थे। समाजवादी पार्टी से साल 2014 में कानपुर से लोकसभा का टिकट मिला था लेकिन बाद में उन्होंने मना कर दिया। फिर भाजपा में शामिल होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में अच्छी-खासी भूमिका निभायी। साल 2019 में राजू श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश फिल्म परिषद का अध्यक्ष भी बनाया गया।

राजू श्रीवास्तव जाने-अनजाने एक ऐसी दुनिया के उपचारक भी थे जिनके लिए वे दवा साबित होते रहे। आधुनिक जीवनशैली में इंसान के पास हंसी के लिए कोई जगह नहीं है। लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे लाखों लोग राजू श्रीवास्तव की कॉमेडी को देखकर स्वस्थ और मस्त रहते थे। लेकिन अब राजू हमारे बीच नहीं मिलेंगे। शरीर तो नश्वर है एक दिन दुनिया को अलविदा कहना है। भले ही राजू श्रीवास्तव हमारे बीच से भले चले गए हों लेकिन वह जाते-जाते अपने लाखों प्रशंसकों से कह गए कि ‘मुझे अलविदा न कहना...।’

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