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शांति-शांति खेलने के लिए पर्सनल क्लब

उलटबांसी

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शांति महंगा आइटम है, ऐसे ही न मिल सकता। जो शांति प्रेमी देश हैं, वह पहले एक अरब डालर देंगे, तब जाकर शांति में उनकी हिस्सेदारी होगी।

ट्रंप ने जैसे अपना पर्सनल युनाइटेड नेशन्स, व्यक्तिगत संयुक्त राष्ट्र संघ बना लिया है-बोर्ड आफ पीस। पीस यानी शांति लाने के लिए वैसे दुनिया में कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र संघ है। पर उसकी हालत अब दुनिया में नब्बे साल के बुजुर्ग वाली हो गयी है, कोई सुनता नहीं है उसे। संयुक्त राष्ट्र संघ ने खुद भी कुछ बोलना बंद कर दिया, क्या करना बोलकर, जब कोई सुनता ही नहीं।

ट्रंप बड़े आदमी हैं, उन्हें अपना पर्सनल युनाइटेड नेशन्स चाहिए था। बड़े आदमी को सब कुछ निजी चाहिए। निजी स्टेडियम, निजी स्विमिंग पूल, निजी हवाई जहाज, निजी युनाइटेड नेशन्स। ट्रंप साहब ने बना लिया है पर्सनल युनाइटेड नेशन्स- पड़ा रहेगा, दफ्तर में एक कोने में। इसमें कुछ कमाई का जुगाड़ भी हो जायेगा। महंगे क्लबों में एंट्री फीस बहुत महंगी होती है। स्पेशल मेंबरशिप उन्हें ही मिलेगी, जो एक अरब डालर देंगे। शांति महंगा आइटम है, ऐसे ही न मिल सकता। जो शांति प्रेमी देश हैं, वह पहले एक अरब डालर देंगे, तब जाकर शांति में उनकी हिस्सेदारी होगी।

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दुनिया में शांति की बातें तो बहुत होती रही हैं, लेकिन जब ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाने का ऐलान किया, तो शांति खुद हंस पड़ी। शांति घबराई—‘अब मेरी नौकरी भी खतरे में है, क्योंकि ट्रंप साहब ने शांति को बोर्डरूम में बैठा दिया।’

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पहली बैठक में एजेंडा था—‘शांति कैसे लाई जाए?’

ट्रंप ने कहा—‘पहले दीवार बनाओ, फिर शांति आएगी।’

किसी सदस्य ने कहा— ‘दीवार से लोग बंटेंगे।’

ट्रंप मुस्कुराए—‘बंटवारा ही तो शांति है, सब अपने-अपने हिस्से में शांत रहेंगे।’

बोर्ड ने तय किया कि हर विवाद का समाधान ट्रंप के भाषण से होगा। युद्ध हो तो ट्रंप ट्वीट करेंगे। झगड़ा हो तो ट्रंप की फोटो दिखाई जाएगी और अगर कोई बहुत नाराज़ हो तो ट्रंप उसकी मिमिक्री करेंगे।

बोर्ड ऑफ पीस द्वारा शांति की नई परिभाषा—‘जो ट्रंप को सुनकर चुप हो जाए, वही शांत।’

जनता ने कहा—‘बोर्ड ऑफ पीस से हमें शांति नहीं, मनोरंजन मिला।’

एक ने जोड़ा—असल में यह ‘पीस ऑफ ट्रंप’ है, न कि ‘पीस ऑफ वर्ल्ड।’ खैर, सच यह है कि अगर ट्रंप खुश हैं तो दुनिया शांत है। अगर ट्रंप नाराज़ हैं तो दुनिया युद्ध में है।

पर बोर्ड आफ पीस में पाकिस्तान क्या कर रहा है... पाकिस्तान के पास तो एक अरब डालर नहीं हैं, देने को। पाकिस्तान जहां जाता है, तो सब समझ जाते हैं कि यह सिर्फ मांगने ही आया होगा। ट्रंप पाकिस्तान का इस्तेमाल ऐसे करेंगे कि जिस देश को बोर्ड आफ पीस से निकलवाना होगा, उसके पीछे पाकिस्तान को लगा देंगे कि जाओ सुबह-शाम कर्जा मांगो उससे।

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