वैसे फाइलों के बिना न नौकरशाही, नौकरशाही रहती है और न ही बाबू, बाबू रहता है। बाबुओं के लिए फाइलें एक तरह की फसल होती हैं, वैसे ही जैसे किसानों के लिए धान-गेहूं की फसलें होती हैं।
नहीं, वो प्रेमिका नहीं थी। जी, यह सच है कि प्रेमिकाएं बड़ा इंतजार करवाती हैं। जमाने का कायदा यही है जी। प्रेमिकाएं इंतजार न करवाएं तो कहानी ही नहीं बनती और न ही प्रेमगीत लिखे जा सकते हैं। हालांकि, प्रेमिकाएं भी अपने प्रेमियों का इंतजार करती हैं और उनके आने पर नाचती-गाती फिरती हैं कि आ गए-आ गए आज मेरे सनम। आज मेरे जमीं पर नहीं हैं कदम टाइप से। लेकिन वह प्रेमिका नहीं थी। न यह कोई प्रेम कहानी है। यह तो हवस की कहानी है। हवस की इन्हीं फाइलों का इंतजार था, जिन्हें एप्सटीन फाइल्स कहा जा रहा है। वे भी बड़ा इंतजार करवा कर आयी हैं। लोग उसी तरह से इन फाइलों का इंतजार कर रहे थे, जैसे कयामत आने वाली हो। प्रलय आने वाली हो।
कयामत तो बहरहाल, नहीं आई। न ही उन नामचीनों का कुछ बिगड़ा है, जिनके नाम इनमें आ रहे हैं और जिनको लेकर यह माना जा रहा था कि इनके आते ही, यह नामचीन कहीं के नहीं रहेंगे। अभी तक तो यह नामचीन कहीं गए नहीं हैं, आगे की वक्त बताएगा। पर वे एप्सटीन फाइलें आ गयी हैं और इंटरनेट से लेकर मीडिया तक छा भी गयी हैं। हालांकि हमारे यहां तो फाइलों का बड़ा बुरा हश्र हो रहा है। फाइलों के नाम पर बनी फिल्मों में बस एक कश्मीर फाइल्स चली और बाकी सारी ध्वस्त हो गयी, फिर चाहे वह बंगाल फाइल्स हों, केरल फाइल्स हों या उदयपुर फाइल्स हों।
वैसे जब हमारे यहां सरकार ही फाइलों की कद्र नहीं कर रही तो जनता तो फिर क्यों ही करेगी। बताते हैं कि मोदीजी की सरकार ने लाखों फाइलें यह कह कर नष्ट करवा दी कि बस धूल खा रही हैं और बेकार हैं। इनका कोई उपयोग नहीं। धूल खाना फाइलों का चरित्र होता है। उनकी दूसरी भी कई विशेषताएं होती हैं, जैसे कि जब जरूरत होती है तो वे नहीं मिलती हैं, कई बार दब जाती हैं और निकलकर नहीं देती हैं। कई बार खो भी जाती हैं और फिर मिलती नहीं हैं। वैसे फाइलों के बिना न नौकरशाही, नौकरशाही रहती है और न ही बाबू, बाबू रहता है। बाबुओं के लिए फाइलें एक तरह की फसल होती हैं, वैसे ही जैसे किसानों के लिए धान-गेहूं की फसलें होती हैं। खैर, एप्सटीन फाइलें वैसी फाइलें नहीं हैं। यह कुछ-कुछ हमारी फिल्मों वाली फाइलों जैसी हैं।
अब कुछ लोग कह रहे हैं कि यह हिट जाएंगी। क्योंकि इनमें दुनिया भर के नामी कलाकार यानी नेता और सेठ लोग शामिल हैं। बिल क्लिंटन से लेकर बिल गेट्स तक। बल्कि उनके चित्र आने भी लगे हैं और छाने भी लगे हैं। लेकिन सुना है कि ट्रंप ताऊ ने अपने फोटो हटवा लिए। अरे यार फिर क्या मजा है। उन्हीं के नाम तो यह फाइलें हिट होने वाली थीं। हालांकि जलकुकड़ों को इंतजार था कि यहां वालों का भी बहुत है।

