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एक चुप सौ सुख, बोले तो दुख ही दुख

तिरछी नज़र

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इन सारे लीडरां तै एक-एक दिन खेत म्हं हल चलवाऊंगा तो इननैं बेरा पाटैगा अक जो माणस खेत म्हं पसीना बहा लिया करै, वो खून बहाण की बात नीं सोच्चैगा।

दुनिया का हाल भी वैसा ही हो गया है जैसा घर के व्हाट्सएप ग्रुप का। किसी ने कुछ कहा और बस लड़ाई शुरू या ग्रुप छोड़कर भागने की धमकी। दुनिया में लड़ाई इसलिये नहीं होती कि हथियार ज्यादा हैं, इसलिये होती है कि समझ कम है। अपनी कहावतों में जीवन का सार है। पता नहीं किसने नसीहत दी होगी कि एक चुप सौ सुख। आजकल सलाह देना भी रिस्की काम हो गया है। पहले जमाना बड़ा सीधा था। घर में कोई गलती करे तो बड़े-बुजुर्ग तुरंत सलाह दे देते थे। बाप-बेटे को समझा देता था, पड़ोसी पड़ोसी को समझा देता था और गांव का ताऊ तो बिना पूछे दो सलाह मुफ्त में दे देता था। आज का लड़का अगर बाप से सलाह सुने तो तुरंत मोबाइल निकालता है और कहता है—पापा, गूगल कुछ और कह रहा है।

यह बीमारी सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही। अब तो दुनिया की राजनीति में भी सलाह देना खतरनाक हो गया है। आज अगर कोई नेता ईरान और अमेरिका की लड़ाई के बीच जाकर सलाह देने लगे तो हो सकता है वह सलाह देने से पहले ही इतिहास बन जाए। इस संघर्ष में कई बड़े देश भी बड़ी सावधानी से कदम रख रहे हैं। भारत भी यही सोचता है कि बयान कम और संवाद ज्यादा होना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कई बार चुप रहना भी एक तरह की कूटनीति माना जाता है।

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दरअसल, दुनिया इतनी संवेदनशील हो गई है कि घर में सलाह दो तो बहस शुरू हो जाती है, ऑफिस में सलाह दो तो राजनीति शुरू हो जाती है, अंतर्राष्ट्रीय मामलों में सलाह दो तो विवाद शुरू हो जाता है। आजकल सलाह देना मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना है। शहद मिले न मिले, डंक मिलने की गारंटी है।

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एक बार किसी हरियाणवी से पूछा कि तुम्हें यदि यूएन में भेज दें तो क्या करोगे? ताऊ बोल्या—मैं तो सारे बड्डे-बड्डे लीडरां के मोबाइल छीन ल्यूंगा। लोग बोले कि इसका क्या फायदा होगा? ताऊ समझाते हुए बोला—आधी लड़ाई तो इणके ट्वीट अर भाषणां की ए है। और फिर बोला—इन सारे लीडरां तै एक-एक दिन खेत म्हं हल चलवाऊंगा तो इननैं बेरा पाटैगा अक जो माणस खेत म्हं पसीना बहा लिया करै, वो खून बहाण की बात नीं सोच्चैगा।

कुल सार है कि आजकल सबसे समझदार वही माना जाता है जो हर लड़ाई में कूदने की बजाय समय देखकर चुप रहना जानता हो।

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एक बर की बात है अक नत्थू नैं अपणी लुगाई तै बूज्झी- आं ए! अलमारी म्हं मन्नैं गिण कै पूरे पिचासी हजार धरे थे अर इब ये 65000 क्यूकर हैं। रामप्यारी तपाक दे सी बोल्ली- टीवी कोनी देखो के? रूपिया रोज गिर रह्या है।

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