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रफ्तार की नयी सनसनी उमरान मलिक

रफ्तार की नयी सनसनी उमरान मलिक

अरुण नैथानी

भले ही आईपीएल को क्रिकेट का तमाशाई संस्करण कहा जाये मगर इसकी बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इसके जरिये देश के दूर-दराज के इलाकों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका मिल जाता है। अन्यथा चयनकर्ताओं की नजर कहां गांव-कस्बों के खिलाड़ियों पर जाती है, जो खिलने से पहले ही अनदेखी के चलते मुरझा जाते हैं। इस बार के आईपीएल संस्करण में जम्मू-कश्मीर के उमरान मलिक ने 157 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंककर सनसनी मचाई है। देश-विदेश के तमाम क्रिकेटर उनकी प्रतिभा को सलाम करते हुए कह रहे हैं कि अब भारत की तेज गेंदबाज की तलाश पूरी हुई है। उम्मीद जतायी जा रही है कि निस्संदेह उमरान मलिक जल्दी ही भारतीय टीम में शामिल होंगे। यहां तक कि उनकी ख्याति विदेशों तक भी जा पहुंची है। उनकी स्पीड के जादू से सम्मोहित इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने उनकी जमकर तारीफ की है और कहा कि बाईस साल का यह युवा तेज गेंदबाज जल्दी ही भारतीय टीम में शामिल होगा। साथ ही सलाह दी कि खेल में परिपक्वता के लिये उमरान मलिक को आईपीएल के बजाय ब्रिटिश काउंटी क्रिकेट के लिये खेलना चाहिए।

बहरहाल, आजकल आईपीएल में हर तरफ उमरान मलिक की रफ्तार का जिक्र है। वे लगातार 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंक रहे हैं। हाल ही में उनकी उस गोल्डन बॉल की चर्चा भी हुई, जिसे उन्होंने 157 किलोमीटर की गति से रोवमैन पॉवेल को डाला था। जिसे आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज गेंदों में शुमार बताया गया। जाहिर है दुनिया की कोई भी टीम रफ्तार की इस सनसनी को अपनी टीम में शामिल करना चाहेगी। यानी उनका भारतीय क्रिकेट की टीम में आना लगभग तय ही है। लेकिन जरूरत इस बात की भी है कि उनका खेल सधा हो और वे कम से कम रन दें। हाल ही में आईपीएल के मैचों में वे काफी खर्चीले साबित हुए हैं। हालांकि, उनके लिये सीखने के लिये बहुत कुछ है क्योंकि वे दुनिया के अनुभवी बल्लेबाजों के सामने गेंदबाजी कर रहे हैं। निस्संदेह, वे धुरंधर क्रिकेटरों से सीख कर अपने खेल को संवारेंगे। इस दौरान उनके सामने सीखने के तमाम अवसर हैं।

निस्संदेह, जम्मू के फल व सब्जी बेचने वाले अब्दुल रशीद के सबसे छोटे बेटे उमरान अपनी मेहनत व कड़े अभ्यास से क्रिकेट के नये हीरो बन गये हैं। जम्मू के लोग उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब वे अपनी रफ्तार व शानदार गेंदबाजी के बूते भारतीय टीम में अपनी जगह बनाएंगे। हालिया आईपीएल के खेल ने उनकी दावेदारी पक्की की भी है। उमरान ने बीते साल सैयद मुश्ताक अली ट्राॅफी व फिर प्रथम श्रेणी के क्रिकेट के रूप विजय हजारे ट्राॅफी में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए क्रिकेट की शुरुआत की थी। वहीं उनकी आईपीएल में शुरुआत तब हुई जब हैदराबाद की टीम में एक खिलाड़ी के बीमार होने पर उसकी जगह उन्हें मौका मिला। उन्होंने इस मौके का भरपूर लाभ उठाया। उस समय नेट पर प्रैक्टिस करवा रहे कप्तान को उमरान की सधी व तेज गेंद खेलने में खासी दिक्कत हुई। तब टीम प्रबंधन ने उन्हें टीम में शामिल करने का समर्थन किया। इस तरह एक स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में उमरान सनराइजर्स हैदराबाद की टीम का हिस्सा बने।

दरअसल, उमरान के खेल को तराशने में जम्मू-कश्मीर टीम के कोच रहे इरफान पठान का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में उमरान ने अपने गेंद फेंकने के एक्शन में सुधार किया। इससे पहले उनके कोच रणधीर मन्हास ने भी उनका मार्गदर्शन किया। निस्संदेह बेहतर ट्रेनिंग से उनकी धारदार बॉलिंग असरदार बन सकती है। बहरहाल, आजकल जम्मू में अब्दुल रशीद मलिक के घर पर बधाई देने वालों को हुजूम लगा रहता है। पिता की दिली तमन्ना है कि बेटा भारतीय टीम में शामिल होकर देश का नाम रोशन करे। वे बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उमरान के जुनून का जिक्र करना भी नहीं भूलते कि कैसे वह भूख-प्यास छोड़कर दिन-रात क्रिकेट में जुटा रहता था।

लेकिन इसके बावजूद चिंता यही है कि उमरान चोटिल हुए बिना अपनी रफ्तार को बनाये रखें। कई बार अधिक क्रिकेट खेलने से क्रिकेटर की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वैसे भी तेज गेंदबाजों का खेल ज्यादा लंबा नहीं होता। मुनाफ पटेल भी ऐसे ही तेज गेंदबाज थे, जो चोटिल होने के बाद अपनी रफ्तार खो बैठे। तेज गेंदबाज का उपयोग बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्हें सीमित मैचों में खेलने की सलाह दी जाती है। उन्हें अभी पर्याप्त प्रशिक्षण की भी जरूरत है। आईपीएल में कुछ मौकों पर वे बेहद खर्चीले बॉलर भी साबित हुए हैं। रफ्तार के साथ यह भी जरूरी होता है कि बल्लेबाज को कैसी रणनीति से बांधा जाये। लंबी रेस में बने रहने के लिये उन्हें रफ्तार के साथ ही ज्यादा विकेट भी लेने होंगे। वैसे भी उमरान को अभी बड़े मैच खेलने का अवसर नहीं मिला है और उनके पास अनुभव की भी कमी है। आईपीएल के खेल से उन्हें सही लाइन व लेंथ हासिल करने का अनुभव जरूर मिलेगा। निस्संदेह बीसीसीआई को इस कच्चे हीरे को तराशने के लिये पहल करनी होगी, जिससे भारत की तेज गेंदबाज की तलाश पूरी हो सके। जरूरत उसके हुनर को निखारने की है।

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