चाहे कश्मीर हो, नॉर्थ-ईस्ट हो या फिर छत्तीसगढ़ और ओडिशा, हर ओर जहां आंतरिक सुरक्षा का मामला उठता है, वहीं-वही सीआरपीएफ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और अपनी वीरता दिखाई है।
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर सीआरपीएफ ने कुल 86 पदक जीतकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया। उसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सबसे अधिक कुल 86 वीरता और सेवा पदक प्राप्त हुए। उसे 24 वीरता पदक, 5 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक और 57 सराहनीय सेवा पदक मिले। झारखंड में अप्रैल 2025 में चलाए गए चुनौतीपूर्ण नक्सलवाद-विरोधी अभियान के दौरान असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए 209वीं कमांडो बटालियन फॉर रिजाल्यूट एक्शन (कोबरा) के डिप्टी कमांडेंट अंजनी कुमार और कांस्टेबल दीपक साह को शौर्य चक्र के लिए चुना गया। कीर्ति चक्र शांतिकाल में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। 24 वीरता पदक 2024 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी दो अभियानों और मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ सफल अभियान के लिए मिले।
जब वीरता, शौर्य और बलिदान की बात की जाती है, तो हमेशा भारतीय सेना की चर्चा होती है, लेकिन हमारे अर्धसैनिक बल भी किसी से कम नहीं हैं। चाहे कश्मीर हो, नॉर्थ-ईस्ट हो या फिर छत्तीसगढ़ और ओडिशा, हर ओर जहां आंतरिक सुरक्षा का मामला उठता है, वहीं-वही सीआरपीएफ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और अपनी वीरता दिखाई है। ‘लाल आतंकवाद’ के खात्मे में इसकी बड़ी भूमिका रही है। हाल ही में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन-209 ने एक करोड़ रुपये के इनामी, भाकपा केंद्रीय कमेटी के सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया। मिसिर बेसरा पोलित ब्यूरो का आखिरी सदस्य था और उस पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का संयुक्त इनाम था। उस पर झारखंड, बंगाल और ओडिशा में 175 से भी अधिक मामले दर्ज थे।
आज झारखंड ही नहीं, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में नक्सलवाद अतीत का दुस्वप्न बन चुका है और वहां के स्थानीय निवासी शांति से रह रहे हैं। अपने घर से सैकड़ों मील दूर घने जंगलों में, जहां पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं होती, कठिन से कठिन परिस्थितियों में रहते हुए उन्होंने लगभग अदृश्य उग्रवादियों से लोहा लिया और अंततः सफल हुए।
इस साल जुलाई में सीआरपीएफ की स्थापना के 88 साल पूरे हो गए। इन वर्षों में जब भी इसकी आवश्यकता पड़ी है, इसने अपना शौर्य दिखाया है और बलिदान भी दिया है। इन जांबाज जवानों और अधिकारियों के बलबूते ही गृह मंत्री ने यह घोषणा की थी कि 31 मार्च, 2026 तक सशस्त्र नक्सल आंदोलन समाप्त हो जाएगा। यह संभव भी हुआ और नक्सलवादियों की कमर तोड़ दी गई। हाल के वर्षों में इस बल ने और अधिक चुस्ती-फुर्ती दिखाई और बड़े ऑपरेशन किए। गृह मंत्री शाह ने नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए इस बल का सशक्तीकरण किया। इसे आधुनिकतम हथियार दिलाए, निगरानी के उपकरण जैसे ड्रोन और संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध कराए। समुचित इंटेलिजेंस की व्यवस्था करवाई तथा संबंधित राज्यों के पुलिस बलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया।
सीआरपीएफ की कोबरा बटालियनों ने कई ऐतिहासिक ऑपरेशनों को अंजाम दिया, जैसे— ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, ऑपरेशन ऑक्टोपस, ऑपरेशन डबल बुल और ऑपरेशन चक्रबंधा, जिनसे माओवादियों की शक्ति लगातार क्षीण होती गई। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट जैसे खतरनाक अभियान में 27 खूंखार नक्सली मारे गए। पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी को अपने उन अड्डों को छोड़कर भागना पड़ा, जहां वे वर्षों से जमे बैठे थे।
जवानों ने अपनी वीरता दिखाते हुए और जान पर खेलते हुए दुर्गम इलाकों जैसे—बुढ़ा पहाड़, पारसनाथ, बरमसिया, चक्रबंधा, कारेगुट्टालु और अबूझमाड़ पर फिर से कब्जा कर लिया। इन इलाकों में दशकों से नक्सलियों का कब्जा था और वहां तक पहुंचना दुष्कर था। इनमें उनका सबसे बड़ा कमांडर नंबाल्ला केशव राज उर्फ बसवराजू भी था, जो सीपीआई (माओवादी) का महासचिव था और उस पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था। इसके अलावा सीआरपीएफ ने कई अन्य शीर्ष कमांडरों को भी मार गिराया, जिनमें पातिराम मांझी, गणेश उल्के और मिलिंद आदि शामिल थे। इनके मारे जाने से माओवादियों में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया और बड़े पैमाने पर उनके काडरों ने छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में आत्मसमर्पण कर दिया।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय ने काफी काम किया। वर्ष 2014 के बाद इन इलाकों में 594 पुलिस स्टेशन बनाए गए, 408 सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए और 12,211 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया ताकि आवागमन सहज हो सके। इसके अलावा, संचार तंत्र को मजबूत किया गया ताकि संपर्क बना रहे। गांवों में स्कूल, पोस्ट ऑफिस, नजदीक में बैंक और आईटीआई आदि की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे ग्रामीणों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा।
गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ के जवानों और अधिकारियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इसके तहत उन्हें आयुष्मान सीएपीएफ, ई-आवास पोर्टल, सीएपीएफ पुनर्वास तथा कल्याण और पुनर्वास बोर्ड की सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा, उनके और उनके परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य संबंधी बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए भी कई योजनाएं बनाई गई हैं, जो सुचारु रूप से चल रही हैं।

