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मुनीर को तो बिरयानी और हम पर टैरिफ

तिरछी नज़र

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मतलब उनके लिए यज्ञ-हवन करने वालों पर नजर टेढ़ी और जिसे आतंकवादी और पागल कम्युनिस्ट कह रहे थे, उससे याराना।

मित्रों के दुश्मन और दुश्मनों के मित्र, ऐसे निकले जी, हमारे ट्रंप अंकल। अब साहब अपने यहां कहा तो यही जाता रहा है कि दुश्मन का दुश्मन मित्र होता है। लेकिन यहां तो ट्रंप अंकल हम मित्रों के साथ दुश्मनों का-सा व्यवहार कर रहे हैं। साठ बार कह चुके कि भारत-पाकिस्तान युद्ध मैंने रुकवाया। अरे कहां रुकवाया अंकलजी। काहे झूठ बोल रहे हो ताऊ। सुना नहीं क्या, मोदीजी तो कह रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है। चाहे आपकी तरह साठ बार न कहा हो। पर कहा तो है न। फिर उधर आतंकी हमले भी तो जारी हैं। पहलगाम के बाद अब लालकिले के सामने हमला हो गया। चलो, पाकिस्तान का नाम नहीं आया। आ जाता तो फिर ऑपरेशन सिंदूर तो करना पड़ता और ट्रंप अंकल को नए सिरे से फिर साठ बार वही दोहराना पड़ता।

हालांकि, अभी भी रुके कहां हैं। लगता है सेंचुरी लगाकर ही मानेंगे। खैर, जिन्होंने उनकी जीत के लिए यज्ञ-हवन किए, उन पर तो वे कभी टैरिफ लगाते हैं, कभी भारतीयों को हथकड़ियों और बेड़ियों में वापस भारत भेजते हैं और कभी चिढ़ाने के लिए ही कह देते हैं कि पहलगाम के बाद हुए युद्ध में जीत तो पाकिस्तान की हुई। मतलब पाकिस्तान से दोस्ती, मुनीर को तो बिरयानी खिला रहे हैं और हम पर टैरिफ लगा रहे हैं।

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और अब तो हद ही हो गयी साहब, जोहरान ममदानी से भी हाथ मिला लिया। इतने उदार हो गए कि कह रहे हैं कि फॉसिस्ट कह दिया तो कोई बात नहीं। हमारे यहां कहके देखो न। पर वे कह रहे हैं कि मन हो रहा हो तो फिर कह दो। मतलब उनके लिए यज्ञ-हवन करने वालों पर नजर टेढ़ी और जिसे आतंकवादी और पागल कम्युनिस्ट कह रहे थे, उससे याराना। हमारे यहां कम्युनिस्टों को मोदीजी अर्बन नक्सल कहते हैं। पता है न। पर ट्रंप अंकल कहां तो ममदानी के बारे में कह रहे थे कि इसे गिरफ्तार करवा दूंगा और कहां हाइट हाउस में बुलाकर हंसी-ठट्ठा कर रहे हैं, साथ-साथ प्रेस काॅन्फ्रेंस कर रहे हैं। कहां तो कह रहे थे कि इसे जिता दिया तो न्यूयार्क को कुछ नहीं दूंगा और अब कह रहे हैं कि सब कुछ दूंगा।

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कह रहे हैं कि मुझे तो पता ही नहीं था कि इनके इतने अच्छे विचार हैं। मुझे तो अब पता चला। अब इनके साथ मिलकर काम करेंगे। अरे अंकलजी, हमारे विचार तो आप पहले से जानते हैं न। फिर हमारे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं कि कभी टैरिफ लगा रहे हैं और कभी हथकड़ियां और बेड़ियां। हमारे यहां ठीक ही कहते हैं लोग कि भलाई का तो जमाना ही नहीं रहा साहब। अब ट्रंप अंकल आपकी तो ममदानी से हो गयी दोस्ती। और मोदीजी और नेतन्याहू जैसे दोस्तों को आपने यूं ही छोड़ दिया। पता है न ममदानी ने क्या धमकियां दी हैं।

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