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मायका नदियों का

ब्लॉग चर्चा

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मायका यानी मां का घर। साधारणतया इसका ताल्लुक इंसानों से खासकर महिलाओं से होता है। वह घर जहां बच्चियां जन्म लेती हैं, बड़ी होती हैं, कार्य-कुशलता प्राप्त करती हैं और फिर समय आने पर विवाहोपरांत अपने ससुराल यानी पति के घर चली जाती हैं। जाहिर है इस घर से यानी मायके से उनका नाता जुड़ा ही रहता है। तीज-त्योहार-उत्सवों के अलावा भी गाहे-बगाहे वे वहां आती-जाती रहती हैं। बच्चों को लेकर जाने की बात हो या फिर किसी खास बुलावे पर। या फिर भाई-बहन के किसी त्योहार को लेकर। महिलाओं का मायका आना-जाना लगा रहता है। आजकल तो कामकाजी युवा भी जो लंबे समय तक बाहर रहते हैं, घर आने पर मायका शब्द का इस्तेमाल करने लगे हैं।

यह तो हुई इंसानी मायके की बात। आइये अब करते हैं जीवनदायिनी नदियों की बात। क्या नदियों का मायका भी होता है? इस सवाल का जवाब है, जी हां। हमारे देश में मध्य प्रदेश एक ऐसी जगह है, जिसे नदियों का मायका कहलवाने का सौभाग्य प्राप्त है। यहां से लगभग 6 बड़ी और करीब 14 मध्यम व छोटी नदियां निकलती हैं। यहां से निकलने वाली प्रमुख नदियां हैं, नर्मदा, चंबल, ताप्ती, सोन, क्षिप्रा, बेतवा, केन, तवा, काली सिंध, कूनो इत्यादि। इन नदियों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व तो है ही इसके साथ ही इनका मध्य प्रदेश के निवासियों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक योगदान भी है। यही कारण है कि इस राज्य को नदियों का मायका कहा जाता है। विडंबना यह है कि महिलाओं का विवाहोपरांत अपने ससुराल में रचने-बसने और उपनाम बदल जाने के बावजूद भी अपने मायके से नाता नहीं टूटता। अपनी जिंदगी भर वे वहां आती-जाती रहती हैं। पर नदियों के साथ ऐसा नहीं है, वे एक बार जो अपने मायके से निकलीं तो दोबारा उधर का रुख नहीं कर पातीं। उनके नसीब में सिर्फ आगे की ओर बहना लिखा होता है, लौटना नहीं। पर वे बहते-बहते भी लाखों-करोड़ों प्राणियों की खुशहाली, जीविका का साधन व धरती माता के जीवन के आधार का निरपेक्ष भाव से वायस बनती चली जाती हैं।

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इस दुनिया में करीब डेढ़ लाख नदियां बहती हैं, जिनमें छोटी-बड़ी मिलाकर तकरीबन दो सौ प्रमुख नदियां हमारे देश में लोगों को जीवन प्रदान करती हैं। मायके से निकलने के बाद जनहित में ये कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखतीं। ऐसी जीवनदायिनी, प्रभु की अमूल्य भेंट के प्रति हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम इनका ख्याल रखें। इनका सम्मान करें। यदि कुछ न भी कर सकें तो कम से कम इन्हें ‘व्यथित’ तो न करें। इन नदियों की पवित्रता का ध्यान रखें।

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साभार : कुछअलगसा डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम

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