Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

स्मरण शक्ति और एकाग्रता भी बढ़ती है नमस्कार से

अंतर्मन

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

भारत के अलावा कई देशों में भी नमस्कार की मुद्रा को अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी माना जाता है। जापानी भाषा में इसे ‘गाशो’ कहा जाता है। भारत समेत कई देशों का यही मानना है कि हाथ जोड़ना केवल एक शारीरिक मुद्रा नहीं, बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक मनोस्थिति को

भी दर्शाता है।

भारतीय दर्शन के अनुसार, हमारे हाथ ऊर्जा के उत्सर्जन केंद्र हैं। जब नमस्कार की मुद्रा में दोनों हाथ जोड़े जाते हैं तो मन को असीम शांति मिलती है। प्रार्थना के लिए दोनों हाथों को जोड़ा जाता है। भारत के अलावा कई देशों में भी नमस्कार की मुद्रा को अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी माना जाता है। जापानी भाषा में इसे ‘गाशो’ कहा जाता है। भारत समेत कई देशों का यही मानना है कि हाथ जोड़ना केवल एक शारीरिक मुद्रा नहीं है, बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक मनोस्थिति को दर्शाता है। जब हम हाथ जोड़ते हैं तो हमारी अंगुलियों के सिरे एक-दूसरे पर दबाव डालते हैं। ये प्रेशर प्वाइंट्स हमारे मस्तिष्क के उन हिस्सों से जुड़े होते हैं जो स्मरण शक्ति और एकाग्रता के लिए जिम्मेदार होते हैं। वहीं जापान में ‘गाशो’ के माध्यम से यह बताया जाता है कि जब दाएं और बाएं हाथ आपस में मिलते हैं, तो ये दो विपरीत चीजों के मिलन के प्रतीक होते हैं जैसे स्वयं और दूसरा, प्रकाश और अंधकार।

इनसे यह पता चलता है कि ब्रह्मांड में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और हम अलग-अलग नहीं हैं। गाशो की मुद्रा में व्यक्ति का मन भटकना बंद कर देता है। मन एक ही स्थान पर केंद्रित हो जाता है। इसलिए अक्सर स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से पहले दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना कराई जाती है। हमारे देश में जब कोई महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ किया जाता है तो पहले दोनों हाथ जोड़कर ईश्वर का स्मरण किया जाता है। ऐसा करने से मस्तिष्क की ऊर्जा एकाग्र हो जाती है और जिस कार्य को किया जाने वाला है, उसे बल मिलता है।

Advertisement

हाथ जोड़ने का सही तरीका यह है कि दोनों हथेलियों को अपने हृदय चक्र के पास सटाकर रखना चाहिए। ऐसा करने से हृदय सकारात्मक होता है। हृदय को यह अहसास होता है कि नकारात्मक बिंदुओं को बाहर निकालना है और सकारात्मक बातों को अपने अंदर रखना है। यही कारण है कि जो लोग विनम्रता में हाथ जोड़कर बातें करते हैं, अथवा किसी विवादास्पद मुद्दे को हाथ जोड़कर खत्म करते हैं तो हाथों की सकारात्मक तरंगें निकलकर परिवेश में घुल जाती हैं। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते। ऐसे में वे प्रार्थना की मुद्रा किस प्रकार बनाएं? इस दर्द को समझा प्रणव वेम्पाती और उनकी टीम ने।

Advertisement

प्रणव वेम्पाती, हर्षा रेड्डी पोंगुलेटी और सुरेन मरुममुला द्वारा वर्ष 2018 में एक स्टार्टअप की स्थापना की गई। वे मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से बेहद प्रभावित थे। इसलिए उन्होंने कलाम से संबंधित कलार्म बनाने की सोची। आज भी देश में अनेक लोग ऐसे हैं जो कृत्रिम अंगों विशेषकर कृत्रिम हाथों को खरीदने में असमर्थ हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने हृदय रोग के लिए प्रसिद्ध और किफायती ‘कलाम स्टेंट’ विकसित किया था। इसी स्टेंट के तर्ज पर प्रणव वेम्पाती ने एक ऐसा कृत्रिम हाथ बनाने का निश्चय किया जो लोगों के लिए सुलभ हो सके और वे लोग जिनके हाथ नहीं हैं, वे उसका प्रयोग कर न केवल अपने दैनिक कार्य कर सकें, अपितु दोनों हाथों के माध्यम से प्रार्थना कर अपने हृदय को भी मजबूत कर सकें। इसके लिए प्रणव को हर्षा और सुरेन जैसे सह-संस्थापक मिले। समान सोच के साथ उन्होंने काम करना शुरू किया।

विकसित देशों में उन्नत कृत्रिम बायोनिक हाथों की कीमत 35 से 60 लाख तक होती है। प्रणव सबसे सस्ता बायोनिक हाथ बनाने में जुट गए। इसके लिए उन्होंने अनेक प्रयोग किए। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने ‘कलार्म’ नामक 3डी-प्रिंटेड हाथ बनाया है। यह 18 तरह की ग्रिप देता है, ईएमजी सेंसर से चलता है और 8 किलो तक का वजन उठा सकता है। इसकी कीमत अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है। ‘कलार्म’ की कीमत चार से छह लाख के बीच है। प्रणव इससे भी कम कीमत का ‘कलार्म’ लांच करने की योजना बना रहे हैं। इस तरह वे लोग जो हाथों से वंचित हैं, कलार्म द्वारा न केवल अपने सभी कामों को करके जीवन को आसान बना सकते हैं, अपितु प्रणाम की मुद्रा में अपने तन-मन को ऊर्जा से भी भर सकते हैं। प्रणव कहते हैं कि, ‘जीवन में कुछ न कुछ ऐसा करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे मन को सुकून प्राप्त हो। मैं जब भी प्रार्थना करके अपने हाथ जोड़ता हूं तो मेरे मन से यही आवाज आती है कि तुम सक्षम हो तो अक्षम व्यक्तियों का सहारा बनो।’

जिन व्यक्तियों के हाथ हैं उन्हें अपने इन हाथों की कीमत को समझना चाहिए और प्रकृति एवं ईश्वर के कृतज्ञ होने के साथ-साथ हाथों से ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे आस-पास के परिवेश को भी सुख और समृद्धि प्राप्त हो। नमस्कार की मुद्रा में जुड़े हाथ खीझे हुए मन को शांत करने का एक सरल उपाय हैं। कहते हैं कि आधे-अधूरे दिल वाला कोई व्यक्ति चैंपियन नहीं बनता। इसलिए अपने हाथों को हृदय चक्र के पास से जोड़ते हुए पूरे दिल के स्वामी बनें और चैंपियन बनकर दूसरों के जीवन में भी मुस्कराहट लेकर आएं।

Advertisement
×