बेहतर पोषण, शारीरिक व्यायाम, मानसिक सक्रियता बनाए रखने, बेहतर सामाजिक संबंधों व परिवार तथा समुदायों में वृद्ध व्यक्तियों को उचित महत्व व सम्मान देने के आधार पर वृद्धावस्था को कहीं अधिक स्वस्थ व संतोषजनक बनाया जा सकता है।
विश्वस्तर पर वृद्धों का जनसंख्या में प्रतिशत बढ़ रहा है और इसके साथ इस बारे में बेहतर विमर्श की जरूरत है कि उनका जीवन स्वस्थ व संतोषजनक कैसे बन सके। वर्ष 1950 में विश्व का कोई व्यक्ति औसतन 46 वर्ष जीता था तो वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 70 वर्ष तक पहुंच गया। जापान, इटली व स्विट्जरलैंड जैसे कुछ देशों में आज औसत आयु ही 80 वर्ष के पार पहंुच चुकी है। वर्ष 2050 के लिए यह अनुमानित है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के विश्व में 210 करोड़ लोग होंगे व विश्व की जनसंख्या में उनका हिस्सा 21 प्रतिशत होगा। ऐसे में जरूरी है कि वृद्धावस्था को स्वस्थ व संतोषजनक बनाने के लिए बेहतर प्रयास किए जाएं। इस सोच से प्रेरित होकर विश्व स्तर पर वर्ष 2021-2030 के दशक को स्वस्थ वृद्धावस्था के दशक के रूप में मनाया जा रहा है।
हालांकि वृद्धावस्था को अधिक रोगों व स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में देखा गया है, पर हाल के समय में इस ओर अधिक महत्व दिया गया है कि समुचित सावधानियां बरत कर, अनुकूल स्थितियां उत्पन्न कर इन रोगों व स्वास्थ्य समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस तरह वृद्धावस्था को अधिक संतोषजनक व रचनात्मक बनाया जा सकता है। जहां रोग का इलाज जरूरी है वहां यह और भी महत्वपूर्ण है कि नीतिगत व व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर कदम उठाकर इन रोगों की संभावना को ही अपेक्षाकृत कहीं कम किया जा सकता है। जहां दुर्घटना होने पर चोट के इलाज की व्यवस्था जरूरी है, वहां यह भी सच है कि कुछ सावधानियां अपना कर चोट लगने की संभावना को ही काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यदि भारत की स्थिति देखें तो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 10.3 करोड़ थी व उसका भारत की इस समय की जनसंख्या में 8.6 प्रतिशत का हिस्सा था। वर्ष 2050 के लिए सरकारी स्तर पर अनुमान है कि तब तक 60 वर्ष से अधिक की आयु की जनसंख्या बढ़कर 31.9 करोड़ तक पहंुच जाएगी। यह उस समय की भारतीय जनसंख्या का 19.5 प्रतिशत होगा।
अब यदि हम अधिक वृद्ध व्यक्तियों यानी 75 वर्ष की आयु से अधिक के व्यक्तियों की बात करें तो वर्ष 2011 और वर्ष 2050 के बीच इनकी संभावित वृद्धि की दर और भी अधिक है। सरकारी स्तर का अनुमान है कि इस दौर में कुल जनसंख्या में इनके हिस्से में 340 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
इन स्थितियों को देखते हुए यह विमर्श और जरूरी हो जाता है कि उपलब्ध बजट व अन्य सीमाओं के बीच वृद्धावस्था को अधिक स्वस्थ व संतोषजनक कैसे बनाया जाए। निश्चय ही सभी वृद्ध लोगों तक समुचित पेंशन पहंुचाना बहुत जरूरी है। इसके साथ उनके स्वस्थ जीवन के लिए अनेक अन्य कदम उठाना भी आवश्यक है।
जहां बीमारियों का इलाज व इसकी व्यवस्था आवश्यक है, वहां इससे भी अधिक जरूरी व लाभदायक है कि ऐसी नीतियों व कार्यक्रमों को अपनाया जाए जिनके आधार पर इन बीमारियों की संभावना को अपेक्षाकृत कहीं कम किया जा सके। बेहतर पोषण, शारीरिक व्यायाम, मानसिक सक्रियता बनाए रखने, बेहतर सामाजिक संबंधों व परिवार तथा समुदायों में वृद्ध व्यक्तियों को उचित महत्व व सम्मान देने के आधार पर वृद्धावस्था को कहीं अधिक स्वस्थ व संतोषजनक बनाया जा सकता है।
दक्षिण राजस्थान में ‘प्रबल यात्रा’ कार्यक्रम को इसी सोच के आधार पर तैयार किया गया है व इसे अर्थ संस्था द्वारा लगभग 100 गांवों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत आने वाले गांवों में वृद्ध नागरिकों को प्रबल यात्रा मंच के सदस्य के रूप में एक मंच पर लाया जाता है व वे हर महीने अपने गांव की एक सामूहिक मीटिंग में मिलते हैं व अपने विभिन्न सरोकारों, मुद्दों, समस्याओं व जीवन के अनुभवों की चर्चा करते हैं। इस आधार पर वे आगे भी ऐसी अगली मीटिंग होने तक, आपस में बेहतर विमर्श कर सकते हैं।
ऐसी सामूहिक वार्ता में ऐसे पोषण सुधार की चर्चा होती है जो मौजूदा स्थितियों में वृद्ध लोगों के लिए संभव है। यदि दांत कमजोर होने के कारण कोई कोमल रूप में उपलब्ध खाद्य की जानकारी है, तो उसे एक-दूसरे से बांटा जा सकता है। प्रबल यात्रा कार्यक्रम ने सब्जियों के अधिक उपयोग व घर के पास सब्जी उगाने के लिए सहायता देने को महत्व दिया है।
इस वार्ता में ऐसे साधारण व्यायाम के बारे में चर्चा व अभ्यास भी होता है, जो वृद्ध व्यक्ति आसानी से अपना सकते हैं। परस्पर मिल कर वृद्ध व्यक्ति ऐसे कुछ खेल भी खेलते हैं जिनसे मानसिक सक्रियता बनी रहे या इसमें सुधार हो। विभिन्न परिवारों के सहयोग से उनके घर व आसपास के क्षेत्र का ऐसा आकलन किया जाता है जिससे वृद्ध या अन्य व्यक्तियों के गिरने या दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना को कम किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत जरूरतमंद वृद्ध गांववासियों को चश्मा प्राप्त करने, मोतियाबिंद का आप्रेशन करवाने में मदद की जाती है व चलने में सहायता के लिए छड़ी व वॉकर भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं। वृद्ध व्यक्तियों को अस्पताल में जरूरी इलाज करवाने के लिए समुचित सहायता दी जाती है।
अनेक वृद्ध व्यक्तियों को नियमित पेंशन व राशन मिल रहे हैं पर यदि किसी को यह सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाई होती है तो इस कार्यक्रम की ओर से उसे सहायता दी जाती है। अन्य सरकारी कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त करने में भी सहायता की जाती है। इस तरह वृद्ध व्यक्तियों के कई तनाव कम हो जाते हैं व उन्हें यह आश्वासन रहता है कि जरूरत पड़ने पर यहां से सहायता मिल सकती है।

