अब चांदी का हाल यह है कि वह गहना नहीं, खबर बन गई है। सुबह अखबार में चांदी शाम को टीवी डिबेट में चांदी। आम आदमी सोचता है कि पहनने को मिलती तो बात थी, यहां तो सिर्फ सुनने को मिल रही है।
बॉबी फिल्म का गाना ‘ना मांगूं सोना चांदी ना चाहूंू हीरा मोती ये मेरे किस काम के’ अपने समय का हिट सांग है। तब सोने-चांदी पर किसी का ध्यान नहीं था। अब तो सब सुबह उठते ही सोने-चांदी के भाव पर नजर डालते हैं। मुकेश के गाये एक गाने ने भी खूब धूम मचाई थी—‘चांदी की दीवार ना तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया।’ चांदी हमेशा से ही हमारे संबंधों में आड़े आती रही है।
ज्ञानप्रकाश का एक शे’र है—चांदी सोना एक तरफ, तेरा होना एक तरफ। एक तरफ तेरी आंखें, जादू टोना एक तरफ। पर आज का प्रेमी अपनी प्रेयसी की तरफ खड़ा होने की बजाय चांदी की तरफ रुख करता दिखाई देगा। पहले चांदी घर की थी या सुनार की। अब चांदी का हाल यह है कि वह गहना नहीं, खबर बन गई है। सुबह अखबार में चांदी शाम को टीवी डिबेट में चांदी। आम आदमी सोचता है कि पहनने को मिलती तो बात थी, यहां तो सिर्फ सुनने को मिल रही है।
जो चांदी कभी ‘गरीब का गहना’ कहलाती थी, कभी शादी-ब्याह में थाली बनकर इज्जत बढ़ाती थी, बच्चे के गले में ताबीज़ बनकर भरोसा देती थी और बहू की पायल बन छन-छन कर घर की रौनक कहलाती थी, आज वही चांदी ऐसी उछली है कि जैसे सूखे तालाब में अचानक मगरमच्छ नाचने लग जाये। कल तक जो गरीब की कलाई पकड़े हुए थी, आज बाजार की छाती पर चढ़ बैठी। चांदी ने गरीब से ऐसा मुंह मोड़ा है जैसे चुनाव जीतने के बाद नेता जी जनता की तरफ पीठ कर लेते हैं। है तो यह आज भी गरीबों के गहनों की पर इसके भाव अमीरों वाले हो गये हैं।
चांदी थोड़ी-बहुत गिरी भी है। अख़बारों ने हेडलाइन लगाई- चांदी लुढ़की। मगर गरीब ने जब दाम पूछे तो समझ आया कि यह गिरावट भी अमीरों के लिए थी। गरीब के लिए तो चांदी आज भी वही दूरी बनाए खड़ी है जैसे स्टेशन की टिकट विंडो पर आकर भी टिकट न मिले।
एक ज़माना था जब चांदी पहनना सादगी की पहचान थी। अब चांदी पहनना भी साहस का काम हो गया है। चांदी की चाल देख लो तो मुंह से निकलता है कि अब यह पायल नहीं, पावर दिखाती है। एक मनचले का कहना है कि चांदी तो छत पे चढ़ गई, हम नीचे खाट पे ही रह गये।
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एक बर की बात है अक चालते मुकदमे म्हं सुरजा वकील बोल्या अक तेरे घरआले के आखरी बोल के थे? लुगाई बोल्ली- वो कहवै था मेरा चश्मा कित धर्या है भतेरी? वकील बोल्या- फेर इसमैं खून करण की के बात थी? लुगाई बोल्ली- मेरा नाम रामप्यारी है।

