कुल सार यह है कि पहले लोग अपनी बरकत छिपाते थे, फिर अपनी हैसियत छिपाने लगे और अब अपनी हकीकत छिपा रहे हैं।
एक वह दौर था जब घर की दादी-नानी अपनी सबसे कीमती पूंजी—सोने की चेन-झुमके और चांदी के सिक्के आदि चावल के डिब्बे या जमीन के नीचे गाड़कर रखती थीं। या फिर भारी-भरकम तिजोरी और तिजोरी के भीतर डिब्बा, डिब्बे के भीतर पोटली, पोटली के भीतर कोई पुराना कागज़ और कागज के भीतर गहने। उस समय सिक्योरिटी इंचार्ज घर की सबसे वरिष्ठ महिला हुआ करती क्योंकि उसकी साड़ी के पल्लू में तिजोरी व अलमारी की चाबी बंधी रहती थी। चोर अगर घर में घुस भी जाए तो आधा दिन तो उसे यही समझने में लग जाए कि असली माल है कहां।
फिर आया सैलरी का युग। कितना कमा लेते हो—वाक्य सबसे बड़ा हमला लगता था। मिडल क्लास में गहनों की जगह सैलरी ने ले ली। ऑफिस के गलियारों से लेकर मोहल्ले की नुक्कड़ तक सैलरी एक ऐसा रहस्य बन गई जिसे छिपाना धर्म बन गया। दामाद की सैलरी और बहू की उम्र पूछना आज भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जाता है। यहां ताले अलमारियों पर नहीं, बल्कि पे-स्लिप और बैंक पासबुक पर लगने लगे।
अब हम जी रहे हैं गैलरी युग में और पासवर्ड ही नया पहरेदार है। अब न गहनों की चिंता है क्योंकि वो बैंक लॉकर में हैं, न सैलरी की क्योंकि वो आते ही ईएमआई में कट जाती है। आज के दौर का सबसे बड़ा डर है- भाई! जरा अपना फोन देना, एक कॉल करनी है। जैसे ही फोन किसी और के हाथ में जाता है तो दिल की धड़कनें ‘बुलेट ट्रेन की रफ्तार पकड़ लेती हैं। आज की गैलरी सिर्फ तस्वीरों का संग्रह नहीं, बल्कि यह इंसान का कच्चा चिट्ठा है। न जाने इसमें क्या-क्या कैद है। वो सेल्फीज़, जिन्हें देखकर खुद को भी शर्म आ जाए। वो मीम्स जो अगर घरवाले देख लें तो जायदाद से बेदखल कर दें। अब हमारे मोबाइल के अंदर पूरा एपस्टिन फाइल स्तर का खजाना है! अब गहनों से ज्यादा कीमती यादें हैं और सैलरी से ज्यादा महत्वपूर्ण स्क्रीनशॉट। आजकल इंसान का असली चरित्र आधार कार्ड में नहीं? फोन की गैलरी में मिलता है।
कुल सार यह है कि पहले लोग अपनी बरकत छिपाते थे, फिर अपनी हैसियत छिपाने लगे और अब अपनी हकीकत छिपा रहे हैं।
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एक बर की बात है अक जीन्स कुरती म्ह रामप्यारी तै देखकै सुरजा ताऊ बोल्या- आ ए बेट्टी! तै नत्थू की बहु सै के? रामप्यारी बोल्ली- आपको बोलने की तमीज नहीं है? ताऊ हक्का-बक्का सा बोल्या- और बेट्टी क्युकर बोल्लूं? जवाब मिल्या- आप नत्थू की वाइफ बोलिये। ताऊ छोह म्ह बोल्या- फेर के बेट्टी उसकी बुआ बण ज्यागी, रवैगी तो बहु ए।

