कोविड के बाद नये कौशल की अहमियत

कोविड के बाद नये कौशल की अहमियत

जयंतीलाल भंडारी

जयंतीलाल भंडारी

यकीनन कोविड-19 के कारण जैसे-जैसे दुनिया में डिजिटलीकरण बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे दुनिया का रोजगार परिदृश्य भी बदलता जा रहा है। अब रोजगार और करिअर डिग्रियों से नहीं, काम के लिए जरूरी कौशल यानी स्किल्स के आधार पर मिलेगा। ऐसे में देश की नयी पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक करियर के मौके जुटाने के लिए सरकार को डिजिटलीकरण के रास्ते में दिखाई दे रही कमियों को दूर करना होगा, वहीं दूसरी ओर नयी पीढ़ी द्वारा करियर में आगे बढ़ने और रोजगार में आने के बाद भी काम करते हुए लगातार बदलती हुई रोजगार की दुनिया के अनुरूप नये स्किल्स सीखने होंगे।

दुनिया के कई शोध संगठनों द्वारा यह कहा जा रहा है कि डिजिटलीकरण से भारत में रोजगार के नये मौके तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और भारत की नयी पीढ़ी नये-नये स्किल्स को सीखने की डगर पर लगातार आगे बढ़ रही है। इसमें कोई दो मत नहीं कि दुनियाभर में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते जहां कई क्षेत्रों में रोज़गार कम हो रहे हैं वहीं डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार बढ़ रहे हैं। निश्चित रूप से डिजिटल अर्थव्यवस्था के तहत भारतीय प्रतिभाओं के लिए मौके देश ही नहीं, दुनिया के कोने-कोने में भी होंगे। कुछ समय पहले विश्व बैंक सहित कुछ संगठनों ने अपनी वैश्विक रोजगार से संबंधित रिपोर्टों में कहा है कि आगामी 5-10 वर्षों में जहां दुनिया में कुशल श्रम बल का संकट होगा, वहीं भारत के पास नयी स्किल्स से सुसज्जित कुशल श्रम बल अतिरिक्त संख्या में होगा। ऐसे में भारत दुनिया के कई विकसित और कई विकासशील देशों में बड़ी सख्या में कुशल श्रम बल भेजकर फायदा उठा सकेगा।

नि:संदेह डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच देश की नयी पीढ़ी के लिए रोजगार की जो संभावनाएं आगे बढ़ी हैं, उन्हें मुट्ठी में करने के लिए वर्तमान अनुकूलताओं के साथ-साथ कई और बातों पर भी ध्यान देना होगा। हमें अच्छी ऑनलाइन एजुकेशन की डगर पर आगे बढ़ना होगा। यहां नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) की अध्यक्ष देवयानी घोष द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं के रोजगार मौकों पर हाल ही में दी गई टिप्पणी का उल्लेख करना उपयुक्त होगा। देवयानी ने कहा है कि इस समय प्रतिभा के संदर्भ में भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से लाभ की स्थिति में हैं। लेकिन कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में मौजूदा आईटी प्रतिभाओं को उभरती तकनीकों के कौशल से फिर से लैस करने और दुनिया में खुद को खड़ा करने के लिए नवाचार पर जोर देना होगा।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि अभी सीमित संख्या में ही भारत की कौशल प्रशिक्षित प्रतिभाएं डिजिटल अर्थव्यवस्था की रोजगार जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। अब दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी वाले भारत को बड़ी संख्या में युवाओं को डिजिटल दौर की और नयी तकनीकी रोजगार योग्यताओं से सुसज्जित करना होगा। डिजिटल दुनिया में करियर बनाने के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था की विशेषज्ञता के साथ अच्छी अंग्रेजी, कम्प्यूटर दक्षता, कम्युनिकेशन स्किल्स लाभप्रद है। नि:संदेह स्टूडेंट्स को डिजिटल दुनिया के करियर की नयी सच्चाइयों को समझते हुए अपनी पढ़ाई की रणनीति बनानी होगी। इसके साथ-साथ पेरेन्टस और स्कूल-कॉलेजों के द्वारा भी नयी पीढ़ी में लगातार नये स्किल्स को सीखने के प्रति ललक पैदा की जानी होगी। स्थिति यह है कि भविष्य में एक ओर कई रोजगार ऐसे भी होंगे, जिनके नाम हमने अब तक सुने भी नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर रोजगार के लिए सीखे गए स्किल्स पुराने होने लगेंगे और अच्छा करियर बनाए रखने के लिए लगातार नये स्किल्स सीखते रहना जरूरी होगा।

यद्यपि देश में सरकार ने डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीतिगत स्तर पर कई सराहनीय कदम उठाए हैं और इससे डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिला भी है लेकिन कोविड-19 के बाद अभी इस दिशा में बहुआयामी प्रयासों की जरूरत बनी हुई है। हमें डिजिटलीकरण के लिये आवश्यक बुनियादी जरूरतों संबंधी कमियों को दूर करना होगा। चूंकि देश की ग्रामीण आबादी का एक बड़ा भाग अभी भी डिजिटल रूप से अशिक्षित है। अतएव डिजिटल भाषा से ग्रामीणों को सरलतापूर्वक शिक्षित-प्रशिक्षित करना होगा। चूंकि बिजली डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत है, अतएव ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त पहुंच बनानी जरूरी है।

इसके साथ-साथ डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में देश को आगे बढ़ाया जाना होगा। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड टेस्ट करने वाली वैश्विक कंपनी ओकला के मुताबिक अप्रैल 2020 में मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में 139 देशों की सूची में भारत 132वें पायदान पर है। ओकला के मुताबिक अप्रैल 2020 में भारत की औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 9.81 एमबीपीएस (मेगा बिट्स पर सेकंड-इंटरनेट डाटा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टर्म) रही, वहीं इसकी औसत अपलोड स्पीड 3.98 एमबीपीएस रही। मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में दक्षिण कोरिया, कतर, चीन, यूएई, नीदरलैंड, नार्वे बहुत आगे हैं। इतना ही नहीं, स्पीड के मामले में भारत को पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों ने भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौकों का फायदा लेने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड को बढ़ाने के अधिकतम प्रयास करने होंगे।

हम उम्मीद करें कि हाल ही में एक ओर देश में डिजिटलीकरण को बढ़ाने तथा दूसरी ओर नयी शिक्षा नीति में जिस तरह डिजिटल दुनिया के नये दौर के कौशल विकास पर काफी जोर दिया गया है, उसके प्रभावी क्रियान्वयन से देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। उम्मीद है कि देश की नयी पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था के पीछे छिपे हुए अवसरों को तलाशेगी और देश एवं दुनिया की नयी जरूरतों के मुताबिक अपने को सुसज्जित करेगी। हम उम्मीद करें कि नयी पीढ़ी स्कूल और कॉलेजों में करियर और रोजगार के लिए उपयुक्त स्किल्स को सीखने के साथ-साथ भविष्य में नये स्किल्स को सीखने के लिए भी हमेशा तैयार रहेगी।

लेखक ख्यात अर्थशास्त्री हैं।

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