टीकाकरण से बढ़ेगा अर्थव्यवस्था का भरोसा

टीकाकरण से बढ़ेगा अर्थव्यवस्था का भरोसा

जयंतीलाल भंडारी

जयंतीलाल भंडारी

यकीनन 16 जनवरी से देशभर में कोरोना वायरस से बचाव के लिए शुरू हो रहा टीकाकरण अभियान देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हाल ही में 11 जनवरी को भारत ने कोविड-19 टीके की आपूर्ति के लिए खरीद करार पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम के लिए दो कंपनियों—सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा भारत बायोटेक के साथ सरकार ने टीके की आपूर्ति का करार सुनिश्चित किया है। भारत ने प्रारंभिक दौर में करीब 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है। इनमें प्रमुख रूप से देशभर के स्वास्थ्यकर्मी शामिल होंगे। सरकार ने जुलाई, 2021 तक करीब 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने की योजना बनाई है, जिसके लिए करीब 60 करोड़ खुराक की आवश्यकता होगी।

गौरतलब है कि 11 जनवरी को घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की मुश्किलें कम होने लगी हैं। नये वर्ष 2021 में अर्थव्यवस्था के बढ़ने का परिदृश्य दिखाई दे रहा है। कोरोना के टीकाकरण की शुरुआत होने से भी अर्थव्यवस्था लाभान्वित होगी। ऐसे में आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 10.1 फीसदी की दर से बढ़ सकता है।

सरकार ने बीते हुए वर्ष में आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से कोविड-19 से निर्मित चुनौतियों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया, उससे ढहती हुई अर्थव्यवस्था को बचाया जा सका है। ज्ञातव्य है कि कोविड-19 के संकट से चरमराती देश की अर्थव्यवस्था के लिए आत्मनिर्भर अभियान के तहत वर्ष 2020 में जिस तरह मार्च से नवंबर, 2020 के बीच सरकार ने एक के बाद एक 29.87 लाख करोड़ की राहतों के ऐलान किए हैं, उनसे वर्ष 2020 में अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। इन राहतों के तहत आत्मनिर्भर भारत अभियान-एक के तहत 11,02,650 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 1,92,800 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 82911 करोड़ रुपये; आत्मनिर्भर भारत अभियान- दो के तहत 73,000 करोड़ रुपये, आरबीआई के उपायों से राहत के तहत 12,71,200 करोड़ रुपये तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान-तीन के तहत 2.65 लाख करोड़ की राहत शामिल है।

दरअसल, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत तीसरे आर्थिक पैकेज में दी गई दो तरह की राहतें अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण रही हैं। इनमें एक, 10 उद्योग क्षेत्रों के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपये की उत्पादन सम्बद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) स्कीम और दो, अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए रोजगार सृजन, ऋण गारंटी समर्थन, स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास, रियल एस्टेट कंपनियों को कर राहत, ढांचागत क्षेत्र में पूंजी निवेश की सरलता, किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी, ग्रामीण विकास तथा निर्यात सेक्टर को राहत देने के 1.19 लाख करोड़ रुपये के लिए लाभपूर्ण प्रावधान किए गए।

नि:संदेह सरकार द्वारा वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दी गई इन विभिन्न राहतों से तेजी से गिरती हुई अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। यद्यपि वर्ष 2020 में देश महामारी से नहीं उबरा, लेकिन अर्थव्यवस्था ने तेजी हासिल करने की क्षमता दिखाई। कोरोनाकाल में सरकार को उन श्रम, कृषि, कारोबार तथा अन्य सुधारों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला, जो दशकों से लंबित थे। यदि हम दिसंबर, 2020 तक के विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के आंकड़ों का मूल्यांकन करें तो पाते हैं कि लॉकडाउन की चुनौतियों के बाद दिसंबर, 2020 तक देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर, बिजली सेक्टर, रेलवे माल ढुलाई सेक्टर में सुधार हुआ। इतना ही नहीं, दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं, सूचना प्रौद्योगिकी, वाहन कलपुर्जा, फार्मा सेक्टर इस्पात और सीमेंट आदि क्षेत्रों का प्रदर्शन आशा से भी बेहतर दिखा। आईटी क्षेत्र की विभिन्न बड़ी कंपनियों की ओर से भी आशावादी अनुमान जारी हुए। सेवा कर (जीएसटी) संग्रह दिसंबर, 2020 में ऊंचाई पर दिखाई दिया। इसी तरह दिसंबर, 2020 में बीएसई सेसेंक्स और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी ऊंचाई पर पहुंच गया।

इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि वर्ष 2020 में जीडीपी में गिरावट की खाई को पाटने में विनिर्माण क्षेत्र ने बड़ा सहारा दिया। पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 39.3 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि दूसरी तिमाही में इसमें 0.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कृषि एवं सहायक गतिविधियों की विकास दर दूसरी तिमाही के दौरान आशाजनक रही। खासतौर से खरीफ उत्पादन से संबंधित सितंबर, 2020 में जारी हुए अनुमान के मुताबिक वर्ष 2020-21 में कृषि उत्पादन बढ़ते हुए दिखाई दिया। वर्ष 2020-21 में खाद्यान्न उत्पादन 14.45 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर छूने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष 2019-20 के उत्पादन से 0.80 फीसदी अधिक है। दलहन उत्पादन करीब 93.1 लाख टन अनुमानित है, जो कि 2019-20 की तुलना में करीब 21 फीसदी अधिक है। इसी तरह तिलहन का उत्पादन 2.57 करोड़ टन अनुमानित है, जो कि 2019-20 की तुलना में 15.28 फीसदी अधिक है।

निश्चित रूप से भारत ने वर्ष 2020 में कोविड-19 की आर्थिक चुनौतियों का सफल मुकाबला किया और इसके अनुकूल परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में 7 जनवरी को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 की पूरी अवधि के लिए आर्थिक विकास दर के जो अनुमान जारी किए हैं, उनके अनुसार चालू वित्त वर्ष में विकास दर की गिरावट 7.7 फीसदी पर सिमटने की बात कही गई है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। एशियन डेवलपमेंट बैंक सहित विभिन्न वैश्विक संगठनों के मुताबिक कोविड-19 से जंग में भारत के रणनीतिक प्रयासों से कोविड-19 का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अन्य देशों की तुलना में कम प्रभाव पड़ा। सरकार द्वारा घोषित किए गए 29 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आत्मनिर्भर भारत अभियान और 41 करोड़ से अधिक गरीबों और किसानों के जनधन खातों तक सीधी राहत पहुंचाने से कोविड-19 के आर्थिक दुष्प्रभावों से बहुत हद तक बचा जा सका।

नि:संदेह कोरोना महामारी के बीच भारत ने आपदा को अवसर में भी बदला है। ऐसे में वर्ष 2020 के अंतिम छोर पर कोविड-19 की आर्थिक महात्रासदी से बाहर निकलकर विकास की डगर पर आगे बढ़ने का परिदृश्य दिखाई दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि वर्ष 2020-21 में कोविड-19 के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट आएगी, लेकिन भारत ने कोरोना संकट से निपटने के लिए जिस तेजी से सुधार के कदम उठाए हैं, उससे आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत 8.8 फीसदी की विकास दर हासिल करने की संभावनाओं को मुट्ठियों में लेते हुए दुनिया की सर्वाधिक विकास दर वाला देश दिखाई दे सकता है।

उम्मीद है कि नये वर्ष 2021 में सरकार देशभर में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण का सफल अभियान संचालित करेगी। उम्मीद है कि सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित किए गए विभिन्न आर्थिक पैकेजों के क्रियान्वयन पर पूरा ध्यान देगी और आर्थिक विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। इससे एक ओर जहां नये वर्ष 2021 में कोविड-19 की आर्थिक त्रासदियों को बहुत कुछ कम किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था को गतिशील किया जा सकेगा।

लेखक ख्यात अर्थशास्त्री हैं।

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