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आई सर्दी लाई खांसी और घर के वैद्य

तिरछी नज़र

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मुझे खांसी शुरू हुई तो मेरे घरवालों को पता चल गया कि सर्दी का मौसम आ गया है। वे मौसम बदलने की सूचना के लिए मौसम विभाग के बुलेटिन का इंतजार नहीं करते, मेरी नाक बहने, मुझे खांसी लगने का इंतजार करते हैं।

अबके भी वही हुआ, जो हर सर्दी आने पर मेरे साथ होता है। सर्दी आते ही मेरी नाक बहने लगी, मुझे खांसी शुरू हुई तो मेरे घरवालों को पता चल गया कि सर्दी का मौसम आ गया है। वे मौसम बदलने की सूचना के लिए मौसम विभाग के बुलेटिन का इंतजार नहीं करते, मेरी नाक बहने, मुझे खांसी लगने का इंतजार करते हैं। इधर मुझे जुकाम, खांसी हुई तो मेरे घर के वैद्य मेरे आसपास एकाएक वैसे ही सक्रिय हो उठे जैसे वसंत आने पर गली-मोहल्लों के मनचले एकाएक सक्रिय हो उठते हैं। धन्य हैं वे परिवार, जिनके पास एमएमबीएस, एमडी डिग्रीधारियों से भी बड़े अपने अपने नुस्खेधारी, तुजुर्बेकार घर के वैद्य उनके आजू-बाजू मंडराते रहते हैं, हर बीमारी के अपने एक से एक चूक नुस्खे लिए।

इधर ज्यों ही मुझे सर्दी के मौसम की पहली छींक आई, मेरे घरवालों ने अपने-अपने अस्पताल के कपाट खोल दिए। मेरे घर के सदस्य चार हैं तो वैद्य पांच। इनके अतिरिक्त मोहल्ला तो घरेलू वैद्यों से खचाखच भरा है, पर कायदे बेकायदे से पति पर पहला हक बीवी का होता है, इसलिए वह अपने पति की हर बीमारी का इलाज खुद करना चाहती है। सो, वह मेरी छींक का असफल इलाज अपने एक से एक चूक नुस्खों से करने लगी।

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उसके पास सब पत्नियों की तरह अपने पति की हर बीमारी ठीक करने के यूनानी से लेकर मुल्तानी होते हुए रोमानी पद्धति तक के मौलिक नुस्खे सहज उपलब्ध हैं। एलोपैथी से लेकर बेलोपैथी तक। आयुर्वेद तो उसके आगे पानी भरता है। उसका हर नुस्खा हर पैथी को शर्म से पानी-पानी करता है। उसके आगे हाथ जोड़े उसकी जय-जयकार करता है।

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मुझे छींके लगने पर पता नहीं मेरी बीवी को क्यों लगा कि जो मुझे ये छीकें आ रही हैं, इसकी वजह सर्दी नहीं, मेरे बाल सफेद हो जाने के बावजूद कोई जवानी के दिनों की अनामिका मुझे याद कर रही है। सच्ची कहीं की। पर विवाहित दिनों का कड़वा सच यह है कि अब मैं खुद भी अपने को याद नहीं करता।

हे सर्दियों में भी स्वस्थ रह अपनी बीवी के नुस्खों से जैसे-कैसे बचे रहने वालो भाग्यशालियो! मुझे तो खैर याद नहीं, पर अब वह भी नहीं जानती कि मुझे मेरी खांसी से छुटकारा दिलाने को हफ्ते भर में वह क्या-क्या मुझे खिला-पिला चुकी है। पर ये मुझे ही पता है कि जैसे-जैसे वह मेरी खांसी का इलाज कर रही है, मुझे जुकाम भी होने लगा है। पर वह मानने वाली नहीं। जो मान जाए, वह डॉक्टर ही कैसा?

हालांकि, मुझे पता है हर बार की तरह इस सर्दी में भी वह मेरी खांसी को बिगाड़ कर ही दम लेगी। पिछली दफा भी उसके हाथों चढ़ मेरी खांसी बिगड़ कर पता नहीं कैसे टीबी होने से बची थी।

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