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हिंदी क्लास इन इंग्लिश मीडियम

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अरुण अर्णव खरे

अरुण अर्णव खरे

मैं अचंभित कम सदमे में ज्यादा हूं जब से मैंने अपने छह वर्षीय पोते के साथ पहली कक्षा की ऑनलाइन हिंदी क्लास अटैंड की है। क्लास माइक्रोसॉफ्ट मीट पर आयोजित होनी थी। निर्धारित समय पर लैपटॉप स्क्रीन पर अवतरित होते हुए मैम बोली—‘गुड मार्निंग चिल्ड्रेन, आई एम सिंदूरा आचार्य, योर हिंदी क्लास टीचर।’

बच्चों ने अपने-अपने आडियो अनम्यूट करते हुए समवेत स्वर में ‘गुडमॉर्निंग टीचर’ का राग अलापा। सिंदूरा मैम बोली—‘प्लीज म्यूट योर डिवाइसेस, आई विल फ़र्स्ट टेक योर अटेंडेंस एंड देन शो ए स्लाइड ऑफ नेटीकेट्स, सो प्लीज वाच केयरफुली।’

मैम जब तक अटेंडेंस लेती रहीं, मैं नेटीकेट्स शब्द में उलझा रहा। इस शब्द से मेरा पहली बार वास्ता पड़ा था। मुझे इसके शाब्दिक अर्थ का कयास लगाने में ही पसीना आ गया।

‘ओके चिल्ड्रेन, टुडे वी विल लर्न हाऊ तो राइट स्माल अ एंड बिग आ’—मैम बोली—‘बच्चो मैं आपकी हिंदी टीचर हूं तो कभी-कभी हिंदी में भी बात करूंगी।’

‘ओके मैम’—कुछ बच्चे माइक अनम्यूट करके बोले।

‘थैंक्स गॉड, हिंदी की कक्षा में हिंदी सुनने को तो मिली।’ मैं मन ही मन बुदबुदाया |

‘आई एम शेयरिंग माई स्क्रीन, यू केन सी हिंदी लेटर स्माल अ हेयर’—सिंदूरा मैम ने स्क्रीन शेयर की, जिसमें अ के साथ अनार का चित्र बना था। उन्होंने आगे कहा—‘अनघा अनम्यूट योरसेल्फ और बताओ अ से कौन-सा फल होता है।’ ‘पॉमग्रेनेट मैम’ —अनघा की आवाज सुनाई दी। ‘वेरी गुड अनघा, नाऊ कीर्तिप्रिया यू टेल द नेम इन हिंदी।’

कुछ पलों का सन्नाटा रहा। कीर्तिप्रिया कोई जवाब नहीं दे सकी। इसके बाद सिंदूरा मैम बोली— ‘नाऊ इट्स ओपन फ़ार आल, केन एनीबडी टेल।’

मैंने अपने पोते की ओर देखते हुए धीरे से कहा-अनार। वह सिंदूरा मैम को जवाब देने के स्थान पर मेरी ओर इस तरह देखने लगा जैसे मैंने उसकी बेइज्जती कर दी हो। अंतत: हार कर सिंदूरा मैम ही बोली, ‘चिल्ड्रेन लिसन केयरफुली, पॉमग्रेनेट इज काल्ड अनार इन हिंदी, रिमेम्बर स्माल अ फार अनार, प्लीज रिपीट विथ मी।’

‘नाऊ वी विल लर्न टू राइट बिग आ, फर्स्ट यू राइट स्माल अ एंड देन ड्रा ए स्टैण्डिंग लाइन आफ्टर इट लाइक दिस।’ —सिंदूरा मैम ने राइटिंग बोर्ड पर लिखते हुए कहा, ‘हेव यू डन।’

‘यस मैम।’

मेरा पोता बड़ा आ, नहीं नहीं सॉरी... बिग आ लिखने में व्यस्त था। मैंने अपने बेटे को आवाज दी—‘तुम्हीं इसके साथ बैठ कर पढ़ाई कराओ, मुझे नहीं लगता कि मैं पहली कक्षा में भी पढ़ने के योग्य हूं।’

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