तिरछी नज़र

झूठों का बड़ा सरदार निकला

झूठों का बड़ा सरदार निकला

सहीराम

जी नहीं, यह दोष कोई प्रेमिका अपने प्रेमी पर नहीं लगा रही। यह प्रेमी-प्रेमिका के बीच की छेड़छाड़ का मामला नहीं है। बेचारे प्रेमियों पर झूठा होने का दोष हमेशा ही लगता रहा है। अब तो लव-जिहाद वाले भी उन पर यही आरोप लगा रहे हैं कि वे झूठ बोलकर लड़कियों को फंसाते हैं। वैसे यार जब युद्ध और प्यार में सब कुछ जायज मान ही लिया गया तो फिर झूठ बोलने को दोष कैसे माना जा सकता है। इश्क में थोड़ा-बहुत झूठ-सच तो चलता ही है, हालांकि प्रेमिकाएं जब यह आरोप लगाती हैं तो लाड़ में ही लगाती हैं।

पर जब बात उनकी है ही नहीं, तो फिर बात क्या करनी। बात तो ट्रंप साहब की हो रही है, जिनके बारे में पता चला है कि उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान करीब बीस-बाइस हजार झूठ बोले। अर्थात इतने झूठ बोले कि उन्हें झूठों का सरदार होने की उपाधि आसानी से मिल सकती है। वैसे तो अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाना ही दुनिया का सरदार होना हो जाता है। हालांकि दुनिया वाले चिढ़ में उन्हें विश्व दारोगा कहना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा दारोगा जो डंडा लेकर निकलता है और उसे फटकारता हुआ, गाली-गलौच करता हुआ, हेकड़ी दिखाता हुआ, आंखें दिखाता हुआ शाम को घर लौटता है तो नशे में खाने की थाली ही उठाकर फेंक देता है।

वैसे अमेरिका हर मामले में नंबर वन है। और कुछ नहीं तो कोरोना में भी नंबर वन चल रहा है। यह कुछ-कुछ ऐसा ही मामला है कि बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा। खैर, अभी तो मामला झूठ का है और झूठ बोलने में ट्रंप साहब ने साबित किया कि उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता। ऐसा नहीं है कि दुनिया के सारे नेता सच बोलते हैं। महात्मा गांधी को छोड़ दिया जाए तो दुनिया में सौ फीसद सच्चा नेता कौन है, बताइए। तो झूठ तो सब नेता बोलते हैं। हमारे वाले भी बोलते हैं। लेकिन अगर जेल जाने का डर हो तो इस बात को यूं भी कह सकते हैं कि वे सदा सच बोलते हैं। नेता तो वादे भी झूठे करते हैं। फिर भी ट्रंप का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। बीस-बाइस हजार झूठ बोलना कोई मामूली बात है क्या?

पता चला कि एक दिन में वे कम से कम बीस झूठ तो अवश्य ही बोलते हैं। अभी अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावों के परिणामों के वक्त भी वे लाइव प्रसारण में ऐसे धड़ाधड झूठ बोल रहे थे कि टीवी चैनलों को वह लाइव प्रसारण ही बंद करना पड़ा। भारत में कोई करके दिखाए। बल्कि भारत में तो चैनल नेताओं के साथ प्रतियोगिता में भी उतर सकते हैं। इतना झूठ बोलने वाले नेता को भी अमेरिकियों ने पता नहीं फिर से राष्ट्रपति क्यों नहीं बनाया? उनसे उपयुक्त नेता दुनिया में और कौन होगा। और सच के प्रति इतना आग्रह क्यों भाई?

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